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फर्जी डॉक्टर के पास मिले थे चार ब्लड सैंपल, जमानत पर रिहा
अमर उजाला ब्यूूराे
Updated Tue, 29 Aug 2017 02:15 AM IST
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फर्जी डाक्टर वीरेंद्र सिंह
- फोटो : Amar Ujala
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एएमयू के जेएन मेडिकल कॉलेज के वार्ड नंबर सात में पकड़ा गया फर्जी डॉक्टर किसी पैथॉलाजी लैब से जुड़े रैकेट का हिस्सा लग रहा है। यह बात इसलिए स्पष्ट हो रही है कि उसके पास से तलाशी में चार ब्लड सैंपल भी मिले थे, जो उसने मेडिकल कॉलेज में ही मरीजों को ठगकर लिए होंगे। हालांकि सोमवार को उसे पुलिस द्वारा कोर्ट में पेश किया गया, जहां से उसे जमानत पर रिहा कर दिया गया।
मगर अब पुलिस इस मुकदमे की विवेचना आगे बढ़ा रही है। जिसमें इस रैकेट से जुड़े लैब संचालकों तक पहुंचा जा सकेगा। वहीं फर्जी डॉक्टर के पकड़े जाने के बाद मेडिकल कॉलेज व आसपास के क्षेत्रों में खलबली मची है। मेडिकल कॉलेज प्रशासन व सुरक्षाकर्मी भी चौकन्ना हो गए हैं। निर्णय लिया गया है कि जल्द ही मेडिकल कॉलेज के पैरामेडिकल कर्मियों को नए तरह की जैकेट दी जाएगी। ताकि वह दूर से ही पहचान में आ सकें।
जेएन मेडिकल कॉलेज के वार्ड नंबर सात (बर्न वार्ड, प्लास्टिक सर्जरी) में एक युवक डॉ. हिमांशु बनकर एक मरीज का उपचार करने पहुंचा था। तभी उसे दबोचा गया और पूछताछ के दौरान इस युवक ने अपना नाम वीरेंद्र सिंह, पुत्र लाला राम, निवासी करहला गौरवा थाना गोंडा, अलीगढ़ बताया था। उसके पास से मेडिकल से जुड़े तमाम सामान सहित सिरिंज, चार ब्लड सैंपल व कुछ अन्य सामान और मोबाइल बरामद किया गया।
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ब्लड सैंपल मिलने के बाद पुलिस की जांच इस तरफ इशारा कर रही है कि यह किसी पैथॉलाजी लैब रैकेट से जुड़ा ठग था जो लोगों को बेवकूफ बनाकर उनके ब्लड सैंपल लेकर आ रहा होगा। साथ ही मरीजों को दूसरे अस्पतालों में भेजने के लिए प्रेरित कर रहा होगा। इंस्पेक्टर सिविल लाइंस जावेद खान के अनुसार सिक्योरिटी इंचार्ज की ओर से धोखाधड़ी की धाराओं में मुकदमा दर्ज करा कर वीरेंद्र को सोमवार को कोर्ट में पेश किया गया, जहां उसे जमानत पर रिहा कर दिया गया। चूंकि मुकदमा 7 साल से कम सजा के प्रावधान का था। इसलिए जमानत दे दी गई।
इस मामले में अब कार्रवाई पुलिस के हाथ में है। मेडिकल कॉलेज में 700 से अधिक जूनियर डॉक्टर हैं, जिसमें से आधे बाहर के होते हैं। सभी को पहचान पाना मुश्किल है। हालांकि इस घटना के बाद रेजीडेंट डॉक्टर समेत सभी कर्मचारी चौकन्ना हो गए हैं। पैरा मेडिकल स्टॉफ के लिए जैकेट का आर्डर दे दिया गया है, जो जल्द आ जाएगी। उसके ऊपर जेएनएमसी अंकित होगा। इससे पहचानने में आसानी होगी। -प्रो.हैरिस एम खान, अधीक्षक जेएन मेडिकल कॉलेज
रैकेट पर लगाम कसने के लिए जेएन मेडिकल कॉलेज में सुरक्षा व्यवस्था चाक चौबंद करनी होगी। कोर्ट का आर्डर है कि एक मरीज के साथ दो से अधिक तीमारदार नहीं रह सकते। इस नियम को सख्ती से लागू करना होगा। दलालों से छुटकारा पाने के लिए पुलिस प्रशासन से भी सहयोग लेना जरूरी है। पकड़ा गया युवक कई महीनों से देखा जा रहा था। इसमें उसके साथ कितने लोग जुड़े हैं, इसकी गहनता से तहकीकात होने पर रैकेट का खुलासा हो सकता है। - डॉ. अब्दुल्लाह आजमी, अध्यक्ष आरडीए
मेडिकल कॉलेज में किसी बड़े रैकेट की आशंका लोग पहले से ही जताते आए हैं। कोल विधायक अनिल पाराशर ने कहा कि वह पहले ही इसकी शिकायत एएमयू कुलपति से कर चुके हैं। आज का मामला सामने आने के बाद उनकी शिकायत सच साबित हुई है।
बरौली विधायक ठाकुर दलवीर सिंह ने भी ऐसी शिकायत मेडिकल कॉलेज के अधिकारियों से की थी। यहां सक्रिय रैकेट दूरदराज से आए मरीजों को मेडिकल कॉलेज से प्राइवेट नर्सिंग होम में जाने को प्रेरित करते हैं। कुछ दवा एवं लैब सेंटर के दलाल भी मेडिकल में सक्रिय रहते हैं। मरीजों के पहुंचने या रेफर होने की स्थिति में ये लोग टूट पड़ते हैं। ऐसे लोगों की पहुंच प्रशासन से लेकर पुलिस तक है। इसकी वजह से कोई कुछ नहीं बिगाड़ पाता। फर्जी डॉक्टर बनकर उपचार करने पहुंचे युवक के पास से एक ही दुकान के कई विजिटिंग कार्ड बरामद हुए थे। इसके अतिरिक्त कई पर्चे भी बरामद किये गये थे, जिस पर छोटे-छोटे अक्षरों में दर्जनों लोगों के नाम एवं मोबाइल नंबर अंकित थे। पुलिस इस मामले की ठीक से जांच करें तो बड़ी सफलता मिल सकती है।
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मगर अब पुलिस इस मुकदमे की विवेचना आगे बढ़ा रही है। जिसमें इस रैकेट से जुड़े लैब संचालकों तक पहुंचा जा सकेगा। वहीं फर्जी डॉक्टर के पकड़े जाने के बाद मेडिकल कॉलेज व आसपास के क्षेत्रों में खलबली मची है। मेडिकल कॉलेज प्रशासन व सुरक्षाकर्मी भी चौकन्ना हो गए हैं। निर्णय लिया गया है कि जल्द ही मेडिकल कॉलेज के पैरामेडिकल कर्मियों को नए तरह की जैकेट दी जाएगी। ताकि वह दूर से ही पहचान में आ सकें।
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जेएन मेडिकल कॉलेज के वार्ड नंबर सात (बर्न वार्ड, प्लास्टिक सर्जरी) में एक युवक डॉ. हिमांशु बनकर एक मरीज का उपचार करने पहुंचा था। तभी उसे दबोचा गया और पूछताछ के दौरान इस युवक ने अपना नाम वीरेंद्र सिंह, पुत्र लाला राम, निवासी करहला गौरवा थाना गोंडा, अलीगढ़ बताया था। उसके पास से मेडिकल से जुड़े तमाम सामान सहित सिरिंज, चार ब्लड सैंपल व कुछ अन्य सामान और मोबाइल बरामद किया गया।
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ब्लड सैंपल मिलने के बाद पुलिस की जांच इस तरफ इशारा कर रही है कि यह किसी पैथॉलाजी लैब रैकेट से जुड़ा ठग था जो लोगों को बेवकूफ बनाकर उनके ब्लड सैंपल लेकर आ रहा होगा। साथ ही मरीजों को दूसरे अस्पतालों में भेजने के लिए प्रेरित कर रहा होगा। इंस्पेक्टर सिविल लाइंस जावेद खान के अनुसार सिक्योरिटी इंचार्ज की ओर से धोखाधड़ी की धाराओं में मुकदमा दर्ज करा कर वीरेंद्र को सोमवार को कोर्ट में पेश किया गया, जहां उसे जमानत पर रिहा कर दिया गया। चूंकि मुकदमा 7 साल से कम सजा के प्रावधान का था। इसलिए जमानत दे दी गई।
इस मामले में अब कार्रवाई पुलिस के हाथ में है। मेडिकल कॉलेज में 700 से अधिक जूनियर डॉक्टर हैं, जिसमें से आधे बाहर के होते हैं। सभी को पहचान पाना मुश्किल है। हालांकि इस घटना के बाद रेजीडेंट डॉक्टर समेत सभी कर्मचारी चौकन्ना हो गए हैं। पैरा मेडिकल स्टॉफ के लिए जैकेट का आर्डर दे दिया गया है, जो जल्द आ जाएगी। उसके ऊपर जेएनएमसी अंकित होगा। इससे पहचानने में आसानी होगी। -प्रो.हैरिस एम खान, अधीक्षक जेएन मेडिकल कॉलेज
रैकेट पर लगाम कसने के लिए जेएन मेडिकल कॉलेज में सुरक्षा व्यवस्था चाक चौबंद करनी होगी। कोर्ट का आर्डर है कि एक मरीज के साथ दो से अधिक तीमारदार नहीं रह सकते। इस नियम को सख्ती से लागू करना होगा। दलालों से छुटकारा पाने के लिए पुलिस प्रशासन से भी सहयोग लेना जरूरी है। पकड़ा गया युवक कई महीनों से देखा जा रहा था। इसमें उसके साथ कितने लोग जुड़े हैं, इसकी गहनता से तहकीकात होने पर रैकेट का खुलासा हो सकता है। - डॉ. अब्दुल्लाह आजमी, अध्यक्ष आरडीए
मेडिकल कॉलेज में किसी बड़े रैकेट की आशंका लोग पहले से ही जताते आए हैं। कोल विधायक अनिल पाराशर ने कहा कि वह पहले ही इसकी शिकायत एएमयू कुलपति से कर चुके हैं। आज का मामला सामने आने के बाद उनकी शिकायत सच साबित हुई है।
बरौली विधायक ठाकुर दलवीर सिंह ने भी ऐसी शिकायत मेडिकल कॉलेज के अधिकारियों से की थी। यहां सक्रिय रैकेट दूरदराज से आए मरीजों को मेडिकल कॉलेज से प्राइवेट नर्सिंग होम में जाने को प्रेरित करते हैं। कुछ दवा एवं लैब सेंटर के दलाल भी मेडिकल में सक्रिय रहते हैं। मरीजों के पहुंचने या रेफर होने की स्थिति में ये लोग टूट पड़ते हैं। ऐसे लोगों की पहुंच प्रशासन से लेकर पुलिस तक है। इसकी वजह से कोई कुछ नहीं बिगाड़ पाता। फर्जी डॉक्टर बनकर उपचार करने पहुंचे युवक के पास से एक ही दुकान के कई विजिटिंग कार्ड बरामद हुए थे। इसके अतिरिक्त कई पर्चे भी बरामद किये गये थे, जिस पर छोटे-छोटे अक्षरों में दर्जनों लोगों के नाम एवं मोबाइल नंबर अंकित थे। पुलिस इस मामले की ठीक से जांच करें तो बड़ी सफलता मिल सकती है।