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पूर्व प्रधान के पिता को चाकू से गोद डाला
अमर उजाला,अलीगढ़
Updated Fri, 04 Nov 2016 01:23 AM IST
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A chance to talk on crime Sharma SPRA resolution.
- फोटो : amar Ujala
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थाना पालीमुकीमपुर के गांव गिजरौली में नलकूप पर सो रहे पूर्व ग्राम प्रधान के पिता की चाकू से गोदकर हत्या कर दी गई। हत्यारों ने चेहरे, सिर पर चाकू के ताबड़तोड़ 11 वार किए हैं। बर्बरता इतनी कि एक आंख तक फोड़ दी। सुबह चाय, नाश्ता लेकर पिता के पास पहुंचे पूर्व प्रधान ने चारपाई पर खून से लथपथ पड़ा शव देखा तो होश उड़ गए।
आग की तरह गांव से जिला मुख्यालय तक खबर फैली तो थानेदार से लेकर एसपी देहात तक मौके पर पहुंच गए। परिजन किसी भी रंजिश से इनकार कर रहे हैं, जबकि मौके पर कोई लूटपाट नहीं हुई जिससे हत्या की गुत्थी खासी उलझ गई है। हत्या की वजह तलाशने में जुटी पुलिस का दावा है कि जल्द ही खुलासा कर दिया जाएगा।
गिजरौली निवासी भोलेराम (70) किसान थे। गिजरौली-पालीमुकीमपुर संपर्क मार्ग पर उनका नलकूप है। वहीं मुर्गी फार्म भी है। इसी नलकूप पर वह सोते थे। बुधवार रात भी अकेले ही नलकूप पर सोए थे। गुरुवार सुबह करीब 8 बजे पुत्र पूर्व प्रधान अतरौली राजपाल सिंह चाय और खाना लेकर उनके पास पहुंचे हत्या की जानकारी हुई। एसपीआरए संकल्प शर्मा, सीओ विजयेंद्र द्विवेदी, एसओ वीरेंद्र सिंह इंदौलिया सूचना मिलते ही मौके पहुंचकर घटना की जानकारी ली। पूर्व विधायक डा. अनवार खां के बेटे साकिब अनवार, सौरभ सक्सेना एडवोकेट भी पहुंच गए। पोस्टमार्टम में चाकू के 11 वार निकले हैं।
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हमलावरों का इरादा सिर्फ और सिर्फ हत्या करना था। ऐसा पुलिस सूत्र मानते हैं। वजह घटना स्थल पर भोलेराम का मोबाइल तक पड़ा मिला है। नलकूप में काफी मात्रा में धान, इंनवर्टर, ट्रैक्टर, ट्राली, कीटनाशक दवाओं सहित अन्य तमाम सामान मौजूद था। मुर्गी फार्म है। हमलावरों ने किसी भी सामान को नहीं छुआ।
बताते हैं कि मुर्गी फार्म पर भोलेराम ने कुत्ते पाल रखे थे। यह कुत्ते रात के समय आसानी से किसी को रास्ते से निकलने तक नहीं देते थे। भोलेराम की आवाज पर ही यह कुत्ते शांत होते थे और लोगों को निकलने का रास्ता मिल पाता था। पुलिस इसी बात पर अचंभित है कि रात में इर्द गिर्द रहने वाले यह पालतू कुत्ते खामोश क्यों रहे? भौंके क्यों नहीं? हमलावरों पर हमला क्यों नहीं किया? तो क्या किसी करीबी का हत्या में हाथ हो सकता है? किसी करीबी (खासकर नियमित रूप से भोलेराम के पास पहुंचने वाले) को देखकर ही कुत्ते खामोश रहे होंगे? अथवा खुद भोलेराम ने खामोश करा दिया होगा? पुलिस इन तमाम बिंदुओं पर जांच कर रही है।
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आग की तरह गांव से जिला मुख्यालय तक खबर फैली तो थानेदार से लेकर एसपी देहात तक मौके पर पहुंच गए। परिजन किसी भी रंजिश से इनकार कर रहे हैं, जबकि मौके पर कोई लूटपाट नहीं हुई जिससे हत्या की गुत्थी खासी उलझ गई है। हत्या की वजह तलाशने में जुटी पुलिस का दावा है कि जल्द ही खुलासा कर दिया जाएगा।
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गिजरौली निवासी भोलेराम (70) किसान थे। गिजरौली-पालीमुकीमपुर संपर्क मार्ग पर उनका नलकूप है। वहीं मुर्गी फार्म भी है। इसी नलकूप पर वह सोते थे। बुधवार रात भी अकेले ही नलकूप पर सोए थे। गुरुवार सुबह करीब 8 बजे पुत्र पूर्व प्रधान अतरौली राजपाल सिंह चाय और खाना लेकर उनके पास पहुंचे हत्या की जानकारी हुई। एसपीआरए संकल्प शर्मा, सीओ विजयेंद्र द्विवेदी, एसओ वीरेंद्र सिंह इंदौलिया सूचना मिलते ही मौके पहुंचकर घटना की जानकारी ली। पूर्व विधायक डा. अनवार खां के बेटे साकिब अनवार, सौरभ सक्सेना एडवोकेट भी पहुंच गए। पोस्टमार्टम में चाकू के 11 वार निकले हैं।
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हमलावरों का इरादा सिर्फ और सिर्फ हत्या करना था। ऐसा पुलिस सूत्र मानते हैं। वजह घटना स्थल पर भोलेराम का मोबाइल तक पड़ा मिला है। नलकूप में काफी मात्रा में धान, इंनवर्टर, ट्रैक्टर, ट्राली, कीटनाशक दवाओं सहित अन्य तमाम सामान मौजूद था। मुर्गी फार्म है। हमलावरों ने किसी भी सामान को नहीं छुआ।
बताते हैं कि मुर्गी फार्म पर भोलेराम ने कुत्ते पाल रखे थे। यह कुत्ते रात के समय आसानी से किसी को रास्ते से निकलने तक नहीं देते थे। भोलेराम की आवाज पर ही यह कुत्ते शांत होते थे और लोगों को निकलने का रास्ता मिल पाता था। पुलिस इसी बात पर अचंभित है कि रात में इर्द गिर्द रहने वाले यह पालतू कुत्ते खामोश क्यों रहे? भौंके क्यों नहीं? हमलावरों पर हमला क्यों नहीं किया? तो क्या किसी करीबी का हत्या में हाथ हो सकता है? किसी करीबी (खासकर नियमित रूप से भोलेराम के पास पहुंचने वाले) को देखकर ही कुत्ते खामोश रहे होंगे? अथवा खुद भोलेराम ने खामोश करा दिया होगा? पुलिस इन तमाम बिंदुओं पर जांच कर रही है।