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नकली ब्रांडेड देसी घी बनाने की फैक्ट्री पकड़ी

Mon, 23 Apr 2018 01:53 AM IST
क्राइम डेस्क, अमर उजाला, अलीगढ़।
क्राइम डेस्क, अमर उजाला, अलीगढ़। Updated Mon, 23 Apr 2018 01:53 AM IST
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Fake branded desi ghee making factory
नकली घी फैक्ट्री वाले प्रकरण में आरोपियों को लेकर वार्ता करते एसएसपी राजेश पांडेय। - फोटो : अमर उजाला
कभी मिलावटगढ़ के रूप में कुख्यात रहे अलीगढ़ में एक बार फिर नकली देसी घी बनाने का धंधा जोरों पर चल रहा है। शनिवार रात बन्नादेवी पुलिस ने छापेमारी कर महानगर के सारसौल इलाके की गुुरु रामदास नगर कॉलोनी में नकली देसी घी बनाने की फैक्ट्री पकड़ी है। मौके से फैक्ट्री संचालक सहित तीन लोगों को गिरफ्तार किया गया है। 
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इस फैक्ट्री में कई नामी कंपनियों के नाम से उनकी हूबहू पैकिंग में एसेंस (देसी घी की खुशबू देने वाला केमिकल) रिफाइंड व वनस्पति घी आदि की मिलावट से देसी घी बनाकर बेचा जा रहा था। करीब एक क्विंटल माल के तैयार पैकिट व अधबना माल, मिलावट की वस्तुएं, पैकिंग का सामान आदि बरामद किया है। पुलिस की सूचना पर एफडीए ने भी सैंपल लकर जांच के लिए भेज दिए हैं। इस कार्रवाई के बाद इस अवैध कारोबार से जुड़े लोगों में खलबली मच गई है। कई जगह पुलिस छापेमारी के इरादे से गई, मगर वहां सब कुछ गायब मिला। अब पुलिस टीमें गोपनीय ढंग से इस धंधे से जुड़े लोगों की रैकी में जुट गई हैं। वहीं इस खुलासे में शामिल पुलिस टीम को 25 हजार के इनाम की घोषणा एसएसपी स्तर से की गई है।
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एसएसपी राजेश पांडेय ने पुलिस लाइन सभागार में रविवार दोपहर प्रेसवार्ता के दौरान बताया कि मिलावटी सामान बनने संबंधी मुखबिर की सूचना पर एसपी सिटी अतुल श्रीवास्तव व सीओ द्वितीय पंकज श्रीवास्तव के निर्देशन में इंस्पेक्टर बन्नादेवी जितेंद्र दीखित के नेतृत्व में पुलिस टीम ने गुरु रामदास नगर साईं विहार में सोनू पुत्र किशनलाल के मकान में शनिवार देर रात छापा मारा। 
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इस दौरान मौके से मकान स्वामी सोनू के अलावा धर्मेंद्र उर्फ डीके निवासी ब्रह्मनपुरी चौक सासनी गेट, योगेश उर्फ हनी निवासी फायर बिग्रेड कॉलोनी बन्नादेवी को गिरफ्तार किया गया। मौके से भारी मात्रा में अमूल, संस्कार, माधव, पारस, मधुसुदन ब्रांड  के एक किलो व आधा किलो पैकिंग में तैयार नकली देसी घी आदि माल बरामद हुआ। अभियुक्तों में धर्मेंद्र ने स्वीकार किया कि वह इस फैक्ट्री का संचालक है। एसेंस की मदद से वह रिफाइंड, वनस्पति घी मिलाकर नकली देसी घी बनाते हैं।

दिल्ली से नामी कंपनियों की हूबहू पैकिंग खरीदकर लाते हैं और उसी में यह नकली घी पैककर शहर व आसपास के कस्बों में फेरी व परचून वालों को बेचते हैं। इस माल को थाने   लाकर एफडीए की टीम बुलाई गई। टीम ने चार सैंपल लिए हैं, जिन्हें जांच के लिए भेजा गया है। एसएसपी ने सैंपल रिपोर्ट आने व आरोपियों पर रासुका के तहत कार्रवाई करने की बात कही है। साथ में इन आरोपियों से मिली जानकारी के आधार पर निकट भविष्य में गोपनीय ढंग से बड़ी कार्रवाई के संकेत दिए हैं। 

इस पुलिस टीम में इंस्पेक्टर के अलावा एसआई अतुल कुमार, योगेश गौतम, सिपाही समीर यादव, रामकुमार, हरिओम व धीरेंद्र सिंह भी शामिल रहे। टीम को 25 हजार की घोषणा हुई है। इस मौके पर एसपी सिटी व सीओ द्वितीय भी मौजूद रहे।

यह माल हुआ बरामद
 68 पैकेट अमूल 1 लीटर में
 07 पैकेट माधव 1 लीटर में
 04 पैकेट माधव 500 एमएल में
 10 पैकेट पारस 1 लीटर में
 अवसर वनस्पति डालडा घी 12 टीन
 परंपरा रिफाइंड 1 टीन
 वनस्पति रिफाइंड 9 टीन
 बिना रैपर रिफाइंड  3 टीन
 स्टील टंकी आधा नकली घी
 गैस चूल्हा एक सिलेंडर एचपी
 पारस रैपर खाली 01 लीटर के 50
 मधूसूदन रैपर खाली 01 लीटर के 20
 संस्कार रैपर खाली 01 लीटर के 31
 माधव रैपर खाली 01 लीटर के 14
 संस्कार 500 एमएल खाली रैपर 28
 माधव 500 एमएल खाली रैपर 120
 अमूल 500 एमएल खाली रैपर 105
 खाली पन्नी 81
 टीन खाली 36

है न कमाल..यहां 100 रुपये में मिलता 500 का माल
बटर फ्लॉवर सी 2101 नामक ब्रांडेड फासी से एप्रूव्ड एसेंस (देसी घी की खुशबू देने वाला केमिकल) का ही यह कमाल है कि 15 किलो रिफाइंड और 15 किलो वनस्पति घी के मिश्रण में मात्र एक ढक्कन भर मात्रा का एसेंस मिलाने से 30 किलो नकली देसी घी तैयार होता है। उसकी महक से कोई यह नहीं बता सकता कि यह देसी घी नहीं है। अब 100 रुपये प्रति किलो के खर्चे पर तैयार होने वाला यह नकली देसी घी मार्केट में ब्रांडेड कंपनियों की पैकिंग 500-500 रुपये प्रतिकिलो कीमत में खुलेआम बेचा जा रहा है। यह कमाल साईं विहार गुरु रामदास नगर में पकड़ी गई नकली देसी घी बनाने की फैक्ट्री के संचालक ने हाथरस के चामड़ गेट इलाके में चलने वाली लो फैट का घी तैयार करने वाली एक फैक्ट्री में सीखा और फिर वहां से काम छोड़कर अपने शहर आकर उसने नकली घी बनाने का गोरखधंधा शुरू कर दिया।

इस तरह से संचालित हो रहा था गोरखधंधा
एसएसपी के अनुसार पूछताछ में धर्मेंद्र ने स्वीकारा कि उसने सोनू का मकान फैक्ट्री संचालन के लिए इस शर्त पर किराये पर लिया कि वह उसे प्रति किलो के हिसाब से 4 रुपये की हिस्सेदारी फैक्ट्री से होने वाली आय में से देगा। यहां उसने महावीरगंज से रिफाइंड, वनस्पति घी मंगाना शुरू कर दिया। इसमें एसेंस मिलाकर उसे एक-एक किलो व 500-500 ग्राम की पैकिंग में पैक किया। साथ ही पैकिंग के लिए रैपर व डिब्बे दिल्ली से मंगाए जो आसानी से वहां मिल जाते हैं। इसके बाद महावीरगंज व आसपास के इलाकों में बाहर कस्बों से आने वाले रिटेलरों, एजेंटों व इक्के-तांगे वालों से कमीशन पर इसकी बिक्री शुरू कराई। वह एक दिन में 25-25 कार्टन माल तैयार कर बेच देते थे।

यह है गोरखधंधे का आय व्यय का लेखा-जोखा
धर्मेंद्र ने स्वीकारा कि उन्हें एक किलो नकली देसी घी का डिब्बा 100 रुपये में पड़ता है, जिसमें 9 रुपये की पैकिंग, करीब 80 रुपये प्रति किलो रिफाइंड व वनस्पति घी का खर्च, गैस, बिजली की प्रेस से पैकिंग चिपकाना आदि का खर्च शामिल है। इसके बाद वह एजेंट को 105 से 110 रुपये प्रति पैकेट बेचते हैं। एजेंट बड़े विक्रेता को 130 रुपये प्रति पैकेट में बेचता है। छोटी दुकान को यह पैकेट 350 रुपये में पड़ता है और ग्राहक को 500 रुपये में मिलता है। इस तरह सभी की आय बंधी हुई है।

यहां पहुंचाया जा रहा था यह माल
एसएसपी ने बताया कि धर्मेंद्र ने स्वीकारा है कि उनके यहां से तैयार माल महावीरगंज के हिमांशु के यहां, पाठक जी के यहां, खिरनी गेट पर नितिन के यहां, अंबागंज के आरके के यहां, सिकंदराराऊ बड़ा बाजार के सौरभ व सुरेंद्र के यहां जा रहा था। इसी तरह हाथरस में अनूप व कमल नाम के एजेंट उनका माल ले जा रहे थे। अतरौली के उमेश के यहां उनका माल जा रहा था। इसके अलावा कई लोग खुद उसकी तरह माल तैयार कर रहे हैं।

छापे से पहले हुई सफाई, महिलाएं आगे आईं
धर्मेंद्र से पूछताछ में जब पुलिस को कुछ ठिकानों की जानकारी हुई तो उन ठिकानों पर दबिश के लिए टीम रवाना हुईं। मगर इस गोरखधंधे में जुड़े लोगों का नेटवर्क इतना तेज है कि जैसे ही धर्मेंद्र आदि की गिरफ्तारी हुई। तभी खबर फैल गई और जहां पुलिस दबिश देने पहुंची, वहां सब कुछ साफ था। वहां महिलाएं पुलिस के इंतजार में बैठी थीं। बाकायदा उस स्थान की सफाई की गई थी। इस पर पुलिस वापस लौट आई। अब उनकी गोपनीय ढंग से रैकी कराई जा रही है।

माल में चर्बी मिले होने का अंदेशा
हालांकि इस बात की पुष्टि तो फॉरेंसिक जांच में होगी। मगर जिस तरह से सस्ती कीमत में यह माल बेचा जा रहा था। उससे यह अंदेशा पुलिस व एफडीए टीम को है कि इसमें निश्चित तौर पर चर्बी मिली होगी। इसकी पुष्टि होने पर इन पर रासुका के तहत कार्रवाई की जाएगी।

छापे से पहले हुई सफाई महिलाएं आगे आईं
धर्मेंद्र से पूछताछ में जब पुलिस को कुछ ठिकानों की जानकारी हुई तो उन ठिकानों पर दबिश के लिए टीम रवाना हुईं। मगर इस गोरखधंधे में जुड़े लोगों का नेटवर्क इतना तेज है कि जैसे ही धर्मेंद्र आदि की गिरफ्तारी हुई। तभी खबर फैल गई और जहां पुलिस दबिश देने पहुंची, वहां सब कुछ साफ था। वहां महिलाएं पुलिस के इंतजार में बैठी थीं। बाकायदा उस स्थान की सफाई की गई थी। इस पर पुलिस वापस लौट आई। अब उनकी गोपनीय ढंग से रैकी कराई जा रही है।


पैकिंग पर अंकित कीमत
 पारस-525 रुपये प्रति किलो
 अमूल-505 रुपये प्रति किलो
 मधूसूदन- 460 रुपये प्रति किलो
 संस्कार-330 रुपये प्रति किलो

मिले बड़े साक्ष्य, जल्द होगी तगड़ी कार्रवाई
एसएसपी ने बताया कि पूछताछ में इस रैकेट के बड़े साक्ष्य हाथ लगे हैं। चूंकि अब ताजा कार्रवाई हुई है। इसलिए वह लोग सतर्क हो गए हैं। मगर उन पर बेहद गोपनीय ढंग से काम कराया जा रहा है। उनका माल हटाकर कहां रखा गया है और किस गोदाम में है। इस सबकी जांच कराई जा रही है। जल्द बड़ी कार्रवाई सामने आएगी। साथ ही सभी कंपनी के अधिकारियों को भी सूचना दे दी गई है। वह अपने स्तर से भी इन लोगों पर कार्रवाई के लिए आगे आ रहे हैं।
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