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चंद घंटों में सुराग, 48 घंटे में कातिल बेनकाब
अमर उजाला ब्यूूराे
Updated Wed, 29 Mar 2017 01:49 AM IST
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हत्या के आरोप में पकड़े गए नौकर अदीब को लेकर पत्रकारों से वार्ता करते एसएसपी राजेश पांडेय।
- फोटो : Amar Ujala
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महानगर के प्रमुख बाजार रेलवे रोड पर कपड़ा व्यापारी ओमप्रकाश वार्ष्णेय लूट के बाद हत्या 48 घंटे में ही मंगलवार को पुलिस ने खुलासा कर दिया। यह हत्या दुकान के नौकर ने लूट के इरादे से की थी और लूट के दौरान दुकान पर उसे मात्र 1.85 लाख रुपये मिले थे। पुलिस ने नौकर को गिरफ्तार कर उसके पास से लूटी गई रकम में से 1.77 लाख रुपये बरामद भी कर लिए हैं।
हालांकि पुलिस को रविवार सुबह हुई हत्या के चंद घंटे बाद ही सुराग हाथ लग गया था। मगर सुराग के सहारे आरोपी तक पहुंचने में वक्त लगा और सफलता हाथ लग गई। इस खुलासे पर आईजी और एसएसपी ने पुलिस टीम को 20 हजार के नकद इनाम की घोषणा की है।
बेल्ट, लाल जूता और फोन कॉल बने सुरागः एसएसपी राजेश पांडेय ने मंगलवार शाम प्रेसवार्ता में बताया कि रेलवे रोड दुबे जी का कूचा स्थित मार्केट में रविवार सुबह ओमप्रकाश वार्ष्णेय की लूट के बाद हत्या के बाद जब पुलिस व फॉरेंसिक टीम ने जांच शुरू की तो चंद घंटों में ही पुलिस को कुछ सुराग मिल गए थे। सबसे पहले तो फॉरेंसिक टीम को दुकान की तलाशी में एक खून से सनी बेल्ट मिली और एक बटन मिला। इसके बाद एसओजी को बाहर लोगों से पूछताछ में पता चला कि घटना के समय के इर्द-गिर्द टी-शर्ट व लोअर (रेडीमेड पायजाम), लाल जूता पहने और रुमाल से मुंह बांधे एक युवक को जरूर आते-जाते देखा गया। तीसरी यह हुई कि जब दुकान के सभी 8 नौकरों को पूछताछ के लिए बुलाने की बारी आई तो दुकान का एकमात्र नौकर अबू अदीब पुत्र डॉ. आले मुस्तफा निवासी हाल निवासी धौर्रा माफी क्वार्सी मूल निवासी नई बस्ती बन्नादेवी मौके पर नहीं था। जब पुलिस के कहने पर रविवार एक बजे बाद ओमप्रकाश के छोटे बेटे दीपक अबू अदीब को दुकान पर आने के लिए फोन किया। इस पर अदीब ने यह कहते हुए भइया आज उसे कुछ जरूरी काम है। इसलिए वह आ नहीं सकता और अगर उसके घर से फोन आए तो यह मत बताना कि आज दुकान पर नहीं आया। बस इसके बाद से अदीब पुलिस रडार पर आ गया था और पुलिस काफी हद तक राहत में आ गई।
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फॉरेंसिक रिपोर्ट तक इंतजार, सबूत संग दबोचाः
इसके बाद पुलिस ने फॉरेंसिक साक्ष्य जुटाने वाली फील्ड यूनिट की रिपोर्ट का इंतजार किया। फील्ड यूनिट ने जांच पड़ताल में बताया कि मौके से जो बटन मिला वह ओमप्रकाश की शर्ट का टूटकर गिरा था। बेल्ट का पता चला कि ओमप्रकाश की बेल्ट उनकी कमर में है। मौके से ओमप्रकाश के अलावा एक ही व्यक्ति का खून से सना हाथ के पंजे का निशान मिला। यह जानने के बाद पुलिस ने अदीब की तलाश शुरू करते हुए मंगलवार सुबह उसे दबोच लिया। इसके बाद उसके घर की तलाशी में खून से सने उसके लाल रंग के जूते, टीशर्ट-लोअर, हत्या में प्रयुक्त हथौड़ा, ओमप्रकाश के हाथ से लूटी गई चांदी की अंगूठी व उनका एटीएम कार्ड व मास्टर कार्ड और खुद अदीब के पास से लूटी गई रकम में से 1.77 लाख रुपये बरामद हो गए।
नशे के लिए लूट मकसद था, हत्या नहींः एसएसपी के अनुसार पूछताछ में आरोपी ने स्वीकारा कि गलत संग और नशे की लत के कारण दसवीं में फेल होने के बाद वह पढ़ न सका। पिता ने उसे समझाया कि अगर वह काम धंधा सीख लेगा तो वह व्यापार करा देगा। इस पर पिता ने ही परिचित ओमप्रकाश की दुकान पर उसे व्यापार सिखाने के लिए तीन-चार माह पहले बिना मेहनताने के लगा दिया। वहां से उसे कोई वेतन नहीं मिलता था। मगर नशे के लिए वह परेशान रहता था। यहां उसने हर रोज की रकम देखी तो मन में लालच आ गया। घटना से पहली शाम उसने रकम देखी तो उम्मीद थी कि 1 लाख रुपया तक मिल जाएगा। बस वह अगले दिन सुबह ओमप्रकाश के अकेले पहुंचने के समय घर से हथौड़ा लेकर लोअर में बेल्ट बांधकर बाइक से निकल पड़ा।
कोई पहचान न ले, इसलिए रुमाल बांधा। उसने ओमप्रकाश के दुकान खोलने के बाद उन पर हमला बोला और गल्ले की चाभी मांगी। न देने पर बस चोट पहुंचाने के इरादे से सिर में हथौड़ा मार दिया। इसके बाद गल्ले का ताला तोड़कर उसमें मिले 1.85 लाख लेकर भाग गया। इस दौरान लोअर पर बंधी बेल्ट हथौड़ा वहीं गिर गया।खुलासे में शामिल टीमः एसएसपी के अनुसार एसपी सिटी अतुल श्रीवास्तव के पर्यवेक्षण और सीओ द्वितीय अमित कुमार के नेतृत्व में इस खुलासे में इंस्पेक्टर गांधीपार्क दिनेश चंद्र दुबे, एसओजी प्रभारी छोटेलाल, सर्विलांस प्रभारी राकेश यादव, एसआई जयप्रकाश यादव, सिपाही सुखवीर, ऋषिपाल, अखिल प्रताप, विजय कुमार, मोहरपाल, विजय कुमार, गौरव, ललित, उमेश चंद्र, अहशान उल व श्याम सिंह की भूमिका सराहनीय रही। एसएसपी ने 5 हजार और आईजी ने 15 हजार से सम्मानित करने की घोषणा की है।
संभल न सके बहकते कदम
अभिषेक शर्मा
गलत संगत और नशे की लत के चलते दसवीं के बाद जब अदीब ने पढ़ाई नहीं की तो डॉक्टर बाप ने उसे बहुत समझाया। मगर बात न बनी तो धंधा कराने की गरज से टिप्स लेने के लिए बेटे को अपने बेहद करीबी व्यापारी ओमप्रकाश के पास भेज दिए। शायद बाप को अंदाजा न था कि बेटा इस हद तक हाथ से निकल जाएगा।
गिरफ्तारी की खबर पर जब डॉक्टर बाप को थाने बुलाया गया तो उसने पुलिस के सामने ही बेटे को झिड़कते हुए उससे मुंह फेर लिया और यह कहकर चला गया कि दूर रह मेरे पास आने की जरूरत नहीं है।
मां रकम देखते ही डर गई थी
अदीब के पिता डॉ.आले मुस्तफा दिल्ली के सरकारी अस्पताल में डॉक्टर हैं। इसके अलावा घर में मां, दो भाई व दो बहनें हैं। इनमें एक दोनों भाई पढ़ाई कर रहे हैं, जबकि एक बहन एमबीबीएस की तैयारी कर रही है। छोटी बहन शहर के नामचीन कान्वेंट स्कूल की छात्रा है। वारदात के बाद घर पहुंचे अदीब ने यह रकम अपने कमरे की सेफ में रख दी। जिस पर मां की नजर गई और उसने पूछा तो बोल दिया कि दोस्त की गाड़ी बिकी हुई है। रखने के लिए दिए हैं। मां बोली कि झूठ बोल रहा है। कुछ कर तो नहीं आया। जब पुलिस पहुंची तो वह समझ गई।
व्यापारी के घर मिले ढाई लाख, परिवार ने जताई सहमित
एसएसपी के अनुसार जब गिरफ्तारी के बाद आरोपी से 1.77 लाख बरामद हुए तो पीड़ित परिवार को थाने बुलाया गया। वहां उन्होंने स्वीकारा कि घटना से पहली रात ओमप्रकाश ढाई लाख रुपये अपने साथ घर ले गए थे, जो बाद में परिजनों को मिल गए। इसलिए तहरीर में 4.38 लाख रुपये जाने की बात गलत लिख गई थी। रकम 1.85 लाख ही गई थी। इस खुलासे के बाद ओमप्रकाश के बेटे विपिन ने पूरी तरह सहमति जताई।
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हालांकि पुलिस को रविवार सुबह हुई हत्या के चंद घंटे बाद ही सुराग हाथ लग गया था। मगर सुराग के सहारे आरोपी तक पहुंचने में वक्त लगा और सफलता हाथ लग गई। इस खुलासे पर आईजी और एसएसपी ने पुलिस टीम को 20 हजार के नकद इनाम की घोषणा की है।
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बेल्ट, लाल जूता और फोन कॉल बने सुरागः एसएसपी राजेश पांडेय ने मंगलवार शाम प्रेसवार्ता में बताया कि रेलवे रोड दुबे जी का कूचा स्थित मार्केट में रविवार सुबह ओमप्रकाश वार्ष्णेय की लूट के बाद हत्या के बाद जब पुलिस व फॉरेंसिक टीम ने जांच शुरू की तो चंद घंटों में ही पुलिस को कुछ सुराग मिल गए थे। सबसे पहले तो फॉरेंसिक टीम को दुकान की तलाशी में एक खून से सनी बेल्ट मिली और एक बटन मिला। इसके बाद एसओजी को बाहर लोगों से पूछताछ में पता चला कि घटना के समय के इर्द-गिर्द टी-शर्ट व लोअर (रेडीमेड पायजाम), लाल जूता पहने और रुमाल से मुंह बांधे एक युवक को जरूर आते-जाते देखा गया। तीसरी यह हुई कि जब दुकान के सभी 8 नौकरों को पूछताछ के लिए बुलाने की बारी आई तो दुकान का एकमात्र नौकर अबू अदीब पुत्र डॉ. आले मुस्तफा निवासी हाल निवासी धौर्रा माफी क्वार्सी मूल निवासी नई बस्ती बन्नादेवी मौके पर नहीं था। जब पुलिस के कहने पर रविवार एक बजे बाद ओमप्रकाश के छोटे बेटे दीपक अबू अदीब को दुकान पर आने के लिए फोन किया। इस पर अदीब ने यह कहते हुए भइया आज उसे कुछ जरूरी काम है। इसलिए वह आ नहीं सकता और अगर उसके घर से फोन आए तो यह मत बताना कि आज दुकान पर नहीं आया। बस इसके बाद से अदीब पुलिस रडार पर आ गया था और पुलिस काफी हद तक राहत में आ गई।
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फॉरेंसिक रिपोर्ट तक इंतजार, सबूत संग दबोचाः
इसके बाद पुलिस ने फॉरेंसिक साक्ष्य जुटाने वाली फील्ड यूनिट की रिपोर्ट का इंतजार किया। फील्ड यूनिट ने जांच पड़ताल में बताया कि मौके से जो बटन मिला वह ओमप्रकाश की शर्ट का टूटकर गिरा था। बेल्ट का पता चला कि ओमप्रकाश की बेल्ट उनकी कमर में है। मौके से ओमप्रकाश के अलावा एक ही व्यक्ति का खून से सना हाथ के पंजे का निशान मिला। यह जानने के बाद पुलिस ने अदीब की तलाश शुरू करते हुए मंगलवार सुबह उसे दबोच लिया। इसके बाद उसके घर की तलाशी में खून से सने उसके लाल रंग के जूते, टीशर्ट-लोअर, हत्या में प्रयुक्त हथौड़ा, ओमप्रकाश के हाथ से लूटी गई चांदी की अंगूठी व उनका एटीएम कार्ड व मास्टर कार्ड और खुद अदीब के पास से लूटी गई रकम में से 1.77 लाख रुपये बरामद हो गए।
नशे के लिए लूट मकसद था, हत्या नहींः एसएसपी के अनुसार पूछताछ में आरोपी ने स्वीकारा कि गलत संग और नशे की लत के कारण दसवीं में फेल होने के बाद वह पढ़ न सका। पिता ने उसे समझाया कि अगर वह काम धंधा सीख लेगा तो वह व्यापार करा देगा। इस पर पिता ने ही परिचित ओमप्रकाश की दुकान पर उसे व्यापार सिखाने के लिए तीन-चार माह पहले बिना मेहनताने के लगा दिया। वहां से उसे कोई वेतन नहीं मिलता था। मगर नशे के लिए वह परेशान रहता था। यहां उसने हर रोज की रकम देखी तो मन में लालच आ गया। घटना से पहली शाम उसने रकम देखी तो उम्मीद थी कि 1 लाख रुपया तक मिल जाएगा। बस वह अगले दिन सुबह ओमप्रकाश के अकेले पहुंचने के समय घर से हथौड़ा लेकर लोअर में बेल्ट बांधकर बाइक से निकल पड़ा।
कोई पहचान न ले, इसलिए रुमाल बांधा। उसने ओमप्रकाश के दुकान खोलने के बाद उन पर हमला बोला और गल्ले की चाभी मांगी। न देने पर बस चोट पहुंचाने के इरादे से सिर में हथौड़ा मार दिया। इसके बाद गल्ले का ताला तोड़कर उसमें मिले 1.85 लाख लेकर भाग गया। इस दौरान लोअर पर बंधी बेल्ट हथौड़ा वहीं गिर गया।खुलासे में शामिल टीमः एसएसपी के अनुसार एसपी सिटी अतुल श्रीवास्तव के पर्यवेक्षण और सीओ द्वितीय अमित कुमार के नेतृत्व में इस खुलासे में इंस्पेक्टर गांधीपार्क दिनेश चंद्र दुबे, एसओजी प्रभारी छोटेलाल, सर्विलांस प्रभारी राकेश यादव, एसआई जयप्रकाश यादव, सिपाही सुखवीर, ऋषिपाल, अखिल प्रताप, विजय कुमार, मोहरपाल, विजय कुमार, गौरव, ललित, उमेश चंद्र, अहशान उल व श्याम सिंह की भूमिका सराहनीय रही। एसएसपी ने 5 हजार और आईजी ने 15 हजार से सम्मानित करने की घोषणा की है।
संभल न सके बहकते कदम
अभिषेक शर्मा
गलत संगत और नशे की लत के चलते दसवीं के बाद जब अदीब ने पढ़ाई नहीं की तो डॉक्टर बाप ने उसे बहुत समझाया। मगर बात न बनी तो धंधा कराने की गरज से टिप्स लेने के लिए बेटे को अपने बेहद करीबी व्यापारी ओमप्रकाश के पास भेज दिए। शायद बाप को अंदाजा न था कि बेटा इस हद तक हाथ से निकल जाएगा।
गिरफ्तारी की खबर पर जब डॉक्टर बाप को थाने बुलाया गया तो उसने पुलिस के सामने ही बेटे को झिड़कते हुए उससे मुंह फेर लिया और यह कहकर चला गया कि दूर रह मेरे पास आने की जरूरत नहीं है।
मां रकम देखते ही डर गई थी
अदीब के पिता डॉ.आले मुस्तफा दिल्ली के सरकारी अस्पताल में डॉक्टर हैं। इसके अलावा घर में मां, दो भाई व दो बहनें हैं। इनमें एक दोनों भाई पढ़ाई कर रहे हैं, जबकि एक बहन एमबीबीएस की तैयारी कर रही है। छोटी बहन शहर के नामचीन कान्वेंट स्कूल की छात्रा है। वारदात के बाद घर पहुंचे अदीब ने यह रकम अपने कमरे की सेफ में रख दी। जिस पर मां की नजर गई और उसने पूछा तो बोल दिया कि दोस्त की गाड़ी बिकी हुई है। रखने के लिए दिए हैं। मां बोली कि झूठ बोल रहा है। कुछ कर तो नहीं आया। जब पुलिस पहुंची तो वह समझ गई।
व्यापारी के घर मिले ढाई लाख, परिवार ने जताई सहमित
एसएसपी के अनुसार जब गिरफ्तारी के बाद आरोपी से 1.77 लाख बरामद हुए तो पीड़ित परिवार को थाने बुलाया गया। वहां उन्होंने स्वीकारा कि घटना से पहली रात ओमप्रकाश ढाई लाख रुपये अपने साथ घर ले गए थे, जो बाद में परिजनों को मिल गए। इसलिए तहरीर में 4.38 लाख रुपये जाने की बात गलत लिख गई थी। रकम 1.85 लाख ही गई थी। इस खुलासे के बाद ओमप्रकाश के बेटे विपिन ने पूरी तरह सहमति जताई।