{"_id":"5a55250c4f1c1b1f168b7e29","slug":"checks-for-mobile-numbers-from-mannan-s-luggage","type":"story","status":"publish","title_hn":"मन्नान के सामान से मिले मोबाइल नंबरों की जांच जारी ","category":{"title":"Crime","title_hn":"क्राइम ","slug":"crime"}}
मन्नान के सामान से मिले मोबाइल नंबरों की जांच जारी
क्राइम डेस्क, अमर उजाला, अलीगढ़
Updated Wed, 10 Jan 2018 01:58 AM IST
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mannan vani
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हिजबुल मुजाहिदीन से जुड़े अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (एएमयू) के निष्कासित कश्मीरी छात्र मन्नान वानी के हबीब हाल स्थित कमरे से मिले सामान की यूपी एटीएस की टीम ने गहन जांच की है। उसके सामान के साथ कुछ नाम और मोबाइल नंबर मिले हैं जिनकी छानबीन की जा रही है। इसके अलावा अब सभी कश्मीरी छात्र एटीएस के रडार पर हैं। इस समय एएमयू छात्र संघ के उपाध्यक्ष भी कश्मीर से हैं, उनसे जल्द ही एटीएस पूछताछ करेगी। एटीएस ने कंट्रोल रूम नंबर 9792103156 जारी किया है। इस पर कोई भी व्यक्ति इस विषय में सूचना दे सकता है।
सोमवार को स्थानीय पुलिस अधिकारियों, एएमयू की प्राक्टोरियल टीम और प्रशासनिक अधिकारियों की मौजूदगी में मन्नान के हबीब हाल स्थित कमरे की तलाशी ली गई थी। उसमें कुछ लोगों के नाम और मोबाइल नंबर मिले हैं। इन मोबाइल नंबरों पर एटीएस की टीम संपर्क कर रही है। नंबरों के आधार पर ही मन्नान के संपर्क क्षेत्र के विषय में मैपिंग की जा रही है। प्राथमिक संकेत यह मिले हैं मन्नान कश्मीरी छात्रों के अच्छे संपर्क में था। इसीलिए एटीएस के रडार पर सभी कश्मीरी छात्र हैं। एटीएस से जुड़े लोगों ने बताया कि इस समय एएमयू में छात्र संघ के उपाध्यक्ष सज्जाद भी कश्मीर से ताल्लुक रखते हैं। इसलिए कश्मीरी छात्रों के संबंध में जानकारी जुटाने के लिए उपाध्यक्ष सज्जाद से भी बातचीत की जाएगी। एटीएस ने आम लोगों के लिए एक कंट्रोल रूम नंबर 9792103156 जारी किया है। इस पर कोई भी व्यक्ति अगर अपने आसपास किसी भी प्रकार की कोई संदिग्ध स्थिति या व्यक्ति देखता है, तो इस पर सूचना दे सकता है।
दिल्ली के संपर्क में हैं कश्मीर के कई छात्र
अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के कुछ छात्र दिल्ली के बड़े रणनीतिकारों के संपर्क में हैं। देश के शीर्ष रणनीतिकारों से पिछले वर्ष दिल्ली में कश्मीर की समस्याओं पर एक बैठक भी हुई थी। एएमयू के शोध छात्र मन्नान बशीर वानी के प्रतिबंधित आतंकी संगठन में शामिल होने की खबर के बाद यहां पढ़ने वाले करीब दो हजार छात्र-छात्रों में घबराहट है। अधिकतर छात्रों को इस बात का दुख है कि मन्नान योग्य छात्र होते हुए भी उसने गलत राह चुनी है। उसकी वजह से एएमयू पर दाग लगा है। बावजूद इसके छात्र दुआ कर रहे हैं कि अब भी मन्नान वापस आ जाए ताकि उसका कैरियर बर्बाद होने से बच सके। आशंका तो यह भी है कि कुछ अन्य छात्र भी गलत संगत के प्रभाव में हैं और उन्हें जल्द से जल्द चिह्नित कर काउंसलिंग की जरूरत है। हालांकि पुलिस एवं खुफिया विभाग के अधिकारी कश्मीर निवासी कुछ छात्रों से संवाद बनाए हुए हैं। चंद रोज पहले भी जिले के एक अधिकारी ने कश्मीर के कुछ छात्रों को बुलाकर बातचीत की थी। एएमयू के अधिकारी भी इनसे संपर्क बनाए हुए हैं। एक छात्र का कहना है कि घबराहट के इस आलम में शीर्ष पुलिस अधिकारियों को चाहिए कि वह आगे आएं और कश्मीर के जेन्यून छात्रों को हिम्मत दें कि जो सही है, उसे किसी प्रकार की परेशानी नहीं होगी। पुलिस-प्रशासन उनके साथ है। छात्र का कहना है कि वे लोग एक बड़े रणनीतिकार से पिछले वर्ष दिल्ली में मिले थे और उनसे कश्मीर से संबंधित समस्याओं पर चर्चा हुई थी।
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मन्नान के साथियों के मोबाइल नंबर बंद
एएमयू भूगर्भ विज्ञान विभाग के शोध छात्र मन्नान बशीर वानी का प्रतिबंधित आतंकी संगठन हिजबुल मुजाहिदीन में शामिल होने की खबर यदि सही है तो भारत सरकार को अपनी कश्मीर नीति पर पुनर्विचार करना चाहिए। यह कहना है एएमयू छात्र संघ के अध्यक्ष मशकूर अहमद उस्मानी का।
अध्यक्ष का कहना है कि आखिर क्या कारण है कि पढ़े-लिखे युवक गलत राह पकड़ रहे हैं। उनका कहना है कि हमें भारतीय कानून एवं संविधान में पूर्ण आस्था है और एएमयू में किसी भी कीमत पर राष्ट्र विरोधी गतिविधियों को बर्दाश्त नहीं करेंगे। इस मामले की जांच में पूरा सहयोग करेंगे। उन्होंने कहा कि इस मामले की जांच सही तरीके से होनी चाहिए, क्योंकि 15 साल पहले ऐसी ही घटना के शिकार छात्र मुबीन की घटना को लोग भूले नहीं हैं। मुबीन को 15 साल बाद बाइज्जत बरी कर दिया गया था।
कश्मीर नीति पर पुनर्विचार करें सरकार: मशकूर
एएमयू भूगर्भ विज्ञान विभाग के शोध छात्र मन्नान बशीर वानी का प्रतिबंधित आतंकी संगठन हिजबुल मुजाहिदीन में शामिल होने की खबर यदि सही है तो भारत सरकार को अपनी कश्मीर नीति पर पुनर्विचार करना चाहिए। यह कहना है एएमयू छात्र संघ के अध्यक्ष मशकूर अहमद उस्मानी का।
अध्यक्ष का कहना है कि आखिर क्या कारण है कि पढ़े-लिखे युवक गलत राह पकड़ रहे हैं। उनका कहना है कि हमें भारतीय कानून एवं संविधान में पूर्ण आस्था है और एएमयू में किसी भी कीमत पर राष्ट्र विरोधी गतिविधियों को बर्दाश्त नहीं करेंगे। इस मामले की जांच में पूरा सहयोग करेंगे। उन्होंने कहा कि इस मामले की जांच सही तरीके से होनी चाहिए, क्योंकि 15 साल पहले ऐसी ही घटना के शिकार छात्र मुबीन की घटना को लोग भूले नहीं हैं। मुबीन को 15 साल बाद बाइज्जत बरी कर दिया गया था।
क्षमा याचना के बाद मुदस्सिर को मिला था एएमयू में पढ़ने का मौका
करीब 15 महीने पहले उड़ी सेक्टर में शहीद हुए 17 जवानों पर आपत्तिजनक टिप्पणी करने वाले कश्मीर के छात्र मुदस्सिर यूसुफ लोन को क्षमा याचना के बाद अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय में फिर से पढ़ाई का मौका मिला था। शोध छात्र मन्नान बशीर वानी ने विश्वविद्यालय एवं सरकार की इस उदारता का भी ख्याल नहीं रखा। प्रतिबंधित आतंकी संगठन में शामिल होने की खबर के बाद जम्मू-कश्मीर के कई छात्र उसके फैसले से नाखुश व दुखी हैं। सितंबर 2016 में एएमयू के रसायन विभाग के एमएससी छात्र मुदस्सिर यूसुफ लोन ने उड़ी में शहीद हुए जवानों पर फेसबुक पर आपत्तिजनक टिप्पणी कर तहलका मचा दिया था। इस टिप्पणी के बाद अलीगढ़ का माहौल गरम हो गया था। तत्कालीन कुलपति जमीरउद्दीन शाह ने तत्काल प्रभाव से आरोपी छात्र को निष्कासित कर दिया था। इसको लेकर बहुत बखेड़ा हुआ था। निष्कासन के बाद छात्र गायब हो गया था। सूत्रों की मानें तो बाद में यूसुफ द्वारा प्रधानमंत्री से क्षमा याचना की गई। तत्कालीन कुलपति ने सिम्पेथी ग्राउंड पर निष्कासन को खत्म कर दिया। विभागाध्यक्ष प्रो. एम शाकिर ने बताया कि छात्र मुदस्सिर पढ़ाई कर रहा है। कश्मीर के एक छात्र ने बताया कि किसी प्रतिक्रिया में भटके हुए युवा को वापस मुख्य धारा में लाने की यह बेहतर मिसाल है, लेकिन मन्नान ने इसका भी ध्यान नहीं रखा।
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सोमवार को स्थानीय पुलिस अधिकारियों, एएमयू की प्राक्टोरियल टीम और प्रशासनिक अधिकारियों की मौजूदगी में मन्नान के हबीब हाल स्थित कमरे की तलाशी ली गई थी। उसमें कुछ लोगों के नाम और मोबाइल नंबर मिले हैं। इन मोबाइल नंबरों पर एटीएस की टीम संपर्क कर रही है। नंबरों के आधार पर ही मन्नान के संपर्क क्षेत्र के विषय में मैपिंग की जा रही है। प्राथमिक संकेत यह मिले हैं मन्नान कश्मीरी छात्रों के अच्छे संपर्क में था। इसीलिए एटीएस के रडार पर सभी कश्मीरी छात्र हैं। एटीएस से जुड़े लोगों ने बताया कि इस समय एएमयू में छात्र संघ के उपाध्यक्ष सज्जाद भी कश्मीर से ताल्लुक रखते हैं। इसलिए कश्मीरी छात्रों के संबंध में जानकारी जुटाने के लिए उपाध्यक्ष सज्जाद से भी बातचीत की जाएगी। एटीएस ने आम लोगों के लिए एक कंट्रोल रूम नंबर 9792103156 जारी किया है। इस पर कोई भी व्यक्ति अगर अपने आसपास किसी भी प्रकार की कोई संदिग्ध स्थिति या व्यक्ति देखता है, तो इस पर सूचना दे सकता है।
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दिल्ली के संपर्क में हैं कश्मीर के कई छात्र
अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के कुछ छात्र दिल्ली के बड़े रणनीतिकारों के संपर्क में हैं। देश के शीर्ष रणनीतिकारों से पिछले वर्ष दिल्ली में कश्मीर की समस्याओं पर एक बैठक भी हुई थी। एएमयू के शोध छात्र मन्नान बशीर वानी के प्रतिबंधित आतंकी संगठन में शामिल होने की खबर के बाद यहां पढ़ने वाले करीब दो हजार छात्र-छात्रों में घबराहट है। अधिकतर छात्रों को इस बात का दुख है कि मन्नान योग्य छात्र होते हुए भी उसने गलत राह चुनी है। उसकी वजह से एएमयू पर दाग लगा है। बावजूद इसके छात्र दुआ कर रहे हैं कि अब भी मन्नान वापस आ जाए ताकि उसका कैरियर बर्बाद होने से बच सके। आशंका तो यह भी है कि कुछ अन्य छात्र भी गलत संगत के प्रभाव में हैं और उन्हें जल्द से जल्द चिह्नित कर काउंसलिंग की जरूरत है। हालांकि पुलिस एवं खुफिया विभाग के अधिकारी कश्मीर निवासी कुछ छात्रों से संवाद बनाए हुए हैं। चंद रोज पहले भी जिले के एक अधिकारी ने कश्मीर के कुछ छात्रों को बुलाकर बातचीत की थी। एएमयू के अधिकारी भी इनसे संपर्क बनाए हुए हैं। एक छात्र का कहना है कि घबराहट के इस आलम में शीर्ष पुलिस अधिकारियों को चाहिए कि वह आगे आएं और कश्मीर के जेन्यून छात्रों को हिम्मत दें कि जो सही है, उसे किसी प्रकार की परेशानी नहीं होगी। पुलिस-प्रशासन उनके साथ है। छात्र का कहना है कि वे लोग एक बड़े रणनीतिकार से पिछले वर्ष दिल्ली में मिले थे और उनसे कश्मीर से संबंधित समस्याओं पर चर्चा हुई थी।
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मन्नान के साथियों के मोबाइल नंबर बंद
एएमयू भूगर्भ विज्ञान विभाग के शोध छात्र मन्नान बशीर वानी का प्रतिबंधित आतंकी संगठन हिजबुल मुजाहिदीन में शामिल होने की खबर यदि सही है तो भारत सरकार को अपनी कश्मीर नीति पर पुनर्विचार करना चाहिए। यह कहना है एएमयू छात्र संघ के अध्यक्ष मशकूर अहमद उस्मानी का।
अध्यक्ष का कहना है कि आखिर क्या कारण है कि पढ़े-लिखे युवक गलत राह पकड़ रहे हैं। उनका कहना है कि हमें भारतीय कानून एवं संविधान में पूर्ण आस्था है और एएमयू में किसी भी कीमत पर राष्ट्र विरोधी गतिविधियों को बर्दाश्त नहीं करेंगे। इस मामले की जांच में पूरा सहयोग करेंगे। उन्होंने कहा कि इस मामले की जांच सही तरीके से होनी चाहिए, क्योंकि 15 साल पहले ऐसी ही घटना के शिकार छात्र मुबीन की घटना को लोग भूले नहीं हैं। मुबीन को 15 साल बाद बाइज्जत बरी कर दिया गया था।
कश्मीर नीति पर पुनर्विचार करें सरकार: मशकूर
एएमयू भूगर्भ विज्ञान विभाग के शोध छात्र मन्नान बशीर वानी का प्रतिबंधित आतंकी संगठन हिजबुल मुजाहिदीन में शामिल होने की खबर यदि सही है तो भारत सरकार को अपनी कश्मीर नीति पर पुनर्विचार करना चाहिए। यह कहना है एएमयू छात्र संघ के अध्यक्ष मशकूर अहमद उस्मानी का।
अध्यक्ष का कहना है कि आखिर क्या कारण है कि पढ़े-लिखे युवक गलत राह पकड़ रहे हैं। उनका कहना है कि हमें भारतीय कानून एवं संविधान में पूर्ण आस्था है और एएमयू में किसी भी कीमत पर राष्ट्र विरोधी गतिविधियों को बर्दाश्त नहीं करेंगे। इस मामले की जांच में पूरा सहयोग करेंगे। उन्होंने कहा कि इस मामले की जांच सही तरीके से होनी चाहिए, क्योंकि 15 साल पहले ऐसी ही घटना के शिकार छात्र मुबीन की घटना को लोग भूले नहीं हैं। मुबीन को 15 साल बाद बाइज्जत बरी कर दिया गया था।
क्षमा याचना के बाद मुदस्सिर को मिला था एएमयू में पढ़ने का मौका
करीब 15 महीने पहले उड़ी सेक्टर में शहीद हुए 17 जवानों पर आपत्तिजनक टिप्पणी करने वाले कश्मीर के छात्र मुदस्सिर यूसुफ लोन को क्षमा याचना के बाद अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय में फिर से पढ़ाई का मौका मिला था। शोध छात्र मन्नान बशीर वानी ने विश्वविद्यालय एवं सरकार की इस उदारता का भी ख्याल नहीं रखा। प्रतिबंधित आतंकी संगठन में शामिल होने की खबर के बाद जम्मू-कश्मीर के कई छात्र उसके फैसले से नाखुश व दुखी हैं। सितंबर 2016 में एएमयू के रसायन विभाग के एमएससी छात्र मुदस्सिर यूसुफ लोन ने उड़ी में शहीद हुए जवानों पर फेसबुक पर आपत्तिजनक टिप्पणी कर तहलका मचा दिया था। इस टिप्पणी के बाद अलीगढ़ का माहौल गरम हो गया था। तत्कालीन कुलपति जमीरउद्दीन शाह ने तत्काल प्रभाव से आरोपी छात्र को निष्कासित कर दिया था। इसको लेकर बहुत बखेड़ा हुआ था। निष्कासन के बाद छात्र गायब हो गया था। सूत्रों की मानें तो बाद में यूसुफ द्वारा प्रधानमंत्री से क्षमा याचना की गई। तत्कालीन कुलपति ने सिम्पेथी ग्राउंड पर निष्कासन को खत्म कर दिया। विभागाध्यक्ष प्रो. एम शाकिर ने बताया कि छात्र मुदस्सिर पढ़ाई कर रहा है। कश्मीर के एक छात्र ने बताया कि किसी प्रतिक्रिया में भटके हुए युवा को वापस मुख्य धारा में लाने की यह बेहतर मिसाल है, लेकिन मन्नान ने इसका भी ध्यान नहीं रखा।