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एटीएस ने अलीगढ़ के युवक को आतंकी बनने से रोका

Sun, 11 Jun 2017 02:44 AM IST
अमर उजाला ब्यूूराे
अमर उजाला ब्यूूराे Updated Sun, 11 Jun 2017 02:44 AM IST
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ATS prevented Aligarh from becoming militant
terrorist - फोटो : Demo Photo
अभिषेक शर्मा
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लंबे समय से देश विरोधी ताकतों और आतंकियों के स्लीपर सेल की शरणस्थली में शामिल अलीगढ़ में आज भी आतंक की जड़ें काम कर रही हैं। यह खुलासा एंटी टेरेरिस्ट सेल (एटीएस) की काउंसलिंग सेल को पहुंची उस कॉल में हुआ, जिसमें अलीगढ़ के एक परिवार ने अपने घर के युवक को आतंक की राह पर जाने से रोकने में मदद मांगी। हालांकि एटीएस के आईजी असीम अरुण की सार्थक पहल पर अलीगढ़ के युवक सहित सात युवकों को आतंक की विनाशकारी धारा में जुड़ने से रोक लिया गया है। 

अब यह सभी युवक मुख्य धारा में जीवन जी रहे हैं। इनको अब अपने परिजनों से बचपन वाली मोहब्बत हो गई है, और वह अपराधी नहीं बनना चाहते। 
देश में दो माह पहले खुरासान मॉड्यूल्स पर आईएसआईएस के काम करने का खुलासा होने और मध्य प्रदेश, कानपुर व लखनऊ आदि शहरों में आतंकियों के पकड़े जाने के बाद एटीएस हरकत में आई। इस दौरान यह भी पता चला कि एएमयू से जुड़े दो पूर्व छात्र भी इस मॉड्यूल्स से जुड़े रहे हैं, जिन्हें गिरफ्तार किया गया।
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इसके बाद एटीएस के आईजी असीम अरुण (वर्ष 2008-09 में अलीगढ़ के एसएसपी भी रहे हैं) ने पूरे प्रदेश में आतंक के पैर उखाड़ने के लिए एटीएस का एक कंट्रोल रूम बनाया। इसका मकसद था कि जो भी परिवार ऐसे बच्चों की सूचना देंगे तो उन्हें समाज की मुख्य धारा  से जोड़ने का काम एटीएस करेगी। इस कंट्रोल रूम पर कई गंभीर सूचनाओं के 125 फोन कॉल आए। ये सभी गोपनीय कॉल हैं। इनमें से सात फोन कॉल उन युवाओं से संबंधित थे, जो आतंकी संगठनों से प्रभावित होकर उनके साथ काम करना चाहते थे।
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इन युवाओं की एक साल तक काउंसलिंग की गई और इनकी कट्टरपंथी विचाराधारा को आम जिंदगी की ओर मोड़ा गया। इस पूरे काम के दौरान युवक और उसके पूरे परिवार की हर एक बात को पूर्णत: गोपनीय रखा गया। ताकि उनकी सामाजिक प्रतिष्ठा को ठेस न पहुंचे। इसमें एक युवक अलीगढ़ का भी था। अब इन सभी की गतिविधियों की मॉनीटरिंग आने वाले दो साल तक होगी। पहले साल में एटीएस के साथ दूसरे साल में परिवार और एटीएस दोनों के साथ। इन युवकों को जिंदगी, परिवार, शादी, रोजगार आदि में भी मदद दी रही है। एटीएस की इकाइयां लगातार इन युवकों पर नजर रखे हुए हैं और फीडबैक ले रही हैं।

अलीगढ़ में भी आतंक की पाठशाला
सिमी की जन्मस्थली अलीगढ़ में कट्टरपंथ को बढ़ावा देने के लिए कुछ विवादित संगठनों के स्लीपिंग माड्यूल्स काम कर रहे हैं। इन संगठनों के लोग युवाओं को भ्रमित कर कट्टरपंथ की ओर मोड़ रहे हैं।  


प्रदेश भर से आई कॉल में से 7 युवकों को एटीएस ने मुख्य धारा में जोड़ा है। इनमें एक अलीगढ़ का भी है। इनको काउंसलिंग के जरिये अपराध से रोका गया है।-असीम अरुण, आईजी एटीएस
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