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नकदी की चिंता में मजदूर की मौत
ब्यूूूराे, अमर उजाला, हाथ्ारस
Updated Tue, 20 Dec 2016 11:55 PM IST
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file photo
- फोटो : amar ujala
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हाथरस। हाथरस जंक्शन थाने के गांव रामपुर में सोमवार की देर रात एक मजदूर की मौत हो गई। परिजनों का कहना है कि बैंक से कैश न मिलने से वह इस कदर तंगी में आ गया था कि खाने-पीने का सामान तक नहीं खरीद पा रहा था। इससे वह काफी मानसिक तनाव में चल रहा था।
चचेरे भाई भोला सिंह ने बताया कि मृतक राजेंद्र पुत्र हरप्रसाद (48) मनरेगा में मजदूरी करता था। उसका इलाहाबाद बैंक में खाता है, जिसमें कुल 1,823 रुपये जमा हैं। मनरेगा का खाता ग्रामीण बैंक ऑफ आयावर्त में भी है, जिसमें तीन महीने से मजदूरी का पैसा नहीं आया है। राजेंद्र ने गांव के इलाहाबाद बैंक के कई दिन चक्कर काटे, लेकिन उसे कैश नहीं मिल सका।
सोमवार को भी वह आटा आदि का बंदोबस्त करने के लिए एक हजार रुपये बैंक से निकालने गया था। कतार में लगे राजेंद्र का जब नंबर आया, तब बैंक कर्मियों ने कैश खत्म होने की सूचना दे दी। हताश होकर वह फिर लौट गया।
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परिजनों के मुताबिक जब राजेंद्र घर लौटा तो वह काफी परेशान था। रुपये नहीं होने से वह घर के लिए आटा तक नहीं खरीद पा रहा था। इसी चिंता में रात करीब एक बजे अचानक उसकी तबियत खराब हो गई। आनन-फानन उपचार के लिए बागला जिला अस्पताल लाया गया, जहां उसको मृत घोषित कर दिया गया। राजेंद्र के परिवार में दो लड़की और तीन लड़के और उनकी पत्नी हैं। अभी तक किसी भी बच्चे की शादी नहीं हुई है।
-राजेंद्र की मौत का मामला उनके संज्ञान में नहीं है। बैंक से लोगों को दो से तीन हजार रुपये रोजाना कैश बांटा जा रहा है।
-श्यौदान सिंह, शाखा प्रबंधक, इलाहाबाद बैंक, रामपुर
परिजनों ने बताया कि बैंक से नकदी नहीं मिलने से राजेंद्र परेशान थे। वह एक-दो दिन लाइन में लगकर भी लौट आए थे। मैने लेखपाल को इसकी सूचना दे दी है।
-डॉ.विनोद कुमार, ग्राम प्रधान रामपुर
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चचेरे भाई भोला सिंह ने बताया कि मृतक राजेंद्र पुत्र हरप्रसाद (48) मनरेगा में मजदूरी करता था। उसका इलाहाबाद बैंक में खाता है, जिसमें कुल 1,823 रुपये जमा हैं। मनरेगा का खाता ग्रामीण बैंक ऑफ आयावर्त में भी है, जिसमें तीन महीने से मजदूरी का पैसा नहीं आया है। राजेंद्र ने गांव के इलाहाबाद बैंक के कई दिन चक्कर काटे, लेकिन उसे कैश नहीं मिल सका।
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सोमवार को भी वह आटा आदि का बंदोबस्त करने के लिए एक हजार रुपये बैंक से निकालने गया था। कतार में लगे राजेंद्र का जब नंबर आया, तब बैंक कर्मियों ने कैश खत्म होने की सूचना दे दी। हताश होकर वह फिर लौट गया।
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परिजनों के मुताबिक जब राजेंद्र घर लौटा तो वह काफी परेशान था। रुपये नहीं होने से वह घर के लिए आटा तक नहीं खरीद पा रहा था। इसी चिंता में रात करीब एक बजे अचानक उसकी तबियत खराब हो गई। आनन-फानन उपचार के लिए बागला जिला अस्पताल लाया गया, जहां उसको मृत घोषित कर दिया गया। राजेंद्र के परिवार में दो लड़की और तीन लड़के और उनकी पत्नी हैं। अभी तक किसी भी बच्चे की शादी नहीं हुई है।
-राजेंद्र की मौत का मामला उनके संज्ञान में नहीं है। बैंक से लोगों को दो से तीन हजार रुपये रोजाना कैश बांटा जा रहा है।
-श्यौदान सिंह, शाखा प्रबंधक, इलाहाबाद बैंक, रामपुर
परिजनों ने बताया कि बैंक से नकदी नहीं मिलने से राजेंद्र परेशान थे। वह एक-दो दिन लाइन में लगकर भी लौट आए थे। मैने लेखपाल को इसकी सूचना दे दी है।
-डॉ.विनोद कुमार, ग्राम प्रधान रामपुर