{"_id":"5c350f5bbdec2256c210e07f","slug":"71546981211-aligarh-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"स्वास्थ्य विभाग में घोटालों के आरोपियों को मिली क्लीन चिट","category":{"title":"Crime","title_hn":"क्राइम ","slug":"crime"}}
स्वास्थ्य विभाग में घोटालों के आरोपियों को मिली क्लीन चिट
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
क्राइम न्यूज, अमर उजाला, अलीगढ़
पिछले कई वर्षों में स्वास्थ्य विभाग में हुए करीब 10 घोटालों के आरोपियों को विभाग द्वारा जांच के बाद क्लीन चिट दे दी गई है। किसी भी आरोपी पर आरोप सिद्ध नहीं हो पाए हैं।
पिछले कई वर्षों में स्वास्थ्य विभाग में मिशन इंद्रधनुष के तहत भुगतान में अनियमितता, नर्स भर्ती, आशा वर्करों का भुगतान, स्वास्थ्य विभाग में टैक्सी आदि का भुगतान, एनआरएचएम, लैब मैटेरियल, सर्जिकल प्रिंटर, भर्ती में अनियमितता, वैक्सीन वाहन, दवा खरीद, टेलीफोन आदि में अनियमितता और घोटाले के आरोप लगाए गए थे।
इस बातों का संज्ञान लेते हुए तत्कालीन जिलाधिकारी ऋषिकेश भास्कर यशोद ने जांच टीम गठित कर दी थी, जिसमें एडीएम फाइनेंस व मुख्य कोषाधिकारी सहित अन्य अधिकारी शामिल थे। जांच में शामिल दो अधिकारियों का तबादला हो चुका है। हालांकि, कहा यह भी जा रहा है कि स्वास्थ्य विभाग की ओर से दस्तावेज ही नहीं उपलब्ध कराए गए। इस मामले में मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. एमएल अग्रवाल ने बताया कि जिला स्तर पर जांच शुरू की गई थी। वह पूरी हो गई है। जांच में कोई भी कर्मचारी दोषी नहीं पाया गया।
विज्ञापन
विज्ञापन
पिछले कई वर्षों में स्वास्थ्य विभाग में हुए करीब 10 घोटालों के आरोपियों को विभाग द्वारा जांच के बाद क्लीन चिट दे दी गई है। किसी भी आरोपी पर आरोप सिद्ध नहीं हो पाए हैं।
पिछले कई वर्षों में स्वास्थ्य विभाग में मिशन इंद्रधनुष के तहत भुगतान में अनियमितता, नर्स भर्ती, आशा वर्करों का भुगतान, स्वास्थ्य विभाग में टैक्सी आदि का भुगतान, एनआरएचएम, लैब मैटेरियल, सर्जिकल प्रिंटर, भर्ती में अनियमितता, वैक्सीन वाहन, दवा खरीद, टेलीफोन आदि में अनियमितता और घोटाले के आरोप लगाए गए थे।
विज्ञापन
इस बातों का संज्ञान लेते हुए तत्कालीन जिलाधिकारी ऋषिकेश भास्कर यशोद ने जांच टीम गठित कर दी थी, जिसमें एडीएम फाइनेंस व मुख्य कोषाधिकारी सहित अन्य अधिकारी शामिल थे। जांच में शामिल दो अधिकारियों का तबादला हो चुका है। हालांकि, कहा यह भी जा रहा है कि स्वास्थ्य विभाग की ओर से दस्तावेज ही नहीं उपलब्ध कराए गए। इस मामले में मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. एमएल अग्रवाल ने बताया कि जिला स्तर पर जांच शुरू की गई थी। वह पूरी हो गई है। जांच में कोई भी कर्मचारी दोषी नहीं पाया गया।
विज्ञापन