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तमंचे पर हैरानी..सुसाइड की बात बेमानी
Updated Thu, 15 Feb 2018 01:40 AM IST
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क्राइम डेस्क, अमर उजाला, अलीगढ़।
एएमयू के डक प्वाइंट पर दिनदहाड़े सुसाइड करने वाले रोहित के बड़े भाई अरुण को खुद के भाई की सुसाइड की बात बेमानी लग रही है। अरुण की मानें तो उनका अलीगढ़ या एएमयू से दूर-दूर तक कोई नाता या रिश्ता नहीं है।
रोहित यहां क्यों आएगा? यह खुद उनके समझ में नहीं आ रहा। वह तो इस मौत में हत्या का अंदेशा जता रहे हैं। खुद मीडिया ने जब सुसाइड को लेकर सवाल किया तो परिजन बिफर गए।
सवाल खड़ा किया हमारे सीधे-साधे भाई पर तमंचा कहां से आया? यह कोई साजिश है। उसने मंगलवार सुबह 10 बजे अरुण से बात कर घर आना स्वीकारा था और पेटीएम से अपने एकाउंट में 1500 रुपये भी ट्रांसफर कराए थे।
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हरिद्वार की एलईडी कंपनी में जॉब करने वाला तीन भाइयों में मझला अरुण पुत्र रोतम सिंह निवासी भटपुरा अफजलगढ़ बिजनौर अपने मामा हरी सिंह व मौसा पवन कुमार संग तड़के भाई रोहित का शव लेने पहुंचा था। इस दौरान वह सिविल लाइंस में इंस्पेक्टर जावेद खान से मिले।
उन्होंने पुलिस से बातचीत में यही कहा कि उनका भाई सुसाइड नहीं कर सकता। दोपहर में पोस्टमार्टम के बाद परिजन शव को अपने साथ बिजनौर ले गए।
इस दौरान रोते हुए भाई यही कह रहा था कि अभी तो मां को नहीं बताया गया है। वह कैसे अपने भाई की लाश मां के सामने लेकर जाएगा, उसे खुद समझ नहीं आ रहा।
रोहित ने मंगलवार दोपहर करीब दो बजे एएमयू में घूमते हुए खुद को तमंचे से गोली मार ली थी और उसकी मौके पर ही मौत हो गई थी। जिस दौरान उसने गोली मारी, उस दौरान वह फोन पर किसी से बतिया रहा था।
पेशेवर साफ्टवेयर हैकर एएमयू से था परिचित
पुलिस से बातचीत में रोहित के विषय में उसके भाई ने स्वीकारा कि वह बेशक ज्यादा पढ़ा लिखा न था, मगर किसी पेशेवर साफ्टवेयर हैकर से कम न था। वह किसी का भी फेसबुक, ट्विटर, व्हाट्सएप एकाउंट हैक कर उसमें घुसकर खुरापात करने में माहिर था।
इसे लेकर कई बार उसे डांटा फटकारा भी गया था। इसके सिवाय उसकी कभी कोई शिकायत नहीं मिली। वह बेहद सीधा और सामान्य जीवन जीने वाला इंसान था। वह खुद नहीं समझ पा रहा कि उसने सुसाइड क्यों किया होगा।
मगर पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज देखकर एक बात जरूर मानी है कि जिस तरह पुरानी चुंगी से रोहित ने कैंपस में एंट्री की है और बेफ्रिक होकर टहलते हुए अंदर घुसा है, उससे यह लग रहा है कि वह अलीगढ़, एएमयू और उसके रास्तों से पहले से परिचित था। वह पहले भी यहां आ चुका था। अब वह किसके पास आया और किससे मिलना था, इन सवालों का जवाब जांच में मिलेगा।
अब मोबाइल ही बताएगा कौन थी वो
सीओ तृतीय संजीव दीक्षित इतना ही बताते हैं कि अवकाश के चलते बुधवार को मोबाइल की कॉल डिटेल और सीडीआर नहीं मिल पाई है। कॉल डिटेल मिलने पर ही यह साफ होगा कि आखिरी बार वह किससे बात कर रहा था। कैंपस में वह किससे मिलने आया था और आखिरी बार जिस लड़की के साथ होने या गोली चलने से पहले भागने का शोर है, वह कौन थी। फिलहाल पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया है। परिजन किसी तरह की लिखित तहरीर भी नहीं देकर गए हैं।
गोली से उड़ गया पूरा भेजा
पोस्टमार्टम रिपोर्ट में पाया गया है कि रोहित ने खुद को 12 बोर के कारतूस से गोली मारी, जिससे भेजा बुरी तरह उड़ गया है।
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एएमयू के डक प्वाइंट पर दिनदहाड़े सुसाइड करने वाले रोहित के बड़े भाई अरुण को खुद के भाई की सुसाइड की बात बेमानी लग रही है। अरुण की मानें तो उनका अलीगढ़ या एएमयू से दूर-दूर तक कोई नाता या रिश्ता नहीं है।
रोहित यहां क्यों आएगा? यह खुद उनके समझ में नहीं आ रहा। वह तो इस मौत में हत्या का अंदेशा जता रहे हैं। खुद मीडिया ने जब सुसाइड को लेकर सवाल किया तो परिजन बिफर गए।
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सवाल खड़ा किया हमारे सीधे-साधे भाई पर तमंचा कहां से आया? यह कोई साजिश है। उसने मंगलवार सुबह 10 बजे अरुण से बात कर घर आना स्वीकारा था और पेटीएम से अपने एकाउंट में 1500 रुपये भी ट्रांसफर कराए थे।
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हरिद्वार की एलईडी कंपनी में जॉब करने वाला तीन भाइयों में मझला अरुण पुत्र रोतम सिंह निवासी भटपुरा अफजलगढ़ बिजनौर अपने मामा हरी सिंह व मौसा पवन कुमार संग तड़के भाई रोहित का शव लेने पहुंचा था। इस दौरान वह सिविल लाइंस में इंस्पेक्टर जावेद खान से मिले।
उन्होंने पुलिस से बातचीत में यही कहा कि उनका भाई सुसाइड नहीं कर सकता। दोपहर में पोस्टमार्टम के बाद परिजन शव को अपने साथ बिजनौर ले गए।
इस दौरान रोते हुए भाई यही कह रहा था कि अभी तो मां को नहीं बताया गया है। वह कैसे अपने भाई की लाश मां के सामने लेकर जाएगा, उसे खुद समझ नहीं आ रहा।
रोहित ने मंगलवार दोपहर करीब दो बजे एएमयू में घूमते हुए खुद को तमंचे से गोली मार ली थी और उसकी मौके पर ही मौत हो गई थी। जिस दौरान उसने गोली मारी, उस दौरान वह फोन पर किसी से बतिया रहा था।
पेशेवर साफ्टवेयर हैकर एएमयू से था परिचित
पुलिस से बातचीत में रोहित के विषय में उसके भाई ने स्वीकारा कि वह बेशक ज्यादा पढ़ा लिखा न था, मगर किसी पेशेवर साफ्टवेयर हैकर से कम न था। वह किसी का भी फेसबुक, ट्विटर, व्हाट्सएप एकाउंट हैक कर उसमें घुसकर खुरापात करने में माहिर था।
इसे लेकर कई बार उसे डांटा फटकारा भी गया था। इसके सिवाय उसकी कभी कोई शिकायत नहीं मिली। वह बेहद सीधा और सामान्य जीवन जीने वाला इंसान था। वह खुद नहीं समझ पा रहा कि उसने सुसाइड क्यों किया होगा।
मगर पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज देखकर एक बात जरूर मानी है कि जिस तरह पुरानी चुंगी से रोहित ने कैंपस में एंट्री की है और बेफ्रिक होकर टहलते हुए अंदर घुसा है, उससे यह लग रहा है कि वह अलीगढ़, एएमयू और उसके रास्तों से पहले से परिचित था। वह पहले भी यहां आ चुका था। अब वह किसके पास आया और किससे मिलना था, इन सवालों का जवाब जांच में मिलेगा।
अब मोबाइल ही बताएगा कौन थी वो
सीओ तृतीय संजीव दीक्षित इतना ही बताते हैं कि अवकाश के चलते बुधवार को मोबाइल की कॉल डिटेल और सीडीआर नहीं मिल पाई है। कॉल डिटेल मिलने पर ही यह साफ होगा कि आखिरी बार वह किससे बात कर रहा था। कैंपस में वह किससे मिलने आया था और आखिरी बार जिस लड़की के साथ होने या गोली चलने से पहले भागने का शोर है, वह कौन थी। फिलहाल पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया है। परिजन किसी तरह की लिखित तहरीर भी नहीं देकर गए हैं।
गोली से उड़ गया पूरा भेजा
पोस्टमार्टम रिपोर्ट में पाया गया है कि रोहित ने खुद को 12 बोर के कारतूस से गोली मारी, जिससे भेजा बुरी तरह उड़ गया है।