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कब गिरफ्तार होंगे रोडवेज घोटाले के आरोपी
Updated Mon, 04 Dec 2017 02:14 AM IST
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कब गिरफ्तार होंगे रोडवेज घोटाले के आरोपी
ब्यूरो, अमर उजाला, अलीगढ़।
मसूदाबाद स्थित परिवहन निगम की क्षेत्रीय कार्यशाला में हुए स्क्रैप घोटाले के आरोपी आज तक फरार हैं। रिपोर्ट दर्ज होने के पांच माह बाद भी पुलिस इनकी गिरफ्तारी नहीं कर सकी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी भ्रष्टाचार में लिप्त कर्मचारी एवं अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के पक्ष में हैं, लेकिन विभागीय अधिकारियों की मिलीभगत से इनका बाल बांका तक नहीं हुआ है।
ज्ञात रहे कि 14 जून 2017 को मसूदाबाद स्थित क्षेत्रीय कार्यशाला में पूर्व सेवा प्रबंधक केके सिंह के संरक्षण में एक लाख 72 हजार 311 रुपये का स्क्रैप घोटाला हुआ था। इस मामले में भाजपा के एक पूर्व पार्षद तथा कर्मचारी यूनियन के नेताओं ने स्क्रैप लेकर जाते ट्रक को पकड़ लिया और बन्ना देवी थाने में खड़ा करा दिया।
इसकी गूंज मुख्यालय तक गूंजी तो जांच के लिए नोडल अधिकारी सत्यनारायण यहां पहुंच गए। इसके बाद जब वर्कशाप में पड़ा स्क्रैप और ट्रक में लदे स्क्रैप को तोला गया तो इसमें भारी गड़बड़ी निकली।
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इस पर क्षेत्रीय प्रबंधक ने तत्काल सेवा प्रबंधक केके सिंह, सहायक लेखाधिकारी रविकांत मल्ल, स्टोर अधीक्षक उदयवीर सिंह, सहायक स्टोर कीपर योगेश कुलश्रेष्ठ, जूनियर फोरमैन विनोद कुमार को निलंबित कर चौकीदारी देवेंद्र सिंह को नौकरी से निकाल दिया। साथ ही इनके खिलाफ बन्ना देवी थाने में रिपोर्ट भी दर्ज करा दी। विभागीय नियम के अनुसार जो लोग किसी आरोप में निलंबित हो जाते हैं, उन्हें तीन माह तक आधी तनख्वाह दी जाती है। इसके बाद उनकी तनख्वाह को एक तिहाई कर दिया जाता है। जबकि इस मामले में ऐसा कुछ नहीं हुआ है। सभी आरोपियों को अभी भी आधी तनख्वाह दी जा रही है।
- यह मुख्यालय का कार्य है। मुख्यालय में आरोपी प्रार्थना पत्र देता है, तब उसकी तनख्वाह एक तिहाई होती है। निगम ने सभी के खिलाफ चार्जशीट लगा दी है, बावजूद इसके पुलिस उन्हें गिरफ्तार क्यों नहीं कर रही है यह विचारणीय प्रश्न है।
अतुल त्रिपाठी, क्षेत्रीय प्रबंधक रोडवेज
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ब्यूरो, अमर उजाला, अलीगढ़।
मसूदाबाद स्थित परिवहन निगम की क्षेत्रीय कार्यशाला में हुए स्क्रैप घोटाले के आरोपी आज तक फरार हैं। रिपोर्ट दर्ज होने के पांच माह बाद भी पुलिस इनकी गिरफ्तारी नहीं कर सकी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी भ्रष्टाचार में लिप्त कर्मचारी एवं अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के पक्ष में हैं, लेकिन विभागीय अधिकारियों की मिलीभगत से इनका बाल बांका तक नहीं हुआ है।
ज्ञात रहे कि 14 जून 2017 को मसूदाबाद स्थित क्षेत्रीय कार्यशाला में पूर्व सेवा प्रबंधक केके सिंह के संरक्षण में एक लाख 72 हजार 311 रुपये का स्क्रैप घोटाला हुआ था। इस मामले में भाजपा के एक पूर्व पार्षद तथा कर्मचारी यूनियन के नेताओं ने स्क्रैप लेकर जाते ट्रक को पकड़ लिया और बन्ना देवी थाने में खड़ा करा दिया।
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इसकी गूंज मुख्यालय तक गूंजी तो जांच के लिए नोडल अधिकारी सत्यनारायण यहां पहुंच गए। इसके बाद जब वर्कशाप में पड़ा स्क्रैप और ट्रक में लदे स्क्रैप को तोला गया तो इसमें भारी गड़बड़ी निकली।
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इस पर क्षेत्रीय प्रबंधक ने तत्काल सेवा प्रबंधक केके सिंह, सहायक लेखाधिकारी रविकांत मल्ल, स्टोर अधीक्षक उदयवीर सिंह, सहायक स्टोर कीपर योगेश कुलश्रेष्ठ, जूनियर फोरमैन विनोद कुमार को निलंबित कर चौकीदारी देवेंद्र सिंह को नौकरी से निकाल दिया। साथ ही इनके खिलाफ बन्ना देवी थाने में रिपोर्ट भी दर्ज करा दी। विभागीय नियम के अनुसार जो लोग किसी आरोप में निलंबित हो जाते हैं, उन्हें तीन माह तक आधी तनख्वाह दी जाती है। इसके बाद उनकी तनख्वाह को एक तिहाई कर दिया जाता है। जबकि इस मामले में ऐसा कुछ नहीं हुआ है। सभी आरोपियों को अभी भी आधी तनख्वाह दी जा रही है।
- यह मुख्यालय का कार्य है। मुख्यालय में आरोपी प्रार्थना पत्र देता है, तब उसकी तनख्वाह एक तिहाई होती है। निगम ने सभी के खिलाफ चार्जशीट लगा दी है, बावजूद इसके पुलिस उन्हें गिरफ्तार क्यों नहीं कर रही है यह विचारणीय प्रश्न है।
अतुल त्रिपाठी, क्षेत्रीय प्रबंधक रोडवेज