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तालसपुर से ऑनलाइन ठगी का रैकेट चलाने वाला गिरोह पकड़ा

Fri, 15 Feb 2019 01:59 AM IST
Aligarh Bureau अलीगढ़ ब्यूरो
Updated Fri, 15 Feb 2019 01:59 AM IST
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तालसपुर से ऑनलाइन ठगी का रैकेट चलाने वाला गिरोह पकड़ा
क्राइम न्यूज, अमर उजाला अलीगढ़।
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फर्जी फाइनेंस कंपनी बना सस्ती दरों में लोन उपलब्ध कराने के नाम पर लोगों को ऑनलाइन ठगी का शिकार बनाने वाला शातिर गिरोह का रैकेट अलीगढ़ से संचालित हो रहा था। गुरुवार को पुलिस ने महानगर के क्वार्सी थाना क्षेत्र के तालसपुर नई आबादी क्षेत्र के एक मकान से गिरोह के तीन सदस्यों को पकड़ लिया।

मुखबिर की सूचना पर दबोचे गए ठगों के पास से लैपटॉप, मोबाइल सहित कई एटीएम कार्ड और देश की कई नामी फाइनेंस कंपनियों के फर्जी दस्तावेज भी मिले हैं। साथ ही इनके पास से लाखों रुपये की नगदी भी बरामद की गई है। गिरोह के दो सदस्य फरार हैं। पुलिस पकड़े गए ठगों से पूछताछ कर उन्हें भी दबोचने की फिराक में है।
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थाना क्वार्सी इंस्पेक्टर सुनील कुमार सिंह के अनुसार पकड़े गए ठगों की पहचान सचिन पुत्र राजकुमार, प्रदीप पुत्र प्रेमपाल निवासी, ढ़कपुरा, अरनिया, बुलंदशहर और बॉबी पुत्र स्वर्ण जयंती प्रसाद निवासी सूरजपुर, चंडौस के तौर पर हुई है।
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इनके दो साथी रवि पुत्र राजकुमार निवासी ढ़कपुरा, अरनिया, बुलंदशहर और करनपाल पुत्र रामदयाल निवासी सूरजपुर, चंडौस फरार हैं। गुरुवार को थाना पुलिस को सूचना मिली थी कि यह गिरोह तालसपुर नई आबादी क्षेत्र के एक मकान से फर्जी फाइनेंस कंपनी का संचालन कर रहा है। इसके बाद पुलिस ने मकान पर दबिश देकर तीनों को गिरफ्तार किया।

गिरोह के खिलाफ वाघेला देवा भाई पुत्र लाखा भाई निवासी उपलेटा सिटी, राजकोट गुजरात ने मुकदमा दर्ज कराया था। तभी से इनकी तलाश की जा रही थी। ठगों के पास से मौके पर लैपटाप, चार टेबलेट, नौ मोबाइल फोन, बैंक की कई पासबुक, चेक बुक, दस एटीएम कार्ड सहित मस्कट फाइनेंस, किरन फाइनेंस, मुद्रा फाइनेंस के नाम से फर्जी कागजात कंपनी के फर्जी दस्तावेज, तीन मोटर साइकिल और 2.3 लाख रुपये की नगदी मिली है। गिरोह को दबोचने वालों में एसआई अमित प्रताप सिंह, एसआई सचिन कुमार एसआई योगेंद्र कुमार, कांस्टेबल योगेंद्र कुमार और धर्मवीर शामिल रहे।

व्हाट्सएप और फेसबुक को बनाया ठगी का माध्यम
ठगों ने जनता के साथ ठगी करने के लिए फेसबुक को व्हाट्सएप को ठगी का माध्यम बनाया था। गिरोह सोशल मीडिया पर प्रचार करता था कि वह सस्ती ब्याज दर पर जरूरतमंदों को लोन उपलब्ध करवाते हैं।


जैसे ही लोग इनके भ्रामक प्रचार के जाल में फंसते थे। गिरोह उसे बातों में फुसलाकर मोटी रकम अपने खाते में जमा करवाता था। रकम ट्रांसफर कराने के बाद गिरोह ग्राहक से संपर्क तोड़ देता था।
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