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हत्या के दोषी युवक को 10 साल की कैद
Updated Thu, 02 Aug 2018 01:52 AM IST
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क्राइम न्यूज, अमर उजाला, अलीगढ़।
करीब दो साल बाद जब बेटी को खुदकुशी करने के लिए मजबूर करने वाले दोषी युवक नितांशु गौड़ उर्फ राजा को एडीजे-7 की अदालत ने 10 साल की कैद की सजा सुनाई, तो यह फैसला सुन माता-पिता के आंखें नम हो गईं। बेटी ने इकतरफा प्यार में छेड़खानी और नाजायज रिश्ते के दबाव से तंग आकर अपनी मां की साड़ी से छत की रेलिंग पर फांसी लगाकर जान दे दी थी। अब आकर पिछले दो साल से माता-पिता की बेटी की आत्महत्या के जिम्मेदार को सजा की आस पूरी हो गई।
बेटी के पिता नरौरा एटोमिक पावर प्लांट में सेवारत हैं। उनका परिवार रामघाट रोड स्थित एलआईजी-13 स्वर्ण जयंती रह रहा है। पिता छुट्टियों में ही आ पाते थे, जबकि मां और बेटी घर पर रहती थी। एक बार मां की ज्यादा तबीयत खराब होने पर उन्हें दिल्ली इलाज की खातिर ले जाना पड़ा। उस समय बेटी सिविल लाइंस के एक प्रमुख स्कूल में कक्षा 9 में पढ़ रही थी।
दरअसल, मां-बेटी घर पर अकेली होने के कारण मदद के बहाने उनके पड़ोसी का रिश्तेदार युवक का आना जाना शुरू हो गया था। उसने मां की अनुमति पर बेटी का मोबाइल नंबर ले लिया। वह बातें कराने लगा। एक दिन बेटी ने अपनी मां को युवक के बारे में शिकायत की कि वह मोबाइल पर मुझसे अनाप-शनाप बातें करता है। इस पर मां ने परिजनों से शिकायत कर हिदायत दे दी। इसके बाद 6 जून 2016 की तड़के मां जब टहलने निकली। तभी बेटी ने मौका पाकर छत के पीछे हिस्से की रेलिंग में साड़ी से फांसी लगाकर खुदकुशी कर ली।
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उस समय बेटी कक्षा 11 में पढ़ रही थी। मां जब घर पहुंची, तब उन्होंने दरवाजा खटखटाया, लेकिन खुला नहीं है। इधर-उधर देखा, तो बेटी का शव लटकते मिला। फौरन पति और पुलिस को फोन कर दिया गया। मौके पर पति और पुलिस पहुंच गई। पुलिस ने छानबीन शुरू कर दी। इस दौरान एक सुसाइड नोट पुलिस के हाथ लग गया, जिसमें खुदकुशी का जिम्मेदार उसी युवक नितांशु उर्फ राजा को ठहराया था।
पुलिस ने सुसाइड नोट के आधार पर दो-तीन दिन में नितांशु को गिरफ्तार कर अदालत में पेश किया। अदालत ने जेल भेज दिया। नौ जून 2016 को अलमारी में किताबों के बीच एक और पत्र मिला, जिसमें बेटी ने अपने पिता से नितांशु के बारे में शिकायत की थी। दोनों पत्रों को फॉरेंसिक जांच के लिए आगरा भेजा गया था। रिपोर्ट में दोनों पत्र बेटी के हाथ से लिखे होने की पुष्टि की गई। इस दौरान मुकदमा चल रहा था।
बुधवार को एडीजे-7 अजय कुमार त्रिपाठी द्वितीय ने इस मामले की सुनवाई करते हुए नितांशु गौड़ उर्फ राजा पुत्र स्व. ऋषि कुमार निवासी कुलदीप विहार थाना क्वार्सी को नाबालिग को सुसाइड के लिए प्रेरित करने की धारा 305 के तहत 10 साल की कैद की सजा सुनाई है।
साथ ही 50 हजार रुपये का जुर्माना भी ठोंका है। इस 50 हजार रुपये में से 30 हजार रुपये माता-पिता को देने का आदेश दिया है। घटना के बाद नितांशु आठ महीने जेल में रहा था। जमानत पर रिहा हुआ था। आदेश के बाद उसे फिर जेल भेज दिया गया। मंगलवार को अदालत ने नितांशु को दोषी ठहराया था। अभियोजन पक्ष से पैरवी एडीजीसी रघुवंश शर्मा व वरिष्ठ अधिवक्ता नीरज चौहान कर रहे थे।
सुसाइड नोट में लिखा था-
बेटी ने अपने सुसाइड नोट में लिखा था कि नितांशु उसके माता-पिता को कत्ल करने की धमकी देता है। साथ ही उससे शारीरिक संबंध बनाने का दबाव बनाता है। इससे मैं तंग आ गई हूं। इसलिए खुदकुशी करने का फैसला लिया है। इसका जिम्मेदार केवल नितांशु है।
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करीब दो साल बाद जब बेटी को खुदकुशी करने के लिए मजबूर करने वाले दोषी युवक नितांशु गौड़ उर्फ राजा को एडीजे-7 की अदालत ने 10 साल की कैद की सजा सुनाई, तो यह फैसला सुन माता-पिता के आंखें नम हो गईं। बेटी ने इकतरफा प्यार में छेड़खानी और नाजायज रिश्ते के दबाव से तंग आकर अपनी मां की साड़ी से छत की रेलिंग पर फांसी लगाकर जान दे दी थी। अब आकर पिछले दो साल से माता-पिता की बेटी की आत्महत्या के जिम्मेदार को सजा की आस पूरी हो गई।
बेटी के पिता नरौरा एटोमिक पावर प्लांट में सेवारत हैं। उनका परिवार रामघाट रोड स्थित एलआईजी-13 स्वर्ण जयंती रह रहा है। पिता छुट्टियों में ही आ पाते थे, जबकि मां और बेटी घर पर रहती थी। एक बार मां की ज्यादा तबीयत खराब होने पर उन्हें दिल्ली इलाज की खातिर ले जाना पड़ा। उस समय बेटी सिविल लाइंस के एक प्रमुख स्कूल में कक्षा 9 में पढ़ रही थी।
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दरअसल, मां-बेटी घर पर अकेली होने के कारण मदद के बहाने उनके पड़ोसी का रिश्तेदार युवक का आना जाना शुरू हो गया था। उसने मां की अनुमति पर बेटी का मोबाइल नंबर ले लिया। वह बातें कराने लगा। एक दिन बेटी ने अपनी मां को युवक के बारे में शिकायत की कि वह मोबाइल पर मुझसे अनाप-शनाप बातें करता है। इस पर मां ने परिजनों से शिकायत कर हिदायत दे दी। इसके बाद 6 जून 2016 की तड़के मां जब टहलने निकली। तभी बेटी ने मौका पाकर छत के पीछे हिस्से की रेलिंग में साड़ी से फांसी लगाकर खुदकुशी कर ली।
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उस समय बेटी कक्षा 11 में पढ़ रही थी। मां जब घर पहुंची, तब उन्होंने दरवाजा खटखटाया, लेकिन खुला नहीं है। इधर-उधर देखा, तो बेटी का शव लटकते मिला। फौरन पति और पुलिस को फोन कर दिया गया। मौके पर पति और पुलिस पहुंच गई। पुलिस ने छानबीन शुरू कर दी। इस दौरान एक सुसाइड नोट पुलिस के हाथ लग गया, जिसमें खुदकुशी का जिम्मेदार उसी युवक नितांशु उर्फ राजा को ठहराया था।
पुलिस ने सुसाइड नोट के आधार पर दो-तीन दिन में नितांशु को गिरफ्तार कर अदालत में पेश किया। अदालत ने जेल भेज दिया। नौ जून 2016 को अलमारी में किताबों के बीच एक और पत्र मिला, जिसमें बेटी ने अपने पिता से नितांशु के बारे में शिकायत की थी। दोनों पत्रों को फॉरेंसिक जांच के लिए आगरा भेजा गया था। रिपोर्ट में दोनों पत्र बेटी के हाथ से लिखे होने की पुष्टि की गई। इस दौरान मुकदमा चल रहा था।
बुधवार को एडीजे-7 अजय कुमार त्रिपाठी द्वितीय ने इस मामले की सुनवाई करते हुए नितांशु गौड़ उर्फ राजा पुत्र स्व. ऋषि कुमार निवासी कुलदीप विहार थाना क्वार्सी को नाबालिग को सुसाइड के लिए प्रेरित करने की धारा 305 के तहत 10 साल की कैद की सजा सुनाई है।
साथ ही 50 हजार रुपये का जुर्माना भी ठोंका है। इस 50 हजार रुपये में से 30 हजार रुपये माता-पिता को देने का आदेश दिया है। घटना के बाद नितांशु आठ महीने जेल में रहा था। जमानत पर रिहा हुआ था। आदेश के बाद उसे फिर जेल भेज दिया गया। मंगलवार को अदालत ने नितांशु को दोषी ठहराया था। अभियोजन पक्ष से पैरवी एडीजीसी रघुवंश शर्मा व वरिष्ठ अधिवक्ता नीरज चौहान कर रहे थे।
सुसाइड नोट में लिखा था-
बेटी ने अपने सुसाइड नोट में लिखा था कि नितांशु उसके माता-पिता को कत्ल करने की धमकी देता है। साथ ही उससे शारीरिक संबंध बनाने का दबाव बनाता है। इससे मैं तंग आ गई हूं। इसलिए खुदकुशी करने का फैसला लिया है। इसका जिम्मेदार केवल नितांशु है।