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स्वस्थ नहीं बीमार बना रहा ‘केला’

Sun, 16 Oct 2016 01:12 AM IST
अमर उजाला,अलीगढ़
अमर उजाला,अलीगढ़ Updated Sun, 16 Oct 2016 01:12 AM IST
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आशीष श्रीवास्तव
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केला खाने, खिलाने के शौकीन हैं तो सावधान रहें..। आयरन, फाइबर, मैग्नीशियम, कार्बोहाइड्रेट और ग्लूकोज से भरपूर केला आपकी सेहत बनाने की जगह बीमार बना  सकता है। बड़ी कमाई के लालच में केला पकाने का तरीका ही बदल दिया गया है।

एसीटिलीन गैस फारमेशन और घातक पेस्टीसाइड्स के बेतहाशा प्रयोग से केले को अब एक से दो दिन में ही पका दिया जाता है। सही तरीका सही रसायन मिलाने पर केला पकाने में छह दिन का समय लगता है। कम दिनों में अधिक मात्रा में केला पका कर रुपये कमाने में लोगों की सेहत से खिलवाड़ हो रहा है। एफडीए ने शनिवार को इसका खुलासा किया।  
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कम जानकारी और दक्षता के अभाव में कारोबारी केला पकाने के लिए गलत तरीके इस्तेमाल करते हैं। सही तरीके के अनुसार पेस्टीसाइड से केला पकाने के लिए एथीलिन गैस के सिलेंडर का इस्तेमाल होता है।
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अब तो इसके स्प्रे भी आने लगे हैं। उदाहरण के तौर पर एक चेंबर में यदि चार टन केले अथवा अन्य फल रखे हैं तो उसके लिये आधा लीटर का एथीलिन सिलेंडर पर्याप्त है। इसका इस्तेमाल कर 13 डिग्री तापमान में पांच से छह दिन की प्रक्रिया में फल पक जाता है।

महानगर के सूत मिल सारसौल चौराहा स्थित दिलशाद के गोदाम में थायोडान और इथेफोन नाम के क्रत्रिम रसायन और एथीलिन गैस फॉरमेशन के माध्यम से केला पकाया जाता मिला। नई बस्ती के विपिन के यहां इथेफोन नामक रसायन से केला पकता मिला तो इसी इलाके के गौरव सोनकर के यहां भी एडल्ट्रेंट से केला पकाया जाता मिला। मयूर फूड प्रोडक्ट ताला नगरी में भी सही प्रक्रिया नहीं अपनाई जा रही थी। इन सभी स्थानों से केले के नमूने लिए गए हैं। आसाराम कॉलोनी क्वार्सी पर केला पकाने की प्रक्रिया सही मिली, लेकिन लाइसेंस न होने के कारण कारोबारी को नोटिस जारी किया गया। शनिवार को एफडीए की इस कार्रवाई की खबर दूसरे इलाकों में तक पहुंची तो केला कारोबारियों में ख्‍ालबली मच गई।

-केला पकाने में थायोडान, इथेफोन अथवा एडल्ट्रेंट के प्रयोग से केला पसंद करने वाले बच्चों पर घातक असर पड़ता है। इससे लीवर, किडनी प्रभावित हो सकती है। उल्टी या आंखों में जलन होने के साथ, बोन मैरो और तंत्रिका तंत्र पर भी घातक असर पड़ता है। बच्चों में चिड़चिड़ापन एवं सीखने की प्रक्रिया भी प्रभावित होती है।
डॉ. विकास मल्होत्रा, वरिष्ठ बाल रोग विशेषज्ञ

डा. विकास मल्होत्रा ने बताया कि फल एवं सब्जियों को एक बड़े भगौने में गर्म पानी में डाल दें और इसमें आमतौर पर घर में मौजूद सिरका डाल दें। इससे फल अथवा सब्जी की ऊपरी सतह पर मौजूद घातक रसायन नष्ट हो जाएंगे और वह खाने योग्य हो जाएगा।


-शनिवार को केले पकाने वाले स्थानों पर छापा मारा गया था। वहां पर हानिकारक रसायनों से केले को पकाया जा रहा था। इसके नमूने ले लिए गए हैं और जांच के लिए प्रयोगशाला भेजा जा रहा है।          -धर्मेंद्र द्विवेदी, मुख्य खाद्य सुरक्षा अधिकारी  

 
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