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Aligarh News: मिट्टी से ऐसे बर्तन बनाए, जो देखे देखता ही रह जाए
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मिट्टी से बनाया गया डिनर सेट।
- फोटो : samvad
शहरी मदनगढ़ी गांव के राहुल कुमार ने अपने कारखाने में माटी कला को आधुनिक तकनीक से जोड़ दिया है। वे मिट्टी से 19 से अधिक प्रकार के बर्तन और सजावटी सामान बना रहे हैं। इनमें प्रेशर कुकर, तवा, कड़ाही, डिनर सेट, पानी की इको-फ्रेंडली बोतलें, गिलास, चाउमीन प्लेट एवं लस्सी के गिलास शामिल हैं। यह इतने खूबसूरत दिखते हैं कि जो देखे वो देखता ही रह जाए।
उनका नवाचार केवल इन बर्तनों तक सीमित नहीं है। उन्होंने मशीनों की मदद से गोबर से लंबे कंडे, लट्ठे तैयार किए हैं। पगमिल सहित अन्य मशीनों में आवश्यक बदलाव कर वे लगभग तीन-तीन फीट लंबे लट्ठे तैयार करते हैं, जिनका उपयोग मिट्टी के बर्तनों को पकाने के लिए ईंधन के रूप में करते हैं। इससे उत्पादन लागत कम रहती है। इन कंडों और लट्ठों की मांग बाजारों में भी है, जिससे अतिरिक्त आय होती है। वे बताते हैं कि माटी कला बोर्ड ने उनके हुनर को व्यवसाय का रूप देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
अकेले राहुल ही नहीं साधु आश्रम के अनुज, क्वार्सी के दो सगे भाई प्रेमचंद और नीरज के कामकाज में बदलाव आया है। पहले यह तीनों लोग अपने पुश्तैनी काम को कर रहे थे, अब आधुनिक ई-चॉक ने इनका काम बहुत आसान कर दिया है। रोजाना सैकड़ों चाय के कुल्हड़ और लस्सी के कुल्हड़ बनाकर यह शहर की दुकानों में भेजते हैं जिससे इनकी आय बढ़ रही है।
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राहुल के नवाचार में विभाग ने पूरा सहयोग किया है। अनुज, नीरज और प्रेमचंद को सवा तीन लाख रुपये के अलग-अलग लोन दिए गए हैं। इन्हें ई-चॉक भी दी गई है। माटीकला रोजगार योजना में 10 लाख रुपये तक का लोन दिलवाया जाता है, इसमें 25 फीसदी का अनुदान मिलता हे। 25 युवाओं को ई-चाक और पांच को पगमिल दी गई है।
-साजिदा बेगम, खादी ग्रामोद्योग अधिकारी।
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उनका नवाचार केवल इन बर्तनों तक सीमित नहीं है। उन्होंने मशीनों की मदद से गोबर से लंबे कंडे, लट्ठे तैयार किए हैं। पगमिल सहित अन्य मशीनों में आवश्यक बदलाव कर वे लगभग तीन-तीन फीट लंबे लट्ठे तैयार करते हैं, जिनका उपयोग मिट्टी के बर्तनों को पकाने के लिए ईंधन के रूप में करते हैं। इससे उत्पादन लागत कम रहती है। इन कंडों और लट्ठों की मांग बाजारों में भी है, जिससे अतिरिक्त आय होती है। वे बताते हैं कि माटी कला बोर्ड ने उनके हुनर को व्यवसाय का रूप देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
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अकेले राहुल ही नहीं साधु आश्रम के अनुज, क्वार्सी के दो सगे भाई प्रेमचंद और नीरज के कामकाज में बदलाव आया है। पहले यह तीनों लोग अपने पुश्तैनी काम को कर रहे थे, अब आधुनिक ई-चॉक ने इनका काम बहुत आसान कर दिया है। रोजाना सैकड़ों चाय के कुल्हड़ और लस्सी के कुल्हड़ बनाकर यह शहर की दुकानों में भेजते हैं जिससे इनकी आय बढ़ रही है।
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राहुल के नवाचार में विभाग ने पूरा सहयोग किया है। अनुज, नीरज और प्रेमचंद को सवा तीन लाख रुपये के अलग-अलग लोन दिए गए हैं। इन्हें ई-चॉक भी दी गई है। माटीकला रोजगार योजना में 10 लाख रुपये तक का लोन दिलवाया जाता है, इसमें 25 फीसदी का अनुदान मिलता हे। 25 युवाओं को ई-चाक और पांच को पगमिल दी गई है।
-साजिदा बेगम, खादी ग्रामोद्योग अधिकारी।