{"_id":"57eec7334f1c1bdc76575600","slug":"cotton-yarn-not-flowers-attached-through-congress","type":"story","status":"publish","title_hn":"सूत-कपास नहीं, फूलों के जरिये जुड़ी कांग्रेस","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
सूत-कपास नहीं, फूलों के जरिये जुड़ी कांग्रेस
अभिषेक शर्मा
Updated Sat, 01 Oct 2016 02:00 AM IST
विज्ञापन
सूत-कपास नहीं, फूलों के जरिये जुड़ी कांग्रेस
- फोटो : Rupesh
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
अंदाज वही पुराना। कॉटन का सफेद कुर्ता-पायजामा पहने राहुल गांधी ने बिना किसी रोक-टोक लोगों से सीधे संवाद स्थापित किया। मगर इस बार एक बदलाव जरूर दिखाई दिया। यह बदलाव था महात्मा गांधी की कांग्रेस में सूत-कपास की माला के बजाय फूलों की माला का। इस बार राहुल गांधी ने सुरक्षा घेरे को नजरंदाज कर खूब फूल स्वीकारे और फूलों का जवाब फूलों से देकर लोगों से कांग्रेस व खुद को जोड़ने की कोशिश की।
उनके फोकस में किसान, युवा और महिलाएं रहीं। जब भी जहां भी संबोधन का मौका मिला तो बार-बार यह कहने से न चूके कि पहले उन्हें बोलने दो। उनकी सुन लो, फिर जो रह जाएगा, उस पर बात होगी। किसानों का कर्ज माफी दर्द उछाला, युवाओं की बेराजगारी की बात छेड़ी। महिलाओं से हर दहलीज पर नमस्ते कर आगे बढ़े।
स्पेशल प्रोटेक्शन ग्रुप सुरक्षा प्राप्त राहुल गांधी के अब तक के आयोजनों में हर बार देखने को मिलता था कि उनके स्वागत में फूलों के बुके या माला कड़ी सुरक्षा जांच के बाद ही शामिल हो सकती थी। मगर जनता से खुद को जोड़ने की कोशिश में इस बार राहुल गांधी ने प्रोटोकॉल तोड़ने की कोशिश करते हुए लोगों से खूब हाथ मिलाया।
विज्ञापन
जिद करने पर किसी को भी बस की साइड वाली सीढ़ी पर चढ़ा लिया। फिर उससे बातचीत की। उसका उपहार, फूल माला भी स्वीकारी और उसे बदले में अपनी ओर से भी फूल भेंट किए।
किसानों को कर्ज माफी, युवाओं को रोजगार का मुद्दा हर मीटिंग में उछाला। उनसे खुद सवाल करते हुए खुद जवाब भी दिए।
यह भी कहलवाया कि अगर हमारी सरकार होती तो क्या ऐसा होता। या हमने क्या कभी ऐसा होने दिया। उन्होंने महिलाओं से खुद को जोड़ने की कोशिश में हर मोड़, गली, मुहाने या दरवाजे पर खड़ी महिलाओं से नमस्कार में अभिभावदन किया। कई बार तो ऐसा भी मौका आया, जब उन्होंने गाड़ी रुकवाकर महिला के साथ मौजूद बच्चे को फूलों की माला देकर उससे हाथ मिलाया।
विज्ञापन
उनके फोकस में किसान, युवा और महिलाएं रहीं। जब भी जहां भी संबोधन का मौका मिला तो बार-बार यह कहने से न चूके कि पहले उन्हें बोलने दो। उनकी सुन लो, फिर जो रह जाएगा, उस पर बात होगी। किसानों का कर्ज माफी दर्द उछाला, युवाओं की बेराजगारी की बात छेड़ी। महिलाओं से हर दहलीज पर नमस्ते कर आगे बढ़े।
विज्ञापन
स्पेशल प्रोटेक्शन ग्रुप सुरक्षा प्राप्त राहुल गांधी के अब तक के आयोजनों में हर बार देखने को मिलता था कि उनके स्वागत में फूलों के बुके या माला कड़ी सुरक्षा जांच के बाद ही शामिल हो सकती थी। मगर जनता से खुद को जोड़ने की कोशिश में इस बार राहुल गांधी ने प्रोटोकॉल तोड़ने की कोशिश करते हुए लोगों से खूब हाथ मिलाया।
विज्ञापन
जिद करने पर किसी को भी बस की साइड वाली सीढ़ी पर चढ़ा लिया। फिर उससे बातचीत की। उसका उपहार, फूल माला भी स्वीकारी और उसे बदले में अपनी ओर से भी फूल भेंट किए।
किसानों को कर्ज माफी, युवाओं को रोजगार का मुद्दा हर मीटिंग में उछाला। उनसे खुद सवाल करते हुए खुद जवाब भी दिए।
यह भी कहलवाया कि अगर हमारी सरकार होती तो क्या ऐसा होता। या हमने क्या कभी ऐसा होने दिया। उन्होंने महिलाओं से खुद को जोड़ने की कोशिश में हर मोड़, गली, मुहाने या दरवाजे पर खड़ी महिलाओं से नमस्कार में अभिभावदन किया। कई बार तो ऐसा भी मौका आया, जब उन्होंने गाड़ी रुकवाकर महिला के साथ मौजूद बच्चे को फूलों की माला देकर उससे हाथ मिलाया।