फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Aligarh News ›   Corona eclipse will remain on Gurpurnima, the mask will be found from the Guru only from distance

गुरुपूर्णिमा पर रहेगा कोरोना का ग्रहण, मास्क और दूरी से ही मिलेगी गुरु की शरण

Fri, 03 Jul 2020 07:34 PM IST
राजेश सिंह न्यूूज डेस्क, अमर उजाला, अलीगढ़।
न्यूूज डेस्क, अमर उजाला, अलीगढ़। Published by: राजेश सिंह Updated Fri, 03 Jul 2020 07:34 PM IST
विज्ञापन
Corona eclipse will remain on Gurpurnima, the mask will be found from the Guru only from distance
Guru Purnima 2019 - फोटो : Rohit Jha
कोरोना का ग्रहण धीरे-धीरे सभी धार्मिक कार्यों पर पड़ रहा है। अब कल (रविवार) गुरु पूर्णिमा पर भी इसका असर देखने को मिलेगा। गुरु और शिष्य सामाजिक दूरी, मास्क और सैनिटाइजेशन के नियमों का निर्वहन करेंगे। इसके लिए गुरुओं ने भी पूरी तैयारी कर ली हैं। वहीं कई गुरुओं की पूजा फोटो से होगी और खड़ाऊं पर ही श्रद्धालु माथा टेक सकेंगे। यह परंपरा एक-एक करके ही निभाई जाएगी।  
विज्ञापन



शुक्रवार को शहर के मंदिरों और धर्माचार्यों से वार्ता की गई तो पता चला कि कोरोना संक्रमण काल के चलते सामूहिक भंडारे, शर्बत वितरण, हवन, प्रवचन जैसे कार्यक्रम आयोजित नहीं किए जा रहे हैं। जो लोग अपने गुरु से मिलना चाहते हैं। वह एक-एक करके ही मिल सकेंगे। शहर के अधिकांश धर्माचार्यों ने शिष्यों द्वारा किए जाने वाले स्पर्श पर भी प्रतिबंध लगा दिया है।
विज्ञापन



कई धर्माचार्यों ने इसके विकल्प के रूप में फोटो की पूजा कराने और खड़ाऊं के पास माथा टेकने की अनुमति दी है। ऐसे में सावन के सोमवार और गुरु पूर्णिमा पर शहर में भीड़भाड़ इकट्ठी नहीं होगी। वहीं धर्माचार्यों ने श्रद्धालुओं को यह भी सलाह दी है कि चातुर्मास में गुरु का महत्व होता है। ऐसे में अन्य किसी भी दिन अपने गुरु से भी मिल सकते हैं।     
विज्ञापन
विज्ञापन


चातुर्मास में गुरु का क्या होता है महत्व  
महामंडलेश्वर स्वामी पूर्णानंद पुरी महाराज और श्री गुरु ज्योतिष शोध संस्थान के अध्यक्ष पं. हृदय रंजन शर्मा ने बताया कि हिंदु परंपरा के अनुसार चातुर्मास में भगवान विष्णु शयन के लिए चले जाते हैं। यूं तो भगवान शंकर और ब्रह्मा भी शयन के लिए जाते हैं, लेकिन यहां भगवान विष्णु संसार के पालनकर्ता हैं। इसीलिए उनके जाने पर जब सन्यासियों और गुरुओं को धर्म दंडिका का दायित्व मिलता है तो वह जनता को भगवान के नाम के लिए प्रेरित करते हैं। यूं तो सन्यासी पूरे देश में भ्रमण करते रहते हैं, लेकिन जब भगवान विष्णु शयन में चले जाते हैं तो सन्यासियों का दायित्व होता है कि शास्त्रीय संवत वचन और संविधान को जनता में प्रेरित करें। भगवद नाम के लिए जन चेतना जगाएं। ऐसे में गुरु का उत्सव बनाने के लिए श्रद्धालु गुरु पूर्णिमा पर उनके पास जाते हैं। यहां उन्होंने आह्वान किया कि अन्य किसी दिन भी अपने गुरु से मिला जा सकता है।


- कोरोना संक्रमण काल चल रहा है। ऐसे में जनता को सामूहिक आयोजन से दूरी बनानी चाहिए। अगर गुरु से मिलने जा रहे हैं तो सरकारी नियम कानूनों का पालन करें। क्योंकि जान है तो जहान है। 
-पं. हृदय रंजन शर्मा, अध्यक्ष श्री गुरु ज्योतिष शोध संस्थान 

- इस बार गुरु पूर्णिमा का कार्यक्रम आयोजित नहीं कर रहे हैं। भंडारा, कीर्तन आदि कार्यक्रम नहीं होंगे। किसी को मिलना है तो एक-एक करके मिल सकता है। वह भी भीड़ के साथ नहीं। सैनिटाइजेशन का पालन भी जरूरी रहेगा।

 - महामंडलेश्वर स्वामी पूर्णानंदपुरी महाराज        

- गुरुजी (नगर के व्यास महेश चंद व्यास) का पूजन श्रद्धालु फोटो के माध्यम से करेंगे। जबकि गुरुजी सामने बैठे रहेंगे। वहीं चरणों की जगह खड़ाऊं पर माथा टेक सकेंगे। वह भी दूर से। सामूहिक कार्यक्रम नहीं होंगे। साथ ही सैनिटाइजेशन, मास्क और उचित दूरी का ख्याल रखना होगा। 
- आचार्य कौशल किशोर व्यास, संचालक श्री व्यासजी भागवत ज्योतिष पीठ   
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed