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कोरोना : सवा करोड़ जुर्माना, 107 मौतों के बाद भी लापरवाही
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अभिषेक शर्मा
कोरोना महामारी में लापरवाही की कीमत सवा करोड़ रुपये जुर्माना भरकर और 107 लोगों ने तो अपनी जान देकर चुकाई है। दो साल में जिले के 21 हजार से अधिक लोग कोरोना से संक्रमित हो चुके हैं। दूसरी लहर की विदाई कितनी भयानक थी, लोग इलाज तक को तरस गए थे। बाजार गवाह हैं कि ये सब झेलकर भी लोग कोरोना कर्फ्यू में ढील मिलते ही फिर से मनमानी पर उतर आए हैं। यदि बचाव उपायों को लेकर संजीदा नहीं हुए तो यही लोग कोरोना कैरियर बन सकते हैं और विशेषज्ञों के कयास सही बैठे तो तीसरी लहर में बच्चों की सुरक्षा हो पायेगी?
यह आलम तो तब है जब कोरोना कर्फ्यू में पुलिस प्रशासनिक टीमों ने जमकर कार्रवाई की। बिना मास्क या बिना सामाजिक दूरी के लोगों पर खूब कार्रवाई की। इसके बाद भी शहर के बाजारों में फिर से बेपरवाही का आलम बाजार खुलने के बाद हर रोज देखा जा सकता है। कहीं कचौड़ी की दुकान पर तो कहीं किराने की दुकान पर दुकानदार के चिल्लाने और झिकझिक के बाद भी सामाजिक दूरी का पालन नहीं कर रहे हैं। यह हाल तो तब है जब कर्फ्यू में ढील के साथ ही विशेषज्ञ तीसरी लहर को लेकर लगातार चेतावनी जारी कर रहे हैं।
ये हुईं अब तक कार्रवाई
2021 में भरा 3711200 रुपये जुर्माना
वर्ष 2021 में एक जनवरी से 20 जून तक कुल 15338 चालान हुए हैं और कुल 37 लाख 11 हजार 200 रुपये जुर्माना वसूला गया। इसमें सर्वाधिक 15290 चालान सार्वजनिक स्थानों पर मास्क न पहनने को लेकर हुए हैं। इस एवज में लोगों को 36 लाख 91 हजार 400 रुपये जुर्माना भी भरना पड़ा है। 25 चालान रात्रि निषेधाज्ञा, धार्मिक जुलूस जैसे मसलों में सरकार के दिशा निर्देश न मानने पर किए गए और 8 हजार 350 रुपये जुर्माना भी वसूला है। इसके अलावा 11 हजार 450 रुपये जुर्माना दोपहिया वाहनों की पिछली सीट पर यात्रा करने वालों को भरना पड़ा है। पुलिस ने ऐसे 23 चालान किए हैं। महामारी के सबसे भयानक दौर में भी कुछ लोग इतने बेपरवाह थे कि 37 लाख रुपये जुर्माना भरना पड़ा।
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2020 में वसूला था 8730777 रुपये जुर्माना
गत वर्ष दिसंबर तक 75 हजार 226 चालानों में 87 लाख 30 हजार 777 रुपये जुर्माना वसूला गया था। उसमें भी सर्वाधिक 64 हजार 855 चालानों में 68 लाख 18 हजार 117 रुपये सार्वजनिक स्थानों पर मास्क न पहनने वालों से ही वसूला गया था। सरकारी दिशा निर्देशों के उल्लंघन में 5 हजार 752 चालान हुए थे और इनमें 9 लाख 5 हजार 100 रुपये वसूले थे। दोपहिया वाहन की पिछली सीट पर यात्रा करने वालों से भी 10 लाख 7 हजार 560 रुपये वसूले गए थे, ऐसे 4 हजार 619 चालान हुए थे।
दो साल में 1588 अभियोग दर्ज, गिरफ्तारी भी
कोरोना महामारी के दौरान सरकार के आदेशों की अवहेलना को लेकर गत वर्ष 1324 अभियोग भी दर्ज किए गए थे। जनवरी से अब तक इस वर्ष भी 264 अभियोगों में 1003 लोगों को नामजद भी किया गया है। इनमें से 7 लोग गिरफ्तार भी किये गए हैं। अन्य नामजदों पर नोटिस आदि की कार्यवाही की गई है।
- कोरोना की दूसरी लहर ने अपनों को हमेशा के लिए हमसे दूर कर दिया है। इसके बाद भी लापरवाही से अपने घर में बीमारी को आमंत्रण देना है। अभी कम से कम छह महीने वैक्सीनेशन के साथ हमें सख्ती से गाइडलाइन का पालन करना होगा। तभी हम अपने बच्चों को सुरक्षित रख पाएंगे। मास्क, सोशल डिस्टेंस और बार बार हाथों की सफाई में जरा सी चूक पूरा घर तबाह कर सकती है। - डॉ विकास मेहरोत्रा, बाल रोग विशेषज्ञ
-ये व्यवहार परिवर्तन का विषय है। जान पर बन आई है, अब भी व्यवहार में परिवर्तन नहीं करेंगे तो कब करेंगे। गांवों के लोग इम्यूनिटी पर गुरूर न करें, महामारी को गंभीरता से लें। ग्राम पंचायतों को सभी अधिकार प्राप्त हैं वे चाहें तो सख्त प्रावधान कर सकती हैं। प्रशासन के सहयोग से बिना पालन, नो राशन और जुर्माने जैसे नियम बनाने चाहिए। पब्लिक एड्रेस सिस्टम से नियमित जागरूक किया जाना चाहिए।-विपिन चौधरी, प्रबंधक- स्मार्ट विलेज फाउंडेशन
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कोरोना महामारी में लापरवाही की कीमत सवा करोड़ रुपये जुर्माना भरकर और 107 लोगों ने तो अपनी जान देकर चुकाई है। दो साल में जिले के 21 हजार से अधिक लोग कोरोना से संक्रमित हो चुके हैं। दूसरी लहर की विदाई कितनी भयानक थी, लोग इलाज तक को तरस गए थे। बाजार गवाह हैं कि ये सब झेलकर भी लोग कोरोना कर्फ्यू में ढील मिलते ही फिर से मनमानी पर उतर आए हैं। यदि बचाव उपायों को लेकर संजीदा नहीं हुए तो यही लोग कोरोना कैरियर बन सकते हैं और विशेषज्ञों के कयास सही बैठे तो तीसरी लहर में बच्चों की सुरक्षा हो पायेगी?
यह आलम तो तब है जब कोरोना कर्फ्यू में पुलिस प्रशासनिक टीमों ने जमकर कार्रवाई की। बिना मास्क या बिना सामाजिक दूरी के लोगों पर खूब कार्रवाई की। इसके बाद भी शहर के बाजारों में फिर से बेपरवाही का आलम बाजार खुलने के बाद हर रोज देखा जा सकता है। कहीं कचौड़ी की दुकान पर तो कहीं किराने की दुकान पर दुकानदार के चिल्लाने और झिकझिक के बाद भी सामाजिक दूरी का पालन नहीं कर रहे हैं। यह हाल तो तब है जब कर्फ्यू में ढील के साथ ही विशेषज्ञ तीसरी लहर को लेकर लगातार चेतावनी जारी कर रहे हैं।
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ये हुईं अब तक कार्रवाई
2021 में भरा 3711200 रुपये जुर्माना
वर्ष 2021 में एक जनवरी से 20 जून तक कुल 15338 चालान हुए हैं और कुल 37 लाख 11 हजार 200 रुपये जुर्माना वसूला गया। इसमें सर्वाधिक 15290 चालान सार्वजनिक स्थानों पर मास्क न पहनने को लेकर हुए हैं। इस एवज में लोगों को 36 लाख 91 हजार 400 रुपये जुर्माना भी भरना पड़ा है। 25 चालान रात्रि निषेधाज्ञा, धार्मिक जुलूस जैसे मसलों में सरकार के दिशा निर्देश न मानने पर किए गए और 8 हजार 350 रुपये जुर्माना भी वसूला है। इसके अलावा 11 हजार 450 रुपये जुर्माना दोपहिया वाहनों की पिछली सीट पर यात्रा करने वालों को भरना पड़ा है। पुलिस ने ऐसे 23 चालान किए हैं। महामारी के सबसे भयानक दौर में भी कुछ लोग इतने बेपरवाह थे कि 37 लाख रुपये जुर्माना भरना पड़ा।
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2020 में वसूला था 8730777 रुपये जुर्माना
गत वर्ष दिसंबर तक 75 हजार 226 चालानों में 87 लाख 30 हजार 777 रुपये जुर्माना वसूला गया था। उसमें भी सर्वाधिक 64 हजार 855 चालानों में 68 लाख 18 हजार 117 रुपये सार्वजनिक स्थानों पर मास्क न पहनने वालों से ही वसूला गया था। सरकारी दिशा निर्देशों के उल्लंघन में 5 हजार 752 चालान हुए थे और इनमें 9 लाख 5 हजार 100 रुपये वसूले थे। दोपहिया वाहन की पिछली सीट पर यात्रा करने वालों से भी 10 लाख 7 हजार 560 रुपये वसूले गए थे, ऐसे 4 हजार 619 चालान हुए थे।
दो साल में 1588 अभियोग दर्ज, गिरफ्तारी भी
कोरोना महामारी के दौरान सरकार के आदेशों की अवहेलना को लेकर गत वर्ष 1324 अभियोग भी दर्ज किए गए थे। जनवरी से अब तक इस वर्ष भी 264 अभियोगों में 1003 लोगों को नामजद भी किया गया है। इनमें से 7 लोग गिरफ्तार भी किये गए हैं। अन्य नामजदों पर नोटिस आदि की कार्यवाही की गई है।
- कोरोना की दूसरी लहर ने अपनों को हमेशा के लिए हमसे दूर कर दिया है। इसके बाद भी लापरवाही से अपने घर में बीमारी को आमंत्रण देना है। अभी कम से कम छह महीने वैक्सीनेशन के साथ हमें सख्ती से गाइडलाइन का पालन करना होगा। तभी हम अपने बच्चों को सुरक्षित रख पाएंगे। मास्क, सोशल डिस्टेंस और बार बार हाथों की सफाई में जरा सी चूक पूरा घर तबाह कर सकती है। - डॉ विकास मेहरोत्रा, बाल रोग विशेषज्ञ
-ये व्यवहार परिवर्तन का विषय है। जान पर बन आई है, अब भी व्यवहार में परिवर्तन नहीं करेंगे तो कब करेंगे। गांवों के लोग इम्यूनिटी पर गुरूर न करें, महामारी को गंभीरता से लें। ग्राम पंचायतों को सभी अधिकार प्राप्त हैं वे चाहें तो सख्त प्रावधान कर सकती हैं। प्रशासन के सहयोग से बिना पालन, नो राशन और जुर्माने जैसे नियम बनाने चाहिए। पब्लिक एड्रेस सिस्टम से नियमित जागरूक किया जाना चाहिए।-विपिन चौधरी, प्रबंधक- स्मार्ट विलेज फाउंडेशन