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सहकारी, ग्रामीण बैंक और डाक विभाग रहा कंगाल

Mon, 26 Dec 2016 01:18 AM IST
अमर उजाला ब्यूूराे
अमर उजाला ब्यूूराे Updated Mon, 26 Dec 2016 01:18 AM IST
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 Cooperative, rural banks and post offices was poor
सहकारी, ग्रामीण बैंक और डाक विभाग रहा कंगाल - फोटो : Rupesh
नोटबंदी के बाद रिजर्व बैंक से 47 दिनों में नई करेंसी का भले ही कुल मिलाकर करीब डेढ़ हजार करोड़ रुपया बैंकों को मिला हो, लेकिन इस अवधि में ग्रामीण क्षेत्र के बैंक, डाकविभाग एवं सहकारी बैंकों की झोली लगभग खाली ही रही। हालांकि उच्चाधिकारी इन बैंकों में इस दौरान कैश भेजने का दावा कर रहे हों, लेकिन हकीकत में करीब एक माह तक इन बैंकों में 50 से 100 ग्राहकों को देने के लिए भी पर्याप्त पैसा नहीं रहा।
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हाल ही में आए नई करेंसी के करीब 200 करोड़ रुपये भी इन बैंकों की झोली नहीं भर सके। इससे ग्रामीण क्षेत्र के लोगों को समस्याओं का सामना करना पड़ा। नकदी की चाह उन्हें शहरी क्षेत्र की बैंकों की ओर खींच लाई। इसी का परिणाम महानगर की बैंकों में अंतहीन लाइनों के रूप में दिखाई पड़ा। शहरी क्षेत्र की बैंकों पर दबाव इसी बात से समझा जा सकता है कि नोटबंदी में सबसे मालामाल रही एसबीआई की शहरी क्षेत्र की 18 बैंक शाखाओं पर ही करीब 20-22 हजार एटीएम कार्ड प्रतिदिन कनेक्ट हुए तो शाखाओं के काउंटरों से करीब सात आठ लाख ग्राहकों ने पैसा निकाला।
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अकेली एसबीआई मेन ब्रांच में दिनों में करीब सात हजार कार्ड प्रति दिन कनेक्ट हुए।
केनरा बैंक एवं पंजाब नेशनल बैंक में भी कमोबेश यही स्थिति रही। अन्य बैंकों को मिलाकर तो यह आंकड़ा और भी बढ़ जाता है। एटीएम की बात करें तो 46 दिनों में जनपद में 277 से अधिक एटीएम में से कुछ बड़ी बैंकों को छोड़कर अन्य के एटीएम या तो बंद नजर आए या फिर उनमें पैसा नदारद रहा। ग्रामीण बैंक आफ आर्यावर्त के रीजनल मैनेजर संजीव कुमार ने स्वीकार किया कि नोटबंदी के दौरान ग्रामीण क्षेत्र की बैंकों में कैश की दिक्कत रही। करीब एक माह तक बैंकों को बमुश्किल दो लाख रुपया प्रतिदिन ही मिल सका। इस पैसे को उन्होंने थोड़ा-थोड़ा ग्राहकों में बांटा। 
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रविवार को भी अधिकांश एटीएम बंद नजर आए
अलीगढ़। शनिवार के बाद रविवार को भी एसबीआई को छोड़कर अन्य बैंक शाखाओं के एटीएम या तो बंद नजर आए या फिर उनमें कैश नहीं रहा। इसके चलते जरूरतमंद लोग इधर-उधर भटकते देखे गए। एसबीआई के एटीएम पर लंबी-लंबी लाइनें देखी गईं। बताते चलें कि शुक्रवार को एसबीआई के तीन-चार चेस्टों को करीब 100 करोड़ रुपया तो केनरा बैंक एवं पीएनबी को करीब 34-34 करोड़ रुपया मिला था। अन्य बैंकों को भी राशि मिली। इसके बावजूद इन बैंकों द्वारा अपने एटीएम को भरना ग्राहकों के लिए मुसीबत बन गया। 
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