Aligarh Nagar Nigam: एटुजेड का अनुबंध किया निरस्त, कचरा निस्तारण को अब नगर निगम करेगा यह
एटुजेड वेस्ट मैनेजमेंट कंपनी के साथ पांच अप्रैल 2010 को अनुबंध हुआ था। 10 अगस्त 2025 को निरीक्षण में यह पाया गया कि कूड़ा निस्तारण अनुबंध की शर्तों के अनुरूप नहीं किया जा रहा है। मथुरा रोड व आसपास के क्षेत्रों में अवैध रूप से कूड़ा डाला जा रहा है। इससे शहर में कूड़ों के पहाड़ खड़े हो गए थे।
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कूड़ा निस्तारण में लापरवाही पर अलीगढ़ नगर निगम ने एटुजेड कंपनी के साथ अनुबंध खत्म कर दिया है। अनुबंध की शर्तों के अनुसार कंपनी को रोजाना 220 मीट्रिक टन कूड़े का निस्तारण करना था, लेकिन सिर्फ 80 से 100 मीट्रिक टन कूड़े का ही कंपनी निस्तारण कंपनी रही है, जिसके बाद यह कार्रवाई की गई।
नगर आयुक्त प्रेम प्रकाश मीणा ने बताया कि एटुजेड वेस्ट मैनेजमेंट कंपनी के साथ पांच अप्रैल 2010 को अनुबंध हुआ था। 10 अगस्त 2025 को निरीक्षण में यह पाया गया कि कूड़ा निस्तारण अनुबंध की शर्तों के अनुरूप नहीं किया जा रहा है। मथुरा रोड व आसपास के क्षेत्रों में अवैध रूप से कूड़ा डाला जा रहा है। इससे शहर में कूड़ों के पहाड़ खड़े हो गए थे। आसपास के इलाकों के लोग इनसे उठने वाली दुर्गंध से परेशान थे।
इस पर उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने भी आपत्ति दर्ज कराई। इससे पहले 28 जुलाई 2025 को विभागीय जांच में भी प्लांट के कार्यक्षमता से 50 फीसदी कम पर कार्य कर रहा है। अनुबंध की शर्तों के अनुपालन में लगातार लापरवाही बरते जाने व निर्धारित क्षमता के अनुरूप कूड़ा निस्तारण न किए जाने से अनुबंध को तत्काल प्रभाव से समाप्त कर दिया है।
शहर से 15 किमी दूर बनेगा कूड़ा निस्तारण प्लांट
नगर आयुक्त ने बताया कि अब शहर की सीमा से करीब 15 किलोमीटर दूर रोजाना 700 मीट्रिक टन कूड़ा निस्तारण करने की क्षमता का प्लांट लगाया जाएगा। इसे लगाने की जिम्मेदारी देने कवायद शुरू कर दी गई है। भविष्य में शहर से निकलने वाले कूड़े के निस्तारण में कोई समस्या न आए, इसे देखते हुए यह योजना बनाई जा रही है। इससे शहर को 50 साल तक दुर्गंध से मुक्त रखा जा सकेगा।
अमर उजाला ने भी उठाई थी समस्या
कूड़ा निस्तारण की सुस्त रफ्तार लोगों के लिए परेशानी बन गई है। अलीगढ़ मुस्लिम विवि ने भी इस समस्या पर शोध किया था, जिसके हवाले से अमर उजाला ने भी इस मुद्दे को उठाया। इसके बाद भी इस समस्या पर खबरें की गईं। इस शोध में पाया गया था कि महानगर से 560 मीट्रिक टन कूड़ा निकलता है। इसमें करीब 430 मीट्रिक टन का ही उठान सड़कों और घरों से होता है। शहर से 130 मीट्रिक टन कूड़ा तो उठ ही नहीं रहा है।
निस्तारण तो मात्र 28 मीट्रिक टन का था। हालांकि नगर निगम ने बाद में किए गए निरीक्षणों में 80 से 100 मीट्रिक टन कूड़े का निस्तारण होना पाया, लेकिन यह भी प्लांट की क्षमता से 50 फीसदी कम है। इस आंकड़े की भी बात करें तो 120 मीट्रिक टन कूड़े का निस्तारण नहीं हो रहा है। यानी प्लांट पर ही प्रतिदिन 120 मीट्रिक टन कूड़ा बगैर निस्तारण के रह जाता है और अगले दिन फिर से 320 मीट्रिक टन कूड़ा पहुंच जाता है। 2011 तक का कूड़ा यार्ड में डंप पड़ा है, जिसकी वजह से कूड़े के पहाड़ बढ़ते जा रहे हैं।