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किसानों के मुद्दे पर हमेशा मौन रही कांग्रेस : राणा
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प्रभारी मंत्री सुरेश राणा।
- फोटो : CITY OFFICE
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किसानों के मुद्दे पर कांग्रेस पार्टी हमेशा मौन ही रही है। चाहे वह राहुल गांधी हों या फिर प्रियंका गांधी, इन्होंने कभी किसानों के हित में कार्य नहीं किया। केवल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने ही किसानों के हित में कार्य किया है। सोमवार को अमर उजाला के संवाद कार्यक्रम में शामिल होने के बाद अलीगढ़ जिले के प्रभारी मंत्री, प्रदेश के चीनी मिल एवं गन्ना विकास मंत्री सुरेश राणा पत्रकारों से मुखातिब थे। लखीमपुर खीरी प्रकरण पर उन्होंने कहा कि यूपी की कानून व्यवस्था देश के लिए रोल मॉडल है। इस प्रकरण में न्यायिक जांच हो रही है। किसी भी गुनाहगार को बख्शा नहीं जाएगा।
प्रियंका गांधी के मौन व्रत के सवाल पर चुटकी लेते हुए राणा ने कहा कि वह तो पॉलिटिकल टूरिज्म पर आईं हैं। राहुल गांधी और प्रियंका गांधी ने कभी किसानों के लिए कुछ नहीं बोला। किसानों ने सर्वाधिक आत्महत्या यूपीए सरकार के दौरान ही की थी। फिर भी किसी ने कुछ नहीं कहा। कृषि विधेयक को लेकर सबसे पहला बयान राहुल गांधी ने 2013 में दिया था कि सरकार में आते ही एपीएमसी एक्ट (कृषि उपज बाजार समिति) में संशोधन करेंगे। लेकिन उनके पास साहस नहीं था, क्योंकि वह कहते कुछ हैं, करते कुछ हैं और समझते भी कुछ और ही हैं। किसानों के हित में एपीएमसी एक्ट में संशोधन का साहस प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अंदर था। इसीलिए उन्होंने फैसला लिया। आज किसान अपनी फसल को भारत में कहीं भी बेच सकता है। सभी टैक्स से किसानों को मुक्त कर दिया गया है। किसानों के बंधन तोड़ने का काम किसी ने किया है तो मोदी-योगी सरकार ने किया है। 2013 की एमएसपी को 2021 तक काफी बढ़ाया गया है। 18 हजार गांवों तक बिजली पहुंचाना, खाद्य के बंद कारखाने को चलाना, डीएपी पर सब्सिडी देने और गांव के इंफ्रास्ट्रक्चर को खड़ा करने का काम केवल मोदी सरकार ने किया है। विपक्षी नेताओं पर तंज कसते हुए कहा कि कुछ लोग कुछ कर नहीं पाए। इसीलिए जब उनका मन होता है तो वह एक दो दिन के लिए पॉलिटिकल टूरिज्म पर आते हैं। यहां आकर राजनीतिक माहौल खराब करते हैं।
लखीमपुर खीरी प्रकरण पर उन्होंने कहा कि यूपी की कानून व्यवस्था तो देश के लिए रोल मॉडल है। राजस्थान में एक अनुसूचित जाति के युवा को पीटकर मार दिया। किसी भी विपक्षी नेता ने जाकर नहीं पूछा। यूपी में अगर कहीं कोई घटना हुई है तो सख्ती से सख्त कार्रवाई की गई है। भाजपा सरकार में कभी यह नहीं देखा गया कि कार्रवाई किसके खिलाफ है, सीधे कार्रवाई को अंजाम दिया जाता है।
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प्रियंका गांधी के मौन व्रत के सवाल पर चुटकी लेते हुए राणा ने कहा कि वह तो पॉलिटिकल टूरिज्म पर आईं हैं। राहुल गांधी और प्रियंका गांधी ने कभी किसानों के लिए कुछ नहीं बोला। किसानों ने सर्वाधिक आत्महत्या यूपीए सरकार के दौरान ही की थी। फिर भी किसी ने कुछ नहीं कहा। कृषि विधेयक को लेकर सबसे पहला बयान राहुल गांधी ने 2013 में दिया था कि सरकार में आते ही एपीएमसी एक्ट (कृषि उपज बाजार समिति) में संशोधन करेंगे। लेकिन उनके पास साहस नहीं था, क्योंकि वह कहते कुछ हैं, करते कुछ हैं और समझते भी कुछ और ही हैं। किसानों के हित में एपीएमसी एक्ट में संशोधन का साहस प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अंदर था। इसीलिए उन्होंने फैसला लिया। आज किसान अपनी फसल को भारत में कहीं भी बेच सकता है। सभी टैक्स से किसानों को मुक्त कर दिया गया है। किसानों के बंधन तोड़ने का काम किसी ने किया है तो मोदी-योगी सरकार ने किया है। 2013 की एमएसपी को 2021 तक काफी बढ़ाया गया है। 18 हजार गांवों तक बिजली पहुंचाना, खाद्य के बंद कारखाने को चलाना, डीएपी पर सब्सिडी देने और गांव के इंफ्रास्ट्रक्चर को खड़ा करने का काम केवल मोदी सरकार ने किया है। विपक्षी नेताओं पर तंज कसते हुए कहा कि कुछ लोग कुछ कर नहीं पाए। इसीलिए जब उनका मन होता है तो वह एक दो दिन के लिए पॉलिटिकल टूरिज्म पर आते हैं। यहां आकर राजनीतिक माहौल खराब करते हैं।
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लखीमपुर खीरी प्रकरण पर उन्होंने कहा कि यूपी की कानून व्यवस्था तो देश के लिए रोल मॉडल है। राजस्थान में एक अनुसूचित जाति के युवा को पीटकर मार दिया। किसी भी विपक्षी नेता ने जाकर नहीं पूछा। यूपी में अगर कहीं कोई घटना हुई है तो सख्ती से सख्त कार्रवाई की गई है। भाजपा सरकार में कभी यह नहीं देखा गया कि कार्रवाई किसके खिलाफ है, सीधे कार्रवाई को अंजाम दिया जाता है।
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