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ग्रामीणों की सेहत व संपत्ति पर कोयले की आंच
अमर उजाला ब्यूूराे
Updated Sat, 17 Jun 2017 01:25 AM IST
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कासिमपुर पावर हाउस में 660 मेगावाट की नई यूनिट के कोल यार्ड के बगल में बाजारों को शिफ्ट करने की प्रक्रिया के साथ ही गांव वालों की सेहत और संपत्ति पर खतरा भी बढ़ गया है। मार्केट के लिए कासिमपुर परियोजना इकाई प्रबंधन की ओर से आवंटित की गई नई जगह कोल यार्ड के बगल में है।
महज दस फिट ऊंची दीवार के पीछे नब्बे फिट ऊंचाई तक कोयले की डंपिंग रहती है। क्रेेशर चलने पर कोयले की राख व्यापारियों एवं ग्रामीणों की जहां सांस रोेकेगी वहीं कोयले में लगने वाली आग से संपत्ति का खतरा भी हर समय बना रहेगा।
कासिमपुर पावर हाउस प्रबंधन की ओर से नई यूनिट की जद में आ रही शास्त्री मार्केट, मंदिर मार्केट, खोखा मार्केट को हटाने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। शास्त्री मार्केट की करीब 60 दुकानें साईं मंदिर के पास स्थानांतरित कराई जा चुकी हैं।
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सड़क के दूसरी ओर की करीब सौ से अधिक दुकानों को परियोजना प्रबंधक आरके वाही ने कोल यार्ड के बराबर में खाली जगह पर स्थानांतरित करने का निर्देश दिया है। व्यापारी इसके विरोध में हैं।
व्यापारियों का कहना है कि साईं मंदिर के आसपास भी जगह मौजूद है। अन्य सुरक्षित स्थानों पर भी जगह है, किंतु परियोजना प्रबंधन हठधर्मिता पर अड़ा है। एक माह पूर्व दुकानदारों ने इसी बात पर धरना-प्रदर्शन भी किया था।
तब भाजपा जिलाध्यक्ष देवराज सिंह एवं एसडीएम कोल पंकज वर्मा ने व्यापारियों की समस्याओं का निस्तारण कराने का भरोसा दिलाते हुए अनशन तुड़वाया था। व्यापारियों का कहना है कि सुरक्षित स्थान मुहैया नहीं कराया गया तो वह फिर आंदोलन के साथ कोर्ट का दरवाजा खटखटाएंगे। परियोजना प्रबंधन जान और संपत्ति को जोखिम में नहीं डाल सकता।
करीब पचपन साल पहले परियोजना की ओर से दस पक्की दुकानें बनवाकर दी गईं थीं। अब न तो दुकान दी जा रही है, और न ही सुरक्षित स्थान।
राजीव माहेश्वरी पक्की दुकान मालिक
दशकों पहले हमें प्लाट दिए गए थे। खुद के खर्चे से पक्की दुकानें बनवाईं। किराया भी शर्तों के साथ जमा कर रहे हैं। अब बगैर मुआवजे के असुरक्षित स्थान पर भेजने की कोशिश हो रही है। रामदत्त शर्मा, प्लाट दुकानदार
अनशन के समय तो जनप्रतिनिधि से लेकर एसडीएम तथा परियोजना अधिकारियों ने भी आश्वासन दिया था कि मांगों पर सहानुभूति पूर्वक विचार होगा। अब रवैया तानाशाही वाला है। राजीव वार्ष्णेय, प्लाट दुकानदार
कोयले की राख से कासिमपुर ही नहीं आसपास के गांव भी प्रभावित हैं। ऐसे में कोल यार्ड के पास बाजार भेजना व्यापारियों के प्रति परियोजना अधिकारियों की मानसिकता को दर्शाता है। अजय गुप्ता, प्लाट दुकानदार
हमारे पास और कोई जगह है नहीं। जो सबसे अच्छा विकल्प था वहीं हमने उन्हें दिया है। जितने लोग दुकान पाने के हकदार हैं, उनमें से 95 फीसदी लोग दुकान आवंटित करा चुके हैं। अभी तो हमें लगाई जा रही नई यूनिट के लोगों के लिए भी रहन-सहन की व्यवस्था देखनी पडे़गी।
आर के वाही, परियोजना महाप्रबंधक, कासिमपुर पावर हाउस।
महज दस फिट ऊंची दीवार के पीछे नब्बे फिट ऊंचाई तक कोयले की डंपिंग रहती है। क्रेेशर चलने पर कोयले की राख व्यापारियों एवं ग्रामीणों की जहां सांस रोेकेगी वहीं कोयले में लगने वाली आग से संपत्ति का खतरा भी हर समय बना रहेगा।
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कासिमपुर पावर हाउस प्रबंधन की ओर से नई यूनिट की जद में आ रही शास्त्री मार्केट, मंदिर मार्केट, खोखा मार्केट को हटाने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। शास्त्री मार्केट की करीब 60 दुकानें साईं मंदिर के पास स्थानांतरित कराई जा चुकी हैं।
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सड़क के दूसरी ओर की करीब सौ से अधिक दुकानों को परियोजना प्रबंधक आरके वाही ने कोल यार्ड के बराबर में खाली जगह पर स्थानांतरित करने का निर्देश दिया है। व्यापारी इसके विरोध में हैं।
व्यापारियों का कहना है कि साईं मंदिर के आसपास भी जगह मौजूद है। अन्य सुरक्षित स्थानों पर भी जगह है, किंतु परियोजना प्रबंधन हठधर्मिता पर अड़ा है। एक माह पूर्व दुकानदारों ने इसी बात पर धरना-प्रदर्शन भी किया था।
तब भाजपा जिलाध्यक्ष देवराज सिंह एवं एसडीएम कोल पंकज वर्मा ने व्यापारियों की समस्याओं का निस्तारण कराने का भरोसा दिलाते हुए अनशन तुड़वाया था। व्यापारियों का कहना है कि सुरक्षित स्थान मुहैया नहीं कराया गया तो वह फिर आंदोलन के साथ कोर्ट का दरवाजा खटखटाएंगे। परियोजना प्रबंधन जान और संपत्ति को जोखिम में नहीं डाल सकता।
करीब पचपन साल पहले परियोजना की ओर से दस पक्की दुकानें बनवाकर दी गईं थीं। अब न तो दुकान दी जा रही है, और न ही सुरक्षित स्थान।
राजीव माहेश्वरी पक्की दुकान मालिक
दशकों पहले हमें प्लाट दिए गए थे। खुद के खर्चे से पक्की दुकानें बनवाईं। किराया भी शर्तों के साथ जमा कर रहे हैं। अब बगैर मुआवजे के असुरक्षित स्थान पर भेजने की कोशिश हो रही है। रामदत्त शर्मा, प्लाट दुकानदार
अनशन के समय तो जनप्रतिनिधि से लेकर एसडीएम तथा परियोजना अधिकारियों ने भी आश्वासन दिया था कि मांगों पर सहानुभूति पूर्वक विचार होगा। अब रवैया तानाशाही वाला है। राजीव वार्ष्णेय, प्लाट दुकानदार
कोयले की राख से कासिमपुर ही नहीं आसपास के गांव भी प्रभावित हैं। ऐसे में कोल यार्ड के पास बाजार भेजना व्यापारियों के प्रति परियोजना अधिकारियों की मानसिकता को दर्शाता है। अजय गुप्ता, प्लाट दुकानदार
हमारे पास और कोई जगह है नहीं। जो सबसे अच्छा विकल्प था वहीं हमने उन्हें दिया है। जितने लोग दुकान पाने के हकदार हैं, उनमें से 95 फीसदी लोग दुकान आवंटित करा चुके हैं। अभी तो हमें लगाई जा रही नई यूनिट के लोगों के लिए भी रहन-सहन की व्यवस्था देखनी पडे़गी।
आर के वाही, परियोजना महाप्रबंधक, कासिमपुर पावर हाउस।