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पोकलैंड मशीन से पोखर की सफाई शुरू, नगर निगम अडिग

Tue, 15 Jun 2021 12:39 AM IST
Aligarh Bureau अलीगढ़ ब्यूरो
Updated Tue, 15 Jun 2021 12:39 AM IST
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Cleaning of puddles started with Pokeland machine
माहौर वैश्य विद्या प्रचार ट्रस्ट के विरोध के बावजूद क्वार्सी थाना क्षेत्र के रावणटीला-सुरेंद्रनगर स्थित खाली जमीन-पोखर- की पोकलैंड मशीन से सफाई शुरू हो गई है। नगर निगम के अधिकारियों ने भी इस मुद्दे पर अडिग हैं। इससे ट्रस्ट एवं नगर निगम के बीच का टकराव बढ़ने की आशंका है। ट्रस्ट के पदाधिकारी आर-पार की लड़ाई लड़ने की तैयारी कर रहे हैं।
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रविवार को रावणटीला स्थित पोखर की सफाई करने पहुंचे नगर निगम कर्मियों को महौर वैश्य विद्या प्रचार ट्रस्ट के पदाधिकारियों के विरोध का सामना करना पड़ा था। इसको लेकर काफी हंगामा हुआ था। सोमवार को ट्रस्ट एवं वैश्य समाज के लोग सांसद सतीश गौतम एवं अपर नगर आयुक्त अरुण कुमार गुप्त से मिले। हालांकि इसका कोई नतीजा नहीं निकला। नगर निगम में बातचीत के बाद ट्रस्ट के पदाधिकारियों के तेवर तल्ख हैं। नगर निगम के अधिकारी किसी भी कीमत पर सफाई कार्य रोकने को तैयार नहीं है।
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आक्रोश के साथ नगर निगम से लौटे ट्रस्ट के पदाधिकारी
ट्रस्ट के पदाधिकारी किसी भी कीमत पर विवादित स्थल पर सफाई एवं खुदाई के पक्ष में नहीं हैं। अपर नगर आयुक्त अरुण कुमार गुप्त से मुलाकात के दौरान भी वैश्य समाज के लोगों ने यहीं समझाने का प्रयास किया। लेकिन अपर नगर आयुक्त किसी भी कीमत पर सफाई कार्य रोकने को तैयार नहीं है। उन्होंने दो दिन में जमीन से संबंधित दस्तावेज दिखाने का समय दिया है। नगर निगम का अडिग रूख देख ट्रस्ट के पदाधिकारी गुस्से में वहां से लौटे हैं।
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अब आर-पार की लड़ाई की तैयारी
श्री महाउरु पूर्व माध्यमिक विद्यालय में ट्रस्ट के पदाधिकारियों ने आर-पार की लड़ाई का एलान किया है। उनका कहना है कि 2011 में राजनाथ सिंह ने जिस भूमि पर कन्या महाविद्यालय का शिलान्यास किया था। आज उसे पोखर में तब्दील किया जा रहा है। जमीन 1966 से विद्यालय के नाम है। अभिलेखों में दाखिल-खारिज हुआ है। खाली भूमि ग्राम कूकडीखेड़ा तहसील कोल गोटा संख्या 11 एवं 13 स्कूल की संपत्ति है, जो राजस्व अभिलेखों में दर्ज है। इससे संबंधित दस्तावेज एवं नक्शा उनके पास है। यह मामला अभी न्यायालय में विचाराधीन है। नगर निगम के अधिकारी जमीन पर 8-10 फीट गहरे गड्ढे नहीं खोद सकते। आरोप है कि जन प्रतिनिधियों के दबाव में नगर निगम जमीन हड़पने की तैयारी में है। पदाधिकारियों का यह भी आरोप है कि नगर निगम में वार्ता के दौरान अधिकारियों ने उनके साथ अभद्र व्यवहार किया। नगर निगम में कोल विधान सभा क्षेत्र के विधायक अनिल पाराशर एवं एमएलसी मानवेंद्र प्रताप सिंह के परिजन भी अधिकारियों पर दबाव बनाने पहुंच गए थे। ट्रस्ट के पदाधिकारियों ने कहा कि इसकी शिकायत मुख्यमंत्री से करेंगे। इस अवसर पर ट्रस्ट के अध्यक्ष महेंद्र कुमार गुप्ता, सचिव जगदीश महाजन, पवन गुप्ता, अजय गुप्ता, प्रदीप गांधी, संजीव गुपता, पीके गुप्ता, हरि गुप्ता, प्रदीप गंगा, अनिल सेंगर आदि मौजूद थे।
अखिलेश है विकल्प
कुछ लोगों ने ‘भाजपा में क्लेश है, अखिलेश विकल्प है’ के नारे भी लगा दिए। वहीं कुछ लोगों ने कहा कि भाजपा पर जितना हक जन प्रतिनिधियों का है, उतना ही हक कार्यकर्ता का भी है। वे लोग इसके लिए जोरदार लड़ाई लड़ेंगे।
विवादित स्थल पर पहुंचे सांसद
सांसद सतीश गौतम भी विवादित स्थल पर पहुंचे। उन्होंने कहा कि बारिश का समय है। आसपास के मोहल्ले में जलभराव होता है। लोगों के घरों में पानी प्रवेश कर जाता है। इसलिए पोखर की सफाई जरूरी है। आपस में जो मतभेद है, वह दूर हो जाएगा। न्यायालय में मामला विचाराधीन है। फैसला आने के बाद पूरी स्थिति स्पष्ट हो जाएगी।
अपर नगर आयुक्त अरुण कुमार गुप्त का कहना है कि पोखर में हम सफाई करा रहे हैं, निर्माण नहीं। सफाई हम कही भी करा सकते हैं। ट्रस्ट के पदाधिकारियों ने दस्तावेज दिखाने के लिए दो दिन का समय मांगा है। वह निर्धारित समय में दस्तावेज दिखाएं। नगर निगम भी तहसील के जरिए दस्तावेज निकलवा रहा है। न्यायालय के समक्ष अपना पक्ष रखेंगे।
उन्होंने कहा कि गाटा संख्या 11 की भूमि उनकी नहीं है। पुराने दस्तावेजों में वह जगह पोखर दर्ज है। पोखर का मतलब पोखर होता है, उसके स्वरूप को नहीं बदला जा सकता। धोखाधड़ी कर पोखर हटवा दिया गया है। इस दिशा में काम किया जा रहा है। पोखर ढकने के कारण लोगों के घरों में पानी प्रवेश कर जाता है। इसलिए सफाई करा रहे हैं ताकि गलियों और लोगों के घरों में जलभराव न हो। हम किसी जनप्रतिनिधि के दबाव में काम नहीं कर रहे हैं।

पोखर प्रकरण में हम नहीं नगर निगम का रिकार्ड बोलेगा। नगर निगम के दस्तावेज में विवादित भूमि पोखर के रूप में दर्ज है। पोखर के पट जाने से कई क्षेत्रों में जलभराव होता है। इससे लोग प्रभावित होते हैं। हमारे यहां घरों में जलभराव होता है। पोखर की सफाई से जलभराव की समस्या से मुक्ति मिलेगी।
- डॉ. मानवेंद्र प्रताप सिंह, एमएलसी
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