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शहर विधानसभा क्षेत्र : तीन बार लगातार जीतकर नवमान ने बनाया था कीर्तिमान
Sun, 07 Nov 2021 12:13 AM IST
राजेश सिंह
न्यूूज डेस्क, अमर उजाला, अलीगढ़।
न्यूूज डेस्क, अमर उजाला, अलीगढ़।
Published by: राजेश सिंह
Updated Sun, 07 Nov 2021 12:13 AM IST
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विधानसभा चुनाव 2022 की तैयारियां हो रही हैं। आज सात नवंबर रविवार है। चुनाव आयोग के निर्देश पर जिले के सभी 3117 बूथों पर बीएलओ आज विशेष शिविर लगा कर वोटर लिस्ट दुरुस्त करेंगे। चुनावी हलचल के बीच अभी से हार-जीत का आंकलन शुरू हो गया है। चाय के होटलों से लेकर शोरूम, बाजार और कारखानों तक हर तरफ एक ही बहस जारी है.. उत्तर प्रदेश की अगली सरकार कौन बनाएगा..? इस बहस के साथ ही विधानसभावार भी चर्चाएं जोर पकड़ रही हैं।
अबकी बार किस पार्टी से किसे टिकट मिलेगा..? किसका टिकट कटेगा किसका बचेगा और कौन जीतेगा..? इस सीट के अतीत पर ध्यान दें तो यहां से कांग्रेस तीन बार जीती। आपीआई, जनता पार्टी, जनता पार्टी सेक्यूलर एक-एक बार चुनाव जीती। इसके बाद सपा तीन बार जीती, लेकिन जनसंघ और भाजपा के उम्मीदवार कुल छह बार चुनाव जीते। इस सीट पर तीन बार लगातार जीतने का कीर्तिमान भाजपा के केके नवमान के नाम पर दर्ज है।
तालों, हार्डवेयर, मूर्तियां, इलेक्ट्रिक सामान की सबसे बड़ी उत्पादक शहर विधानसभा औद्योगिक इलाका है। जहां हजारों कारखाने, एक्सपोर्ट यूनिट और थोक से लेकर फुटकर तक सभी बड़े बाजार आते हैं। यहां उद्योगपतियों, उद्यमियों और कामगारों की सबसे बड़ी तादाद है। विधानसभा की मिश्रित आबादी भी इसकी बड़ी पहचान बन चुकी है। जिसमें हिंदू, मुसलमान, सिख, ईसाई, जैन, बौद्ध सभी धर्मों के लोग रहते हैं, लेकिन हिंदू मुसलमान की तादाद सर्वाधिक है। जिसका सीधा असर चुनाव नतीजों पर साफ दिखता है।
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आजादी के बाद से अब तक हुए 16 विधानसभा चुनावों में सबसे पहली बार कांग्रेस ही यहां जीती थी। इसके बाद दो बार और कांग्रेस उम्मीदवार जीते। इसी तरह से एक एक बार आरपीआई, जनता पार्टी सेक्यूलर और जनता पार्टी के उम्मीदवार जीते, जबकि तीन बार सपा भी यहां से चुनाव जीती है। जनसंघ और भाजपा उम्मीदवार यहां से छह बार विजयी रहे।
इस सीट पर अब तक कृष्णकुमार नवमान (केके नवमान) ही ऐसे नेता रहे हैं, जो लगातार तीन बार विधायक निर्वाचित हुए हैं। वर्ष 1989, 1991 और 1993 में श्रीराम मंदिर आंदोलन के दौरान वह लगातार विधायक का चुनाव जीतते रहे। सपा वर्ष 2007 और 2012 में दो बार लगातार चुनाव जीती, लेकिन दोनों बार उम्मीदवार बदले हुए थे। वर्ष 2007 में जमीरउल्लाह और वर्ष 2012 में जफर आलम सपा के टिकट पर इस सीट से चुनाव जीते। इससे पहले वर्ष 1996 में अब्दुल खालिक भी सपा से चुनाव जीते थे।
इस तरह सपा भी तीन बार यहां जीती है। कुल मिला कर मिश्रित आबादी की राजनीति वाली इस विधानसभा पर कांग्रेस चार बार और सपा तीन बार जीती है। आरपीआई, जनता पार्टी और जनता पार्टी सेक्यूलर एक-एक बार विजयी हुए। वहीं सत्तारूढ़ भाजपा और उससे पहले जनसंघ के उम्मीदवार यहां से छह बार चुनाव जीतने में सफल रहे हैं। वर्तमान में यहां से भाजपा के संजीव राजा विधायक हैं।
शहर विधानसभा के चुनाव नतीजे
1957 में कांग्रेस से अनंतराम वर्मा
1962 में आरपीआई से अब्दुल वजीर खां
1967 में जनसंघ से इंद्रपाल सिंह
1969 में कांग्रेस से अहदम लूथ खां
1974 में जनसंघ से इंद्रपाल सिंह
1976 में जनता पार्टी से मौजिज अली बेग
1980 में जनता पार्टी सेक्यूलर से ख्वाजा हलीम
1985 में कांग्रेस से कैप्टन बल्देव सिंह
1989 में भाजपा से केके नवमान
1991 में भाजपा से केके नवमान
1993 में भाजपा से केके नवमान
1996 में सपा से अब्दुल खालिक
2002 में कांग्रेस से विवेक बंसल
2007 में सपा से हाजी जमीरउल्लाह
2012 में सपा से जफर आलम
2017 में भाजपा से संजीव राजा
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अबकी बार किस पार्टी से किसे टिकट मिलेगा..? किसका टिकट कटेगा किसका बचेगा और कौन जीतेगा..? इस सीट के अतीत पर ध्यान दें तो यहां से कांग्रेस तीन बार जीती। आपीआई, जनता पार्टी, जनता पार्टी सेक्यूलर एक-एक बार चुनाव जीती। इसके बाद सपा तीन बार जीती, लेकिन जनसंघ और भाजपा के उम्मीदवार कुल छह बार चुनाव जीते। इस सीट पर तीन बार लगातार जीतने का कीर्तिमान भाजपा के केके नवमान के नाम पर दर्ज है।
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तालों, हार्डवेयर, मूर्तियां, इलेक्ट्रिक सामान की सबसे बड़ी उत्पादक शहर विधानसभा औद्योगिक इलाका है। जहां हजारों कारखाने, एक्सपोर्ट यूनिट और थोक से लेकर फुटकर तक सभी बड़े बाजार आते हैं। यहां उद्योगपतियों, उद्यमियों और कामगारों की सबसे बड़ी तादाद है। विधानसभा की मिश्रित आबादी भी इसकी बड़ी पहचान बन चुकी है। जिसमें हिंदू, मुसलमान, सिख, ईसाई, जैन, बौद्ध सभी धर्मों के लोग रहते हैं, लेकिन हिंदू मुसलमान की तादाद सर्वाधिक है। जिसका सीधा असर चुनाव नतीजों पर साफ दिखता है।
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आजादी के बाद से अब तक हुए 16 विधानसभा चुनावों में सबसे पहली बार कांग्रेस ही यहां जीती थी। इसके बाद दो बार और कांग्रेस उम्मीदवार जीते। इसी तरह से एक एक बार आरपीआई, जनता पार्टी सेक्यूलर और जनता पार्टी के उम्मीदवार जीते, जबकि तीन बार सपा भी यहां से चुनाव जीती है। जनसंघ और भाजपा उम्मीदवार यहां से छह बार विजयी रहे।
इस सीट पर अब तक कृष्णकुमार नवमान (केके नवमान) ही ऐसे नेता रहे हैं, जो लगातार तीन बार विधायक निर्वाचित हुए हैं। वर्ष 1989, 1991 और 1993 में श्रीराम मंदिर आंदोलन के दौरान वह लगातार विधायक का चुनाव जीतते रहे। सपा वर्ष 2007 और 2012 में दो बार लगातार चुनाव जीती, लेकिन दोनों बार उम्मीदवार बदले हुए थे। वर्ष 2007 में जमीरउल्लाह और वर्ष 2012 में जफर आलम सपा के टिकट पर इस सीट से चुनाव जीते। इससे पहले वर्ष 1996 में अब्दुल खालिक भी सपा से चुनाव जीते थे।
इस तरह सपा भी तीन बार यहां जीती है। कुल मिला कर मिश्रित आबादी की राजनीति वाली इस विधानसभा पर कांग्रेस चार बार और सपा तीन बार जीती है। आरपीआई, जनता पार्टी और जनता पार्टी सेक्यूलर एक-एक बार विजयी हुए। वहीं सत्तारूढ़ भाजपा और उससे पहले जनसंघ के उम्मीदवार यहां से छह बार चुनाव जीतने में सफल रहे हैं। वर्तमान में यहां से भाजपा के संजीव राजा विधायक हैं।
शहर विधानसभा के चुनाव नतीजे
1957 में कांग्रेस से अनंतराम वर्मा
1962 में आरपीआई से अब्दुल वजीर खां
1967 में जनसंघ से इंद्रपाल सिंह
1969 में कांग्रेस से अहदम लूथ खां
1974 में जनसंघ से इंद्रपाल सिंह
1976 में जनता पार्टी से मौजिज अली बेग
1980 में जनता पार्टी सेक्यूलर से ख्वाजा हलीम
1985 में कांग्रेस से कैप्टन बल्देव सिंह
1989 में भाजपा से केके नवमान
1991 में भाजपा से केके नवमान
1993 में भाजपा से केके नवमान
1996 में सपा से अब्दुल खालिक
2002 में कांग्रेस से विवेक बंसल
2007 में सपा से हाजी जमीरउल्लाह
2012 में सपा से जफर आलम
2017 में भाजपा से संजीव राजा
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