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अलीगढ़ : नए शैक्षिक सत्र में पुरानी किताबों से पढ़ रहे बच्चे
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दुबे का पड़ाव स्थित प्राथमिक कन्या पाठशाला 32 में पुरानी कितोबों से पढ़ते बच्चे।
- फोटो : CITY OFFICE
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बेसिक शिक्षा विभाग के विद्यालयों में नए शैक्षिक सत्र में भी पुरानी किताबों से बच्चे पढ़ाई कर रहे हैं। नियमत: उन्हें नई किताबें एडमिशन के समय ही मिल जानी चाहिए थीं लेकिन शासन स्तर से टेंडर प्रक्रिया में देरी होने से बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है। बेसिक शिक्षा अधिकारी का कहना है कि जल्द ही नई किताबें विद्यालयों में भेजी जाएंगी।
अप्रैल से नया शैक्षिक सत्र शुरू हो गया है। डेढ़ महीने गुजर गए हैं, लेकिन बच्चों को नई किताबें नहीं मिल पाई हैं। ऐसी स्थिति में इधर-उधर से मांगकर बच्चों ने पुरानी किताबें ले ली हैं, जबकि कइयों के पास पुरानी किताबें भी नहीं है। वह सहपाठी की किताबों से ही पढ़ाई कर रहे हैं। शनिवार को शहर के दुबे का पड़ाव स्थित प्राथमिक पाठशाला कन्या नंबर 25, 15 व 2, प्राथमिक पाठशाला नंबर 32, बालक पाठशाला नंबर 39, 44, 41 में बच्चे पुरानी किताबों से बच्चे पढ़ते मिले। शिक्षकाें के सामने भी मजबूरी है। वह भी पुरानी किताबों से बच्चों को पढ़ा रहे हैं।
ये है स्थिति
- कुल 211 विद्यालय
- 1386 प्राथमिक विद्यालय
- 354 उच्च प्राथमिक
- 375 कंपोजिट विद्यालय
- लगभग 2 लाख 53 हजार विद्यार्थी
मैडम कहती हैं, जल्द आएंगी किताबें
नई किताबें अब तक नहीं मिल पाई हैं। पुरानी किताबों से पढ़ाई कर रही हूं। मैडम कहती हैं कि किताबें जल्द आ जाएंगी। - दिव्यांशी, कक्षा 3
पुरानी किताबों से पढ़ाई हो रही है। कक्षा दो में पढ़ने वाली रिश्तेदार अब तीन में जा चुकी हैं। यह किताबें उन्हीं की है। - प्रीति, कक्षा 2
जब से विद्यालय खुला है, तब से पुरानी किताबों से ही पढ़ाई कर रहा हूं। मैडम, कह रही हैं कि नई किताबें जल्द मिलेंगी। - रितिक, कक्षा 4
मैं पुरानी किताबों से पढ़ाई कर रही हूं, ये किताबें कक्षा 5 में पढ़ चुकी छात्रा की हैं। नई किताबों के आने का इंतजार है। - योगिता, कक्षा 5
बात सही है कि नई किताबों के आने में देरी हुई है। नई किताबों को लेकर शासन में टेंडर प्रक्रिया पूर्ण हो चुकी है। जल्द ही विद्यालयों में नई किताबें आएंगी। - सतेंद्र कुमार, बीएसए
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अप्रैल से नया शैक्षिक सत्र शुरू हो गया है। डेढ़ महीने गुजर गए हैं, लेकिन बच्चों को नई किताबें नहीं मिल पाई हैं। ऐसी स्थिति में इधर-उधर से मांगकर बच्चों ने पुरानी किताबें ले ली हैं, जबकि कइयों के पास पुरानी किताबें भी नहीं है। वह सहपाठी की किताबों से ही पढ़ाई कर रहे हैं। शनिवार को शहर के दुबे का पड़ाव स्थित प्राथमिक पाठशाला कन्या नंबर 25, 15 व 2, प्राथमिक पाठशाला नंबर 32, बालक पाठशाला नंबर 39, 44, 41 में बच्चे पुरानी किताबों से बच्चे पढ़ते मिले। शिक्षकाें के सामने भी मजबूरी है। वह भी पुरानी किताबों से बच्चों को पढ़ा रहे हैं।
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ये है स्थिति
- कुल 211 विद्यालय
- 1386 प्राथमिक विद्यालय
- 354 उच्च प्राथमिक
- 375 कंपोजिट विद्यालय
- लगभग 2 लाख 53 हजार विद्यार्थी
मैडम कहती हैं, जल्द आएंगी किताबें
नई किताबें अब तक नहीं मिल पाई हैं। पुरानी किताबों से पढ़ाई कर रही हूं। मैडम कहती हैं कि किताबें जल्द आ जाएंगी। - दिव्यांशी, कक्षा 3
पुरानी किताबों से पढ़ाई हो रही है। कक्षा दो में पढ़ने वाली रिश्तेदार अब तीन में जा चुकी हैं। यह किताबें उन्हीं की है। - प्रीति, कक्षा 2
जब से विद्यालय खुला है, तब से पुरानी किताबों से ही पढ़ाई कर रहा हूं। मैडम, कह रही हैं कि नई किताबें जल्द मिलेंगी। - रितिक, कक्षा 4
मैं पुरानी किताबों से पढ़ाई कर रही हूं, ये किताबें कक्षा 5 में पढ़ चुकी छात्रा की हैं। नई किताबों के आने का इंतजार है। - योगिता, कक्षा 5
बात सही है कि नई किताबों के आने में देरी हुई है। नई किताबों को लेकर शासन में टेंडर प्रक्रिया पूर्ण हो चुकी है। जल्द ही विद्यालयों में नई किताबें आएंगी। - सतेंद्र कुमार, बीएसए
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