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अभी संभल जाएं: मोबाइल ज्यादा इस्तेमाल, सूख रहा बच्चों की आंखों का पानी, कम हो रही रोशनी, रेटिना हो रही टेढ़ी

Fri, 16 May 2025 03:42 PM IST
चमन शर्मा राहुल श्रोत्रिय, अमर उजाला, अलीगढ़
राहुल श्रोत्रिय, अमर उजाला, अलीगढ़ Published by: चमन शर्मा Updated Fri, 16 May 2025 03:42 PM IST
सार

अलीगढ़ के  गांधी नेत्र चिकित्सालय में 3000 बच्चों पर हुए शोध हुआ। अध्ययन में पता चला है कि मोबाइल, टीवी, ऑनलाइन क्लास, स्मार्ट वॉच, वीडियो गेम और अन्य इलेक्ट्रॉनिक गेजेट्स के इस्तेमाल से आंखों की रोशनी कम हो रही है।

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Children eyes dry up due to excessive use of mobile phones
बिना पलक झपके मोबाइल देखती बच्ची - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

आंखों का पानी सूख रहा है। रोशनी कम हो रही है। आंखों की ब्लिंकिंग रेट (पलक झपकना) असामान्य हो रहा है। आंखों की रेटिना टेढ़ी हो रही है। मोबाइल और लैपटॉप के स्क्रीन पर लगातार देखते रहने से बच्चों की आंखों में ये सारे रोग हो रहे हैं। गांधी नेत्र चिकित्सालय में 3000 बच्चों पर हुए शोध में यह हालात सामने आए हैं।

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तीन हजार बच्चों पर अध्ययन के लिए तीन आयु वर्ग शामिल किए गए। पहला तीन से पांच वर्ष, दूसरा पांच से दस और तीसरा 10 से 12 वर्ष आयु वर्ग का है। इन बच्चों के अध्ययन में पता चला है कि मोबाइल, टीवी, ऑनलाइन क्लास, स्मार्ट वॉच, वीडियो गेम और अन्य इलेक्ट्रॉनिक गेजेट्स के इस्तेमाल से आंखों की रोशनी कम हो रही है। शोध में पता चला है कि करीब 70 फीसदी शहरी बच्चे इससे ज्यादा परेशान हैं।

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रोजाना 40 से अधिक बच्चे आंखों का पानी सूखने, धुंधलापन और ब्लिंकिंग रेट असामान्य होने की समस्या लेकर आ रहे हैं। आंखों की रोशनी कम होने पर बच्चों को लगातार चश्मा लग रहा है। अस्पताल में तीन हजार बच्चों पर शोध किया जा रहा है, जिनमें 70 फीसदी शहरी बच्चे आंखों की समस्या से ज्यादा परेशान हैं। परिजन जितना संभव हो सके अपने बच्चों को मोबाइल से दूर रखें तो बेहतर होगा।-डॉ. अजय कुमार सक्सेना, नेत्र चिकित्साधिकारी, गांधी नेत्र चिकित्सालय।

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ऐसे करते हैं समस्या का पता

आंखों की परेशानी का पता लगाने में टीयर फिल्म (आंसू फिल्म) विश्लेषण महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। टीयर फिल्म, आंखों की सतह पर एक पतली परत होती है, जो इसे नम और सुरक्षित रखने में मदद करती है। यदि यह फिल्म सही ढंग से काम नहीं करती है, तो इससे आंखों में सूखापन, धुंधलापन, खुजली और अन्य समस्याएं हो सकती हैं।
गांधी नेत्र चिकित्सालय में बच्ची की आंखों की जांच करते डॉ. अजय कुमार सक्सेना
आठ से नौ घंटे तक स्क्रीन पर समय बिता रहे बच्चे
नेत्र चिकित्सकों में मुताबिक अगर बच्चा चार घंटे से ज्यादा स्क्रीन का इस्तेमाल करता है तो आंखों का पानी सूखने लगता है। अधिकतर बच्चे ऐसे आ रहे हैं, जो मोबाइल, टीवी व वीडियो गेम आदि गेजेट्स के इस्तेमाल पर आठ से नौ घंटे बिता रहे हैं। जबसे स्कूलों की छुट्टियां हुईं हैं तब से यह समस्या और बढ़ रही है।

70 फीसदी युवाओं की आंखों पर दिखेगा चश्मा
शोध में शामिल नेत्र चिकित्सकों के मुताबिक अगर इसी तरह चलता रहा तो आने वाले 25 सालों में शहर के 70 फीसदी युवाओं की आंखों की रोशनी कम होगी और आंखें कई तरह के रोगों की चपेट में होंगी। इनकी आंखों पर चश्मा लगा होगा।

सलाह

  • बच्चों को मोबाइल और टीवी से दूर रखने का प्रयास करें।
  • बच्चों को बाहर खेलने दें।
  • समस्या होने पर नेत्र चिकित्सक से परामर्श लें।
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