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बाढ़ आपदा प्रबंधन पर मुख्यमंत्री ने पूछी तैयारियां
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मुख्यमंत्री के साथ वीडियो कांफ्रेंसिंग करते जिलाधिकारी इंद्र विक्रम सिंह, एडीएम वित्त विधान जा
- फोटो : CITY OFFICE
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बुधवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए अफसरों से जनपद में बाढ़ आपदा प्रबंधन के लिए अब तक की गई तैयारियों की जानकारी ली। मुख्यमंत्री ने कहा कि बाढ़ के चलते होने वाली जन-धन की हानि की रोकथाम के लिए बेहतर समन्वय, प्रबंधन, बाढ़ की स्थिति में लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने को हरसंभव उपाय अपनाए जाएं। कलेक्ट्रेट स्थित एनआईसी भवन में बाढ़ स्टीयरिंग ग्रुप की बैठक में डीएम इंद्र विक्रम सिंह समेत तमाम अफसर मौजूद रहे।
डीएम ने बताया कि अतरौली एवं खैर तहसील गंगा एवं यमुना नदी से प्रभावित रहती हैं। तहसील अतरौली के 13 गांव एवं तहसील खैर के 12 गांव बाढ़ से प्रभावित होते हैं। दोनों नदियों के जलस्तर की सतत मॉनीटरिंग की जा रही है। प्रभावित क्षेत्रों में आपदा प्रबंधन टीमों को सक्रिय रहने का निर्देश दिया गया है। बाढ़ आने पर आपदा प्रबंधन मित्र, सिविल डिफेंस के स्वयं सेवकों की आवश्यकतानुसार सहायता भी ली जाएगी।
डीएम ने अधीनस्थों को निर्देशित किया कि अति संवेदनशील और संवेदनशील क्षेत्रों में बाढ़ की आपात स्थिति के लिए खान-पान, पीड़ितों के रहन-सहन, पर्याप्त प्रकाश व्यवस्था एवं आवश्यक उपकरणों का समुचित प्रबंध कर लिया जाए। सभी बाढ़ सुरक्षा समितियों को सक्रिय कर दिया गया है। तटबंधों के निरीक्षण का निर्देश दिया। कहा कि सिंचाई एवं जल संसाधन, गृह, चिकित्सा एवं स्वास्थ्य, सिंचाई एवं जल संसाधन, खाद्य एवं रसद, राजस्व एवं राहत कृषि, राज्य आपदा प्रबंधन के बीच बेहतर समन्वय होना चाहिए।
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डीएम ने बताया कि अतरौली एवं खैर तहसील गंगा एवं यमुना नदी से प्रभावित रहती हैं। तहसील अतरौली के 13 गांव एवं तहसील खैर के 12 गांव बाढ़ से प्रभावित होते हैं। दोनों नदियों के जलस्तर की सतत मॉनीटरिंग की जा रही है। प्रभावित क्षेत्रों में आपदा प्रबंधन टीमों को सक्रिय रहने का निर्देश दिया गया है। बाढ़ आने पर आपदा प्रबंधन मित्र, सिविल डिफेंस के स्वयं सेवकों की आवश्यकतानुसार सहायता भी ली जाएगी।
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डीएम ने अधीनस्थों को निर्देशित किया कि अति संवेदनशील और संवेदनशील क्षेत्रों में बाढ़ की आपात स्थिति के लिए खान-पान, पीड़ितों के रहन-सहन, पर्याप्त प्रकाश व्यवस्था एवं आवश्यक उपकरणों का समुचित प्रबंध कर लिया जाए। सभी बाढ़ सुरक्षा समितियों को सक्रिय कर दिया गया है। तटबंधों के निरीक्षण का निर्देश दिया। कहा कि सिंचाई एवं जल संसाधन, गृह, चिकित्सा एवं स्वास्थ्य, सिंचाई एवं जल संसाधन, खाद्य एवं रसद, राजस्व एवं राहत कृषि, राज्य आपदा प्रबंधन के बीच बेहतर समन्वय होना चाहिए।
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