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Kargil Vijay Diwas: 20 वर्ष की उम्र में हो गए प्रवीन कुमार बलिदान, दो साल दो दिन में दीं न भूलने वाली सेवाएं

Fri, 26 Jul 2024 02:21 AM IST
चमन शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, अलीगढ़
अमर उजाला नेटवर्क, अलीगढ़ Published by: चमन शर्मा Updated Fri, 26 Jul 2024 02:21 AM IST
सार

प्रवीन कुमार 24 जून 1997 को सेना में भर्ती हुए। 30 अप्रैल 1999 को अतरौली के गांव गहतौली निर्मल निवासी पिंकी चौधरी से उनकी शादी हुई और 26 जून 1999 में वह बलिदान हो गए। चार भाइयों में दूसरे प्रवीन की पत्नी पिंकी की शादी कुछ समय बाद उनके छोटे भाई अर्जुन सिंह के साथ कर दी गई थी। 

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Chharra Praveen Kumar sacrificed his life at the age of 20
प्रवीन कुमार का स्मारक - फोटो : संवाद

विस्तार

थाना छर्रा के गांव पुरैनी निवासी प्रवीन कुमार भी कारगिल युद्ध में बलिदान देने वाले जांबाजों में शुमार हैं। महज 20 वर्ष की उम्र में सेना में भर्ती हुए प्रवीन ने दो वर्ष 2 दिन में ही अपनी कभी न भूलने वाली सेवाएं दीं। 

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उनके 80 वर्षीय पिता रिटायर्ड सूबेदार देवकरन सिंह व मां 78 वर्षीय मां विरमा देवी ने बताया कि परिवार में उनके पिता भगवंत सिंह एवं चाचा कोठी सिंह सहित गांव के ही अन्य लोगों ने प्रथम विश्व युद्ध में हिस्सा लिया था। इसके बाद उन्होंने सीआरपीएफ में नौकरी की। प्रवीन कुमार 24 जून 1997 को सेना में भर्ती हुए। 30 अप्रैल 1999 को अतरौली के गांव गहतौली निर्मल निवासी पिंकी चौधरी से उनकी शादी हुई और 26 जून 1999 में वह बलिदान हो गए। चार भाइयों में दूसरे प्रवीन की पत्नी पिंकी की शादी कुछ समय बाद उनके छोटे भाई अर्जुन सिंह के साथ कर दी गई थी। 
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परिजनों ने खुद बनवाया स्मारक
पिता देवकरन सिंह ने बताया उन्होंने खुद ही बेटे की याद में स्मारक का निर्माण कराया। साफ-सफाई भी खुद ही करते हैं। प्रशासन ने सड़क, और सरकारी स्कूल को बलिदानी का नाम देने का वादा किया, लेकिन कुछ नहीं हुआ। सरकारी अस्पताल, खेल मैदान एवं विद्यालय के वादे भी अधूरे हैं। प्रवीन के छोटे भाई अर्जुन सिंह ने बताया कि आर्मी ने अपना वादा निभाते हुए सबसे छोटे भाई विशन चौधरी को वर्ष 2001 में सेना में भर्ती किया। वह उसी रेजिमेंट में सूबेदार के पद पर तैनात हैं। एटा में बलिदानी की पत्नी पिंकी चौधरी को गैस एजेंसी मिली है। 
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विजय दिवस पर एकत्र होंगे रिटायर्ड आर्मी अफसर
देवकरन सिंह ने बताया कि 26 जुलाई को रिटायर्ड आर्मी अफसर एकत्रित होगें। ध्वजारोहण करने के साथ शहीद को श्रृद्धासुमन अर्पित करेंगे।ग्राम पंचायत सचिव सोमप्रकाश ने बताया कि एक-दो बार स्मारक की सफाई कराई गई थी। परिजन खुद से ही स्मारक की सफाई करते हैं। 

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