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विश्व मलेरिया दिवस : मच्छरों पर रसायन बेअसर, विकसित कर रहे हैं प्रतिरोधक क्षमता

Mon, 25 Apr 2022 01:42 AM IST
Aligarh Bureau अलीगढ़ ब्यूरो
Updated Mon, 25 Apr 2022 01:42 AM IST
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Chemicals are neutralized on mosquitoes, developing immunity
डॉ राहुल कुलश्रेष्ठ - फोटो : CITY OFFICE
ये मच्छर भी कम जिद्दी नहीं है। इनको मारने के लिए कई तरह के रसायन तैयार किए लेकिन यह धीरे-धीरे इन रसायनों के खिलाफ प्रतिरोधक क्षमता विकसित कर अपना बचाव कर लेते हैं। जलभराव एवं गंदगी की वजह से इनकी तादाद लगातार बढ़ती जा रही है। हर साल बड़ी संख्या में लोग मलेरिया सहित मच्छर जनित बीमारियों की चपेट में आकर जान गंवाते हैं।
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मलेरिया बुखार संक्रामक होता है, जो मादा मच्छर एनाफिलीज के काटने से होता है। जनपद की बात करें तो वर्ष 2022 के तीन महीने में मलेरिया के 13 मरीज सामने आ चुके हैं। पिछले पांच साल के सरकारी आंकड़ों पर नजर दौड़ाए तो वर्ष 2021 में 192, 2020 में 228, 2019 में 648 एवं वर्ष 2018 में 758 मलेरिया के रोगी सामने आए थे। यह आंकड़ा सरकारी है। निजी अस्पतालों एवं लैब में पहुंचे मरीजों की संख्या इसमें शामिल नहीं है। सरकारी रिकार्ड में मलेरिया या मच्छर जनित बीमारियों से मौत रिकार्ड नहीं है।
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प्रतिरोधक क्षमता विकसित कर लेते हैं मच्छर : प्रो. हिफजुर
एएमयू के जंतु विज्ञान विभाग के वैज्ञानिक प्रो. हिफजुर रहमान सिद्दीकी कहते हैं कि अत्यधिक रसायनों के प्रयोग से मच्छरों की प्रतिरोधक क्षमता बढ़ गई है। बैक्टीरिया के साथ भी ऐसा होता है। स्वास्थ्य विभाग के मंडलीय सर्विलांस अधिकारी डॉ. देवेंद्र वार्ष्णेय ने बताया कि जलभराव एवं गंदगी रहने पर मच्छरों की तादाद बढ़ती जाएगी। एक मादा मच्छर अपने जीवनकाल में 300 अंडे देती है। डॉ. देवेंद्र कहते हैं कि परिस्थितियों के अनुसार मच्छर भी अपनी आदत बदल देते हैं।
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मच्छर से बचाव के लिए हर महीने 35 लाख रुपये फूंक देते हैं लोग
मच्छरों से बचाव के लिए लोग तरह-तरह के उत्पाद का इस्तेमाल करते हैं। लिक्विड, क्वाइल, अगरबत्ती, रसायन और त्वचा पर लगाने वाली क्रीम आदि का इस्तेमाल आम है। ब्रांडेड कंपनियों के उत्पाद के थोक व्यापारी त्रिलोकी वार्ष्णेय कहते हैं कि जनपद में सभी कंपनियों का मिलाकर अनुमानित तौर पर 35 लाख रुपये से अधिक का कारोबार है।
दिन में काटते हैं मलेरिया के मच्छर : डीएमओ
जिला मलेरिया अधिकारी डॉ. राहुल कुलश्रेष्ठ ने कहना है कि मलेरिया का मच्छर सामान्यत: शाम और सुबह के बीच में काटता है। अगर किसी स्वस्थ व्यक्ति को संक्रमित मच्छर काटता है तो वह स्वयं तो संक्रमित होगा ही, दूसरे को भी संक्रमित कर सकता है। मच्छर के काटने के बाद इसका परजीवी लीवर के जरिए लाल रक्त कोशिकाओं तक पहुंचता है और संक्रमण पूरे शरीर में फैलने लगता है।

इन रसायनों का प्रयोग मच्छरों को मारने के लिए होता है
- डीडीटी, मेलाथियान पाउडर, सिंथेटिक पाइरेथ्रॉइड, डेल्टामेथ्रिन, पायरेथ्रम स्ट्रैक्ट, साइफेनोथ्रिन, टेमीफॉस आदि। स्वास्थ्य विभाग द्वारा इन रसायनों का इस्तेमाल घरों और नालियों आदि में छिड़काव के लिए किया जाता है।
ये हैं मलेरिया के लक्षण
- चार से आठ घंटे के चक्र में बुखार, सिरदर्द, शरीर दर्द, ठंड लगना, पसीना आना, मितली व उल्टी आदि।
मलेरिया से बचाव
- लक्षण दिखने पर तुरंत मलेरिया की जांच कराएं
- मलेरिया की पुष्टि होने पर निर्धारित समय तक दवा का सेवन करें
- सोते समय मच्छरदानी का प्रयोग करें
- स्वच्छता का ध्यान रखे और पूरी आस्तीन के कपड़े पहनें
- अपने घर के आसपास जलभराव न होने दें
- घर के अंदर पानी जमा नहीं रहने दें, कूलर आदि की नियमित सफाई करें
- लार्वा को खाने वाली मछली एवं मेंढक को तालाबों में डालें

प्रोफ़ेसर हिफजुर रहमान सिद्दीकी

प्रोफ़ेसर हिफजुर रहमान सिद्दीकी- फोटो : CITY OFFICE

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