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2004 में इंडोनेशिया में आए भूकंप का नतीजा है मौसम में बदलाव
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बुधवार सुबह 10 बजे रामघाट रोड छाया रहा कोहरा।
- फोटो : CITY OFFICE
मौसम में तेजी से हो रहे उतार-चढ़ाव का कारण 16 साल पहले इंडोनेशिया में आया भूकंप है। इस भूकंप का असर मौसम चक्र पर पड़ा है। अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के भूगोल विभाग के अध्ययन में यह तथ्य सामने आया है। उनका कहना है कि भूकंप की वजह से मौसम परिवर्तन चक्र एक महीने आगे खिसक गया है।
अमर उजाला से विशेष बातचीत में भूगोल विभाग के वरिष्ठ प्रोफेसर अतीक अहमद ने कहा कि सन 2004 में इंडोनेशिया के समुद्र तल में एक विनाशकारी भूकंप ( जिसे सुनामी भी कहते हैं) आया था, जिसके कारण पृथ्वी की भू आकृति में बदलाव हुआ (इसके लिए वह अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा के अध्ययन का हवाला देते हैं)। वह कहते हैं कि इस भौगोलिक घटना के कारण पृथ्वी अपनी धुरी से कुछ सेंटीमीटर (2.5 सेंटीमीटर) उत्तर की ओर खिसक गई (145 डिग्री. ई अक्षांश पर)। उसके भू-मध्य क्षेत्र में उथल होना पाया गया है। साथ ही दिन की अवधि 2.66 माइक्रो सेकंड भी घट गई है। पृथ्वी की घूमने की गति बढ़ गई है। इन सबका सीधा असर अब मौसम चक्र पर देखने को मिल रहा है।
प्रोफेसर अतीक कहते हैं कि उस समय हुई इस भौगोलिक घटना का असर भविष्य में भी देखने को मिलेगा। पूरी दुनिया छह महाद्वीप और अन्य छोटे-छोटे द्वीपों में बंटी हुई है। उस समय के भूकंप ने भारतीय महाद्वीप की पृथ्वी के नीचे की कुछ प्लेटों को और नीचे धकेला था। इससे मौसम में जो बदलाव आए, वह मध्य-पूर्व के गर्म देशों में भी देखे गए और वहां कुछ इलाकों में बर्फबारी तक हुई। प्रोफेसर अतीक अहमद कहते हैं कि अभी इस पर अध्ययन चल रहा है कि यह जो बदलाव हो रहे हैं, वह पर्यावरण के लिए कितने प्रतिकूल या अनुकूल हैं। क्योंकि करोड़ों वर्षों के पृथ्वी के सफर में वातावरण लगातार बदलाव की प्रक्रिया से गुजरता रहा है।
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अमर उजाला से विशेष बातचीत में भूगोल विभाग के वरिष्ठ प्रोफेसर अतीक अहमद ने कहा कि सन 2004 में इंडोनेशिया के समुद्र तल में एक विनाशकारी भूकंप ( जिसे सुनामी भी कहते हैं) आया था, जिसके कारण पृथ्वी की भू आकृति में बदलाव हुआ (इसके लिए वह अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा के अध्ययन का हवाला देते हैं)। वह कहते हैं कि इस भौगोलिक घटना के कारण पृथ्वी अपनी धुरी से कुछ सेंटीमीटर (2.5 सेंटीमीटर) उत्तर की ओर खिसक गई (145 डिग्री. ई अक्षांश पर)। उसके भू-मध्य क्षेत्र में उथल होना पाया गया है। साथ ही दिन की अवधि 2.66 माइक्रो सेकंड भी घट गई है। पृथ्वी की घूमने की गति बढ़ गई है। इन सबका सीधा असर अब मौसम चक्र पर देखने को मिल रहा है।
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प्रोफेसर अतीक कहते हैं कि उस समय हुई इस भौगोलिक घटना का असर भविष्य में भी देखने को मिलेगा। पूरी दुनिया छह महाद्वीप और अन्य छोटे-छोटे द्वीपों में बंटी हुई है। उस समय के भूकंप ने भारतीय महाद्वीप की पृथ्वी के नीचे की कुछ प्लेटों को और नीचे धकेला था। इससे मौसम में जो बदलाव आए, वह मध्य-पूर्व के गर्म देशों में भी देखे गए और वहां कुछ इलाकों में बर्फबारी तक हुई। प्रोफेसर अतीक अहमद कहते हैं कि अभी इस पर अध्ययन चल रहा है कि यह जो बदलाव हो रहे हैं, वह पर्यावरण के लिए कितने प्रतिकूल या अनुकूल हैं। क्योंकि करोड़ों वर्षों के पृथ्वी के सफर में वातावरण लगातार बदलाव की प्रक्रिया से गुजरता रहा है।
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