Aligarh News: काली मेले का अचानक बदला गया था मार्ग, पूर्व मेयर समेत तीन आयोजकों पर मुकदमा, जांच जारी
अलीगढ़ की पूर्व मेयर शकुंतला भारती पर मुकदमा दर्ज हुआ है। साथ ही तीन आयोजकों पर भी मुकदमा किया गया है। यह मुकदमा मां काली मेला का परंपरागत मार्ग बदलने पर पुलिस ने दर्ज कराया है।
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अलीगढ़ महानगर के देहली गेट इलाके में 6 अप्रैल को दुर्गा महारानी मंदिर सेवा समिति के मां काली मेला (शोभायात्रा) का परंपरागत मार्ग बदलने के मामले में पुलिस ने शासन के निर्देश पर मुकदमा दर्ज किया है। देहली गेट में पूर्व मेयर शकुंतला भारती व मेला आयोजकों पर यह मुकदमा दर्ज हुआ है, जिसमें अचानक से परंपरागत मार्ग बदलकर संवेदनशील सब्जी मंडी-अब्दुल करीम चौराहा से जबरन मेला निकालने का आरोप है।
वाकया 6 अप्रैल का है। जब देहली गेट से परंपरागत मेला निकाला जाने लगा तो आयोजकों ने इसका मार्ग बदलकर कटरा के बजाय कनवरीगंज फर्श के रास्ते से ले जाने का ऐलान किया। इसे लेकर पुलिस प्रशासन स्तर से मना किया गया व कुछ इलाके के लोगों ने विरोध किया। बावजूद इसके जबरन मेला नए मार्ग से निकाला गया। इस संबंध में एसएचओ देहली गेट रामेंद्र सिंह की ओर से मेला समिति संरक्षक पूर्व मेयर शकुंतला भारती, अध्यक्ष अखिल मांगलिक, संयोजक हरिबाबू गुप्ता व अन्य अज्ञात लोगों पर मुकदमा दर्ज किया है।
जिसमें उल्लेख है कि अचानक मार्ग बदला गया। जबकि एडीएम सिटी स्तर से पिछले वर्ष तक निकाले जाने वाले मार्ग से ही मेला की अनुमति दी गई थी। इसका स्थानीय लोगों ने विरोध किया तो धक्कामुक्की कर जबरन मेला अतिसंवेदनशील कनवरीगंज फर्श, सब्जी मंडी-अब्दुल करीम चौराहा के रास्ते से ले गए। सब्जी मंडी अतिसंवेदनशील इलाका है। वहां आतिशबाजी की गई और मानक से अधिक ध्वनि में बैंड पर भजन बजाए गए। इससे यातायात व्यवस्था गड़बड़ाने के साथ-साथ सांप्रदायिक व शांति व्यवस्था बिगडऩे का खतरा बना रहा। हालांकि भारी भरकम पुलिस, पीएसी व आरएएफ लगाकर व्यवस्था को बनाया गया। मुकदमे में नामजदों ने एडीएम सिटी द्वारा जारी निर्देश का उल्लंघन किया है।
इस तरह के परंपरागत आयोजनों को लेकर शासन की स्पष्ट नीति है कि किसी आयोजन में नई परंपरा नहीं जुड़ेगी। स्थान या मार्ग नहीं बदले जाएंगे। इस घटनाक्रम से शहर में कुछ भी हो सकता था। इस विषय में शासन को अवगत कराया गया। उसी आधार पर मुकदमा दर्ज किया गया है। बाकी तथ्यों की जांच के आधार पर आगे कार्रवाई होगी।-संजीव सुमन, एसएसपी, अलीगढ़
बहुत झेला..तब बदली गईं थीं धार्मिक आयोजनों की परंपराएं
हमारे शहर ने आजादी के बाद से लेकर 2006 तक यानि बहुत कुछ झेला। मगर 1978 के बहुचर्चित भूरा पहलवान हत्याकांड के बाद जो हुआ, उसे याद कर उस पीढ़ी के लोग आज भी सिहर उठते हैं। चार बरस तक अनवरत शहर ने दंगे झेले। तभी जस्टिस माथुर आयोग की सिफारिश पर शहर में धार्मिक आयोजनों के मार्गों व स्थानों की परंपराएं बदली गईं। प्रदेश के प्रमुख संवेदनशील शहरों की तर्ज पर अलीगढ़ में ला-एंड-ऑर्डर स्कीम लागू की गई। जो आज भी यथावत है। उस स्कीम के तहत जिले में तैनात थाना स्तर तक के पुलिस प्रशासनिक अफसरों को यह मालूम रहता है कि अगर शहर में रेड या यलो अलर्ट के तहत स्कीम लागू हो या सूचना प्रसारित हो तो उन्हें किस निर्धारित ड्यूटी स्थल पर पहुंचना है।