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बजट में स्वास्थ्य क्षेत्र में मौजूद कमियों को दूर करने का प्रयास किया है : प्रो. सिद्दीकी
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केंद्र सरकार द्वारा प्रस्तुत आम बजट पर अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के जेएन मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल प्रोफेसर शाहिद अली सिद्दीकी ने कहा है कि स्वास्थ्य के क्षेत्र में जो कमियां थी सरकार ने उनको दूर करने का प्रयास किया है।
प्रोफेसर सिद्दीकी ने कहा कि महामारी के कारण देश के स्वास्थ्य ढांचे की जो स्थिति पिछले वर्ष सामने आई उसको देखते हुए इस क्षेत्र में अतिरिक्त प्रयास करने की कोशिश की गई है। यही कारण है कि हेल्थ केयर के लिए 2.23 लाख करोड़ रुपये खर्च करने का प्रावधान बजट में किया है, जो पिछली बार से 137 फ़ीसदी ज्यादा है। स्वस्थ भारत योजना को शुरू करने की बात कही गई है। इसमें 6 साल में 64180 करोड़ रुपये खर्च करने का प्रावधान है। साफ पता चल रहा है कि गांव से लेकर शहर तक हेल्थ केयर के ढांचे को मजबूती देने का प्रयास सरकार का है।
प्रोफेसर सिद्दीकी ने कहा कि गांव में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र से लेकर कस्बा स्तर पर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र और जिला स्तर पर हॉस्पिटल और मेडिकल कॉलेज तक को सरकार इस तरह तैयार करना चाहती है कि भविष्य में महामारी के दौरान उससे भली प्रकार से निपटा जा सके।
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602 जिलों में क्रिटिकल केयर सेंटर बनाने की घोषणा इसी बात को ध्यान में रखते हुए की गई है। बजट में पूरे देश के वैक्सीनेशन के लिए 35 हजार करोड़ रुपये रखे गए हैं। इसके अलावा गांव में 17 हजार और शहर में 11 हजार हेल्थ वैलनेस सेंटर खोले जाने की बात कह रहे हैं। यह सब सिर्फ इसलिए क्योंकि पिछला समय महामारी के साथ गुजरा है। इसको देखते हुए सरकार देश के नागरिकों को बेहतर से बेहतर स्वास्थ्य सेवा देने के लिए कोशिश कर रही है जो इस बजट में दिखाई देता है। अन्य क्षेत्रों में बजट के प्रावधान और उसको किस तरह से देखा जाए, इसका विश्लेषण वित्तीय मामलों के जानकार करेंगे और कर सकते हैं, लेकिन जहां तक स्वास्थ्य के क्षेत्र का सवाल है उसमें इस बैठक में काफी कुछ किया गया है।
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प्रोफेसर सिद्दीकी ने कहा कि महामारी के कारण देश के स्वास्थ्य ढांचे की जो स्थिति पिछले वर्ष सामने आई उसको देखते हुए इस क्षेत्र में अतिरिक्त प्रयास करने की कोशिश की गई है। यही कारण है कि हेल्थ केयर के लिए 2.23 लाख करोड़ रुपये खर्च करने का प्रावधान बजट में किया है, जो पिछली बार से 137 फ़ीसदी ज्यादा है। स्वस्थ भारत योजना को शुरू करने की बात कही गई है। इसमें 6 साल में 64180 करोड़ रुपये खर्च करने का प्रावधान है। साफ पता चल रहा है कि गांव से लेकर शहर तक हेल्थ केयर के ढांचे को मजबूती देने का प्रयास सरकार का है।
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प्रोफेसर सिद्दीकी ने कहा कि गांव में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र से लेकर कस्बा स्तर पर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र और जिला स्तर पर हॉस्पिटल और मेडिकल कॉलेज तक को सरकार इस तरह तैयार करना चाहती है कि भविष्य में महामारी के दौरान उससे भली प्रकार से निपटा जा सके।
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602 जिलों में क्रिटिकल केयर सेंटर बनाने की घोषणा इसी बात को ध्यान में रखते हुए की गई है। बजट में पूरे देश के वैक्सीनेशन के लिए 35 हजार करोड़ रुपये रखे गए हैं। इसके अलावा गांव में 17 हजार और शहर में 11 हजार हेल्थ वैलनेस सेंटर खोले जाने की बात कह रहे हैं। यह सब सिर्फ इसलिए क्योंकि पिछला समय महामारी के साथ गुजरा है। इसको देखते हुए सरकार देश के नागरिकों को बेहतर से बेहतर स्वास्थ्य सेवा देने के लिए कोशिश कर रही है जो इस बजट में दिखाई देता है। अन्य क्षेत्रों में बजट के प्रावधान और उसको किस तरह से देखा जाए, इसका विश्लेषण वित्तीय मामलों के जानकार करेंगे और कर सकते हैं, लेकिन जहां तक स्वास्थ्य के क्षेत्र का सवाल है उसमें इस बैठक में काफी कुछ किया गया है।