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बसपा की भी कुछ ऐसी तैयारी...मेयरी पर फिर से हों काबिज

Tue, 01 Nov 2022 01:39 AM IST
Aligarh Bureau अलीगढ़ ब्यूरो
Updated Tue, 01 Nov 2022 01:39 AM IST
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BSP also has some such preparation...mayry be occupied again
अभिषेक शर्मा, अलीगढ़।
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2012 के विधानसभा चुनाव में प्रदेश की सत्ता से बाहर हुई बसपा के लिए महापौर अलीगढ़ का चुनाव प्रतिष्ठा से जुड़ा हुआ है। वजह भी वाजिब है। बीस वर्ष से मेयर के जिस पद पर भाजपा का कब्जा था, उसे 2017 के चुनाव में अनुसूचित-मुस्लिम गठजोड़ के दम पर बसपा ने कब्जाया। अब यह कब्जा बरकरार रहे, ऐसा बसपा प्रयास कर रही है।
कहीं किसी तरह की गड़बड़ी न हो, इसे लेकर अनुसूचित-मुस्लिम गठजोड़ के साथ-साथ सोशल इंजीनियरिंग फार्मूले पर भी काम हो रही है। बूथ व वार्ड वार टीमें जातिवार वोटरों के आंकड़े जुटाने में लगी हैं। पार्षद प्रत्याशियों का पैनल तैयार है। आरक्षण लागू होते ही सबसे पहले प्रत्याशियों की घोषणा होगी। ऐसा दावा संगठन का है। मेयर पद के प्रत्याशी पर भी फैसला बहुत जल्द होगा।
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अपने जिले की सियासत पर गौर करें तो शहर के आधे हिस्से में आने वाली कोल सीट पर बसपा 2002 और 2007 का चुनाव जीती। 2012 में यह सीट बसपा के खाते में गई। इससे पहले मेयर पद पर गौर करें तो भाजपा के बैनरतले मेयर निर्वाचित हुईं सावित्री वार्ष्णेय को भी उस चुनाव में बसपा की रजिया खान ने बेहद कड़ी टक्कर दी और रजिया बेहद मामूली अंतर से चुनाव हारी थीं।
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यही परिणाम 2017 के मेयर चुनाव में बसपा ने रिपीट किया और भाजपा के राजीव अग्रवाल को कड़ी टक्कर देते हुए मेयर पद 10 हजार के मामूली अंतर से जीत लिया। इस जीत पर बसपा ने प्रदेश स्तर पर बड़ा जश्न मनाया। बीस वर्ष से जिस सीट पर भाजपा का कब्जा था, उसे भाजपा के सत्ता में रहते छीनना बड़ी जीत माना गया। अब बसपा के लिए चुनौती उस परिणाम को बरकरार रखने की है।
बरकरार रहेगी जीत, हर बूथ हो रहा मजबूत : हरजीत
इसे लेकर बसपा जिलाध्यक्ष हरजीत सिंह कहते हैं कि मेयर की सीट हम फिर से जीतेंगे। यह आंकड़े कह रहे हैं। इन दिनों वार्ड व बूथ स्तर पर हमारे जिले से लेकर मंडल और वार्ड स्तर तक के पदाधिकारी बूथ को मजबूत करने में लगे हैं। वार्ड वार जातीय आकलन किया जा रहा है। सभी वार्डों में प्रत्याशियों का पैनल तैयार है।
आरक्षण होते ही सोशल इंजीनियरिंग फार्मूले को ध्यान में रखकर हर जाति, धर्म व वर्ग को ध्यान में रखकर पार्षद प्रत्याशी घोषित किए जाएंगे। यह जनता जानती है कि पांच वर्ष प्रदेश में भाजपा की सत्ता रही है। फिर भी बसपा के मेयर ने तमाम विकास कार्य और तमाम मुद्दों पर बेहतर निर्णय लिए हैं।

बसपा का अपना बेस वोट बैंक पार्टी की जीत का बड़ा आधार बनेगा। हमारी टीमें इन दिनों इसी काम में लगी हैं कि हमारा वोट न बिखरे, कहीं वोटर लिस्टों में गड़बड़ी न हो। रहा सवाल मेयर प्रत्याशी का तो आरक्षण लागू होते ही बसपा सुप्रीमो स्तर से सबसे पहले निर्णय लिया जाएगा।
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