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अमर उजाला विशेष : अंग्रेज अफसर जेएम हैरिसन बने थे अलीगढ़ नगर पालिका के पहले प्रशासक

Thu, 03 Nov 2022 11:46 PM IST
Aligarh Bureau अलीगढ़ ब्यूरो
Updated Thu, 03 Nov 2022 11:46 PM IST
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British officer JM Harrison became the first administrator of Aligarh Municipality
अभिषेक शर्मा
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निकाय चुनाव यानि नगरीय प्रशासन/प्रबंधन चुनाव होने जा रहा है। तैयारियां जोरों पर हैं। ऐसे में अगर अलीगढ़ शहर के नगरीय प्रशासन के इतिहास पर गौर करें तो यहां शहरी प्रशासन की शुरुआत सन 1804 में अलीगढ़ को जिला बनाकर की गई। कर्नल रसल पहले कलक्टर बनाए गए। इसी के साथ शहर में नगरीय प्रशासन की नींव पड़ गई। इसके बाद 1883 से 90 के बीच नगर पालिका गठित हुई। मगर 1893 में अंग्रेज अफसर जेएम हैरिसन अलीगढ़ नगर पालिका के पहले प्रशासक नियत किए गए। इन तथ्यों की गवाही 1910 के उस गजेटियर में है, जो अलीगढ़ के इतिहास की तमाम बारीक जानकारियों को समेटे हुए है। इससे पहले अलीगढ़ मराठा साम्राज्य का हिस्सा था। मराठा साम्राज्य की सेना में फ्रांसीसी सैनिक और अधिकारी बड़ी संख्या में थे।
अलीगढ़ किला, जिसमें आज एएमयू का बॉटनिकल गार्डन है, इसमें मराठा सैनिकों (जिसमें फ्रांसीसी भी शामिल थे) के फौजी सामान का जमावड़ा रहता था। यह एक तरह का सैन्य पड़ाव हुआ करता था। इसके प्रवेश मार्ग पर एक पत्थर लगा है, जिसमें अंग्रेजों की फतह और फ्रांसीसी सैनिक अधिकारियों की शहादत का जिक्र है। जिला बनने के बाद यहां प्रशासन, पुलिस और न्यायपालिका ने अपना काम करना शुरू किया। एएमयू के संस्थापक सर सैयद अहमद भी यहां पर न्यायिक अधिकारी रहे। 1857 के गदर का प्रभाव भी अलीगढ़ पर पड़ा। सीमेंट की सड़क सबसे पहले रेलवे रोड पर बनाई गई। इससे बहुत पहले ही अलीगढ़ में रेलवे लाइन आ चुकी थी। दिल्ली से हावड़ा जाने वाला मुख्य ट्रैक अलीगढ़ होकर ही गुजरता है। रेलवे से कनेक्टिविटी मिलने के बाद अलीगढ़ का विकास बहुत तेजी से हुआ।
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अंग्रेजों ने हथकड़ी बनाने का कारखाना अलीगढ़ में लगाया और इसी के साथ यहां पर ताला उद्योग की बुनियाद पड़ी। अब तक अलीगढ़ की पहचान ताला है, जबकि यह शिक्षा और हार्डवेयर उत्पादों के निर्यात का बड़ा केंद्र बन चुका है। अलीगढ़ के विकास और उसके नगरीय स्वरूप को गति देने का काम यहां पर प्रतिवर्ष लगने वाली ऐतिहासिक प्रदर्शनी ने भी किया है। इस प्रदर्शनी में कश्मीर से लेकर भारत के अन्य राज्यों के दुकानदार, कलाकार आदि आते हैं।
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25 अंग्रेजों, छह नवाब तीन वैश्यों ने संभाली शहर की कमान
शहर की बात करें तो आधिकारिक रूप से 1893 में शहर को नगर पालिका का दर्जा मिला। इसके बाद करीब 100 वर्ष तक यह नगर पालिका ही रही। इसको नगर निगम बनाने का श्रेय 1995 में उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव को जाता है। वह यहां गोपी लौधुआ पर आनंद एग्रो चीनी मिल के शुभारंभ के मौके पर आए थे। नगर पालिका से नगर निगम तक के सफर में 25 अंग्रेज शासक, 6 मुस्लिम शासक और तीन बार वैश्य समुदाय के व्यक्ति ने शहर की कमान संभाली है। एक बार महिला ने कमान संभाली।
-- नगर पालिका से नगर निगम तक --
- 1893 में पहली बार शहर नगर पालिका बना, जेएम हैरिसन मनोनीत प्रशासक बने।
- 1 जून 1921 को अब्दुल समद खां अध्यक्ष बने
- 1923 में एम ख्वाजा दूसरे अध्यक्ष बने
- 1925 में सोहन लाल बीए अध्यक्ष बने
- 1931 में अब्दुल खालिक अध्यक्ष बने
- 1940 में शिव प्रसाद अध्यक्ष बने
- 1940 में ही अब्दुल मजीद ख्वाजा अध्यक्ष बने
- 1945 में एलएन माथुर अध्यक्ष बने
- 1945 में ही अब्दुल मुफीद खां शेरवानी अध्यक्ष
- 1952 में सुपरसीट होकर प्रशासन ने कार्य संभाला
- 1988 तक प्रशासकों ने ही बोर्ड चलाया
- 1988 में ओपी अग्रवाल अध्यक्ष बने
- 1995 में अलीगढ़ को नगर निगम का दर्जा
- 1997 में आशुतोष वार्ष्णेय मेयर बने
- 2002 में सावित्री वार्ष्णेय महापौर बनीं
- 2007 में आशुतोष वार्ष्णेय फिर महापौर बने
- 2012 में शकुंतला भारती महापौर बनीं
- 2017 में मो.फुरकान मेयर बने
- नगरीय प्रशासन की ये भी खास बातें -
- पहला बिजली का खंभा मोहल्ला जयगंज में लगाया गया था
- थानों के बाहर घोड़ों को पानी पिलाने वाली हौदियां बनी थीं
- तालों के व्यापार का बड़ा केंद्र था, तब सराय संख्या 84 थी
- पुराने शहर को सिविल लाइंस से जोड़ने के लिए कठपुला पहला पुल बना
- तांगे लोकल ट्रांसपोर्ट का मुख्य साधन थे, तांगा स्टैंड अभी भी मौजूद है
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