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उखड़ती रहीं सांसें, मगर एंबुलेंस नहीं आई
अमर उजाला ब्यूूराे
Updated Fri, 09 Jun 2017 02:02 AM IST
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एंबुलेंस न मिलने पर ई-रिक्शा में बुजुर्ग को मेडिकल कॉलेज ले जाते परिजन
- फोटो : Amar Ujala
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सरकारी एंबुलेंस सेवा 108 की कार्यशैली पर अब सवाल उठने लगे हैं। बृहस्पतिवार को मलखान सिंह जिला अस्पताल में 65 वर्षीय बुजुर्ग की सांसें उखड़ती रही, लेकिन दो 2 घंटे के इंतजार के बाद भी 108 एंबुलेंस की सेवा मरीज को नहीं मिल सकी। हैरान कर देने वाली बात यह कि 108 एंबुलेंस अस्पताल परिसर में ही खड़ी थी।
इसके बाद भी एंबुलेंस से मरीज को मेडिकल कॉलेज नहीं पहुंचाया गया। थक-हारकर परिजन मरीज को ई-रिक्शा से मेडिकल कालेज ले गए। अपर निदेशक स्वास्थ्य ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच कराने की बात कही है।
भांकरी निवासी 65 वर्षीय सोरन सिंह को सांस की बीमारी के चलते मलखान सिंह जिला अस्पताल में लाया गया, जहां उनको वार्ड संख्या 8 में भर्ती कराया गया। उनकी हालत लगातार बिगड़ती जा रही थी तो डॉक्टरों ने उन्हें जवाहरलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज के लिए रेफर कर दिया।
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डाक्टरों ने उन्हें मेडिकल कालेज ले जाने के लिए 108 एंबुलेंस सेवा की मदद लेने की सलाह दी। परिजनों ने 108 नंबर पर फोन करके पूरी बात बताई और एंबुलेंस भेजने का अनुरोध किया। परिजनों को आश्वासन तो मिला लेकिन एंबुलेंस नहीं आई। करीब दो घंटे तक जब एंबुलेंस नहीं पहुंची है तो परिजनों को एंबुलेंस का नंबर और आईडी एसएमएस की गई।
इसके बाद भी एंबुलेंस नहीं पहुंची। कुछ देर बाद पता चला कि आवंटित की गई एंबुलेंस अस्पताल के परिसर में ही खड़ी है। इसके बाद भी वह एंबुलेंस मेडिकल कॉलेज जाने को तैयार नहीं हुई। ड्राइवर की दलील थी कि उसके पास कोई मैसेज ही नहीं आया है। हताश परिजन सोरन सिंह को ई-रिक्शा से मेडिकल कॉलेज ले गए।
-‘मामला वाकई गंभीर है। मरीज को एंबुलेंस की सेवा तत्काल उपलब्ध होनी चाहिए थी। अगर और ज्यादा गंभीर स्थिति होती तो परिणाम बहुत ही निराश कर देने वाला हो सकता था। मामले की गहराई से जांच करायी जाएगी।’
- डॉ. गीता प्रधान, अपर निदेशक स्वास्थ्य
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इसके बाद भी एंबुलेंस से मरीज को मेडिकल कॉलेज नहीं पहुंचाया गया। थक-हारकर परिजन मरीज को ई-रिक्शा से मेडिकल कालेज ले गए। अपर निदेशक स्वास्थ्य ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच कराने की बात कही है।
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भांकरी निवासी 65 वर्षीय सोरन सिंह को सांस की बीमारी के चलते मलखान सिंह जिला अस्पताल में लाया गया, जहां उनको वार्ड संख्या 8 में भर्ती कराया गया। उनकी हालत लगातार बिगड़ती जा रही थी तो डॉक्टरों ने उन्हें जवाहरलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज के लिए रेफर कर दिया।
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डाक्टरों ने उन्हें मेडिकल कालेज ले जाने के लिए 108 एंबुलेंस सेवा की मदद लेने की सलाह दी। परिजनों ने 108 नंबर पर फोन करके पूरी बात बताई और एंबुलेंस भेजने का अनुरोध किया। परिजनों को आश्वासन तो मिला लेकिन एंबुलेंस नहीं आई। करीब दो घंटे तक जब एंबुलेंस नहीं पहुंची है तो परिजनों को एंबुलेंस का नंबर और आईडी एसएमएस की गई।
इसके बाद भी एंबुलेंस नहीं पहुंची। कुछ देर बाद पता चला कि आवंटित की गई एंबुलेंस अस्पताल के परिसर में ही खड़ी है। इसके बाद भी वह एंबुलेंस मेडिकल कॉलेज जाने को तैयार नहीं हुई। ड्राइवर की दलील थी कि उसके पास कोई मैसेज ही नहीं आया है। हताश परिजन सोरन सिंह को ई-रिक्शा से मेडिकल कॉलेज ले गए।
-‘मामला वाकई गंभीर है। मरीज को एंबुलेंस की सेवा तत्काल उपलब्ध होनी चाहिए थी। अगर और ज्यादा गंभीर स्थिति होती तो परिणाम बहुत ही निराश कर देने वाला हो सकता था। मामले की गहराई से जांच करायी जाएगी।’
- डॉ. गीता प्रधान, अपर निदेशक स्वास्थ्य