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अलीगढ़ : आज की दधीचि... छात्रों की पढ़ाई के लिए देहदान
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कमलेश दीक्षित (फाइल फोटो)
- फोटो : CITY OFFICE
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देवलोक की रक्षा के लिए महर्षि दधीचि ने अस्थियां दान कर दी थीं। आयुर्वेद के छात्रों को अध्ययन के लिए चूहरपुर की एक महिला की देहदान की है गई। मृत्यु के बाद महिला के पार्थिव शरीर को श्रीसाईं मेडिकल कॉलेज को सौंप दिया गया है।
चूहरपुर निवासी 61 वर्षीय कमलेश दीक्षित पत्नी सत्यनारायण दीक्षित का बृहस्पतिवार सुबह निधन हो गया। वह काफी दिनों से बीमार थी। पति सत्यनारायण दीक्षित मानव उपकार संस्था से जुड़े हैं। उनकी पत्नी कमलेश दीक्षित ने जीवनकाल में ही मृत्यु के बाद शरीर दान की प्रक्रिया पूरी कर ली थी।
उनकी हार्दिक इच्छा थी कि उनकी मृत्यु के बाद उनके शरीर को आयुर्वेद के छात्र-छात्राओं को सौंप दिया जाए, ताकि वह पढ़ाई कर सकें। उनको जीवन काल में ही पति के माध्यम से मालूम हुआ था कि आयुर्वेद कॉलेज के छात्रों को पढ़ाई के लिए शव की जरूरत है। कमलेश दीक्षित कई दिनों से बीमार चल रही थीं। अभी लोको कॉलोनी में अपने रिश्तेदार के यहां थी। मृत्यु के बाद उनके पति ने मानव उपकार संस्था के अध्यक्ष विष्णु कुमार बंटी को सूचना दी। तमाम प्रक्रिया पूरी करने के बाद उनके शव को श्रीसाईं मेडिकल कॉलेज को सौंप दिया गया। इस अवसर पर हरिकृष्ण मुरारी शर्मा, देहदान संस्था के डॉ. एसके गौड़, डॉ. संजय श्रीवास्तव, प्रो. राजशेखर, डॉ. सत्यमा, ओपी वर्मा, विवेक अग्रवाल, रामगोपाल राजपूत, आलोक अग्रवाल आदि मौजूद थे।
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प्रो. केपी सिंह ने की थी देहदान परंपरा की शुरुआत
साहित्यकार प्रो. केपी सिंह ने अलीगढ़ में देहदान परंपरा की शुरुआत की थी। उनके पार्थिक शरीर को जेएन मेडिकल कॉलेज को दान किया गया था, ताकि मेडिकल के छात्र-छात्राएं अध्ययन कर सकें। उसके बाद कई लोग देहदान कर चुके हैं। अचलताल निवासी विश्व हिंदू परिषद के नेता राजाराम मित्र की पत्नी राधा देवी पहली महिला थी, जिनका देहदान जेएन मेडिकल कॉलेज को किया गया। जेएन मेडिकल कॉलेज के बाद पहली बार साईं मेडिकल कॉलेज (आयुर्वेद) में किसी ने देहदान किया है।
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चूहरपुर निवासी 61 वर्षीय कमलेश दीक्षित पत्नी सत्यनारायण दीक्षित का बृहस्पतिवार सुबह निधन हो गया। वह काफी दिनों से बीमार थी। पति सत्यनारायण दीक्षित मानव उपकार संस्था से जुड़े हैं। उनकी पत्नी कमलेश दीक्षित ने जीवनकाल में ही मृत्यु के बाद शरीर दान की प्रक्रिया पूरी कर ली थी।
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उनकी हार्दिक इच्छा थी कि उनकी मृत्यु के बाद उनके शरीर को आयुर्वेद के छात्र-छात्राओं को सौंप दिया जाए, ताकि वह पढ़ाई कर सकें। उनको जीवन काल में ही पति के माध्यम से मालूम हुआ था कि आयुर्वेद कॉलेज के छात्रों को पढ़ाई के लिए शव की जरूरत है। कमलेश दीक्षित कई दिनों से बीमार चल रही थीं। अभी लोको कॉलोनी में अपने रिश्तेदार के यहां थी। मृत्यु के बाद उनके पति ने मानव उपकार संस्था के अध्यक्ष विष्णु कुमार बंटी को सूचना दी। तमाम प्रक्रिया पूरी करने के बाद उनके शव को श्रीसाईं मेडिकल कॉलेज को सौंप दिया गया। इस अवसर पर हरिकृष्ण मुरारी शर्मा, देहदान संस्था के डॉ. एसके गौड़, डॉ. संजय श्रीवास्तव, प्रो. राजशेखर, डॉ. सत्यमा, ओपी वर्मा, विवेक अग्रवाल, रामगोपाल राजपूत, आलोक अग्रवाल आदि मौजूद थे।
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प्रो. केपी सिंह ने की थी देहदान परंपरा की शुरुआत
साहित्यकार प्रो. केपी सिंह ने अलीगढ़ में देहदान परंपरा की शुरुआत की थी। उनके पार्थिक शरीर को जेएन मेडिकल कॉलेज को दान किया गया था, ताकि मेडिकल के छात्र-छात्राएं अध्ययन कर सकें। उसके बाद कई लोग देहदान कर चुके हैं। अचलताल निवासी विश्व हिंदू परिषद के नेता राजाराम मित्र की पत्नी राधा देवी पहली महिला थी, जिनका देहदान जेएन मेडिकल कॉलेज को किया गया। जेएन मेडिकल कॉलेज के बाद पहली बार साईं मेडिकल कॉलेज (आयुर्वेद) में किसी ने देहदान किया है।