उपद्रव के मंथन में कमल को अमृत की तलाश
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अलीगढ़। उत्तर प्रदेश की बिगड़ती कानून व्यवस्था भाजपा के गिरते ग्राफ को थामने में संजीवनी का काम कर सकती है। इस स्थिति को भांपकर भाजपा ने प्रदेश में हुई सांप्रदायिक उपद्रव की घटनाओं पर मंथन शुरू कर दिया है। निश्चित ही पार्टी इस मंथन में ध्रुवीकरण का अमृत भी तलाश रही है, जो मिशन 2017 में बहुत काम आएगा। इस मंथन की शुरुआत गुरुवार को यहां पार्टी की बैठक में हो गई, जिसमें प्रदेश अध्यक्ष लक्ष्मीकांत वाजपेयी समेत कई प्रदेश स्तरीय नेताओं ने बिगड़ती कानून व्यवस्था के खिलाफ आधे प्रदेश में 25 नवंबर से एक दिसंबर तक व्यापक आंदोलन चलाने का ऐलान किया।
बिहार के विधानसभा चुनाव में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की लहर नहीं चली। भाजपा का यही हाल उत्तर प्रदेश के पिछले विधानसभा चुनाव में हुआ था, जिसमें समाजवादी पार्टी पूर्ण बहुमत के साथ सरकार में आ गई थी। ऐसे में मिशन 2017 आसान नहीं रह गया है। पार्टी कोई चेहरा भी सामने नहीं लाना चाहती।
वहीं सांप्रदायिक उपद्रव की घटनाएं खुद ब खुद मुद्दा बनकर पार्टी की झोली में आ गिरी हैं, जिन्हें अब पार्टी भुनाने की तैयारी कर रही है। इसी के चलते अलीगढ़ में हुई गौरव खटीक की हत्या को लेकर भाजपा अपने ब्रज प्रांत में, वाराणसी में हुई भाजपा पार्षद शिवसेठ की हत्या को काशी प्रांत में, आजमगढ़ में हुई यादव वकील की हत्या को गोरखपुर प्रांत में और कन्नौज में देवी प्रतिमा विसर्जन के दौरान हुए बवाल को लेकर कानपुर प्रांत में व्यापक आंदोलन की तैयारी में है। इस दौरान व्यापक ध्रुवीकरण से भी इनकार नहीं किया जा सकता।
सिर्फ कल्याण के सहारे नहीं होगा कल्याण ? ब्रज प्रांत पर हमेशा से पूर्व मुख्यमंत्री और वर्तमान में राजस्थान के राज्यपाल कल्याण सिंह का दबदबा माना जाता रहा है, लेकिन अब हालात बदलते नजर आ रहे हैं। हाल ही में हुए पंचायत चुनाव में कल्याण सिंह के क्षेत्र अतरौली की नौ पंचायत सदस्य की सीटों में से एक भी सीट भाजपा नहीं जीत सकी। ऐसे में पार्टी मान रही है कि केवल कल्याण सिंह के सहारे ही ब्रज में आगे नहीं बढ़ा जा सकता। किसी व्यक्ति के सहारे बढ़ने के बजाय अब मुद्दों को ही गरमाना बेहतर माना जा रहा है।