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Aligarh: शेखा झील में जलकुंभी की सफाई और तेज आवाज से परेशान हो रहे परिंदे, बार बार उड़ रहे हैं मेहमान पक्षी
Thu, 15 Dec 2022 08:30 AM IST
अलीगढ़ ब्यूरो
अमर उजाला नेटवर्क, अलीगढ़
अमर उजाला नेटवर्क, अलीगढ़
Published by: अलीगढ़ ब्यूरो
Updated Thu, 15 Dec 2022 08:30 AM IST
सार
अलीगढ़-छर्रा रोड पर शेखा झील करीब 40 हेक्टेयर क्षेत्र में फैली हुई है।अलीगढ़ की शेखा झील में बाहर से मेहमान पक्षी आते हैं, पर जलकुंभी की सफाई और तेज आवाज से परिंदे परेशान हो रहे हैं। आकर भी वहां ठहरते नहीं है और फुर्र हो जाते हैं।
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शेखा झील में उगी जलकुंभी की सफाई करते कर्मचारी संवाद
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
हर साल सर्दी के मौसम में शेखाझील हजारों देशी-विदेशी परिंदों से गुलजार रहती है। इस बार आधा दिसंबर गुजर गया, लेकिन अभी तक कोहरे की शुरूआत नहीं हुई है, जिससे परिंदों का आना कम हुआ है। इधर, जलकुंभी की सफाई से आए हुए मेहमान पक्षी बार बार उड़ रहे हैं, वो दूसरे ठिकानों की तलाश कर रहे हैं। झील के उस पार पेड़ों के झुरमुट में कुछ पक्षी देखे जा रहे हैं, जो डरे सहमे लगते हैं।
कारण यह है कि पक्षियों के आने के समय झील की सफाई की जा रही है, शर्मीले मेहमान तनिक आहट होते ही उड़ जाते हैं। प्रदेश सरकार इस झील को पर्यटन के मानचित्र पर चमकाना चाहती है, लेकिन वन विभाग इसमें सफल होता नहीं दिख रहा है। हर वर्ष मेहमानों की संख्या लगातार कम हो रही है।
11 हजार किलोमीटर से आते हैं परिंदे
विदेशी परिंदे करीब 11000 किलोमीटर की दूरी तय कर शेखा झील पहुंचते थे। पर्यावरणविद् सुबोध नंदन शर्मा का कहना है कि यह पक्षी एक बार उड़ान भरते हैं तो फिर सीधे अपने निर्धारित स्थान पर ही पहुंचते हैं। यह इतने समझदार होते हैं कि इन्हें निर्धारित स्थान पर पहुंचने में कहीं कोई दिक्कत नहीं होती है, इनके आने की तारीख भी तय होती है। उनका कहना है कि उड़ान भरते समय यह वातावरण से ही भोजन लेते हैं इसलिए यह रास्ते में कहीं रुकते नहीं हैं।
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186 किस्म के परिंदे आते हैं यहां
जिले मुख्यालय से 20 किलोमीटर दूर अलीगढ़ छर्रा रोड पर शेखा झील करीब 40 हेक्टेयर क्षेत्र में फैली हुई है। जहां करीब 186 अलग-अलग किस्मों के परिंदे आते हैं। इसमें कई प्रजाति के देशी-विदेशी पक्षी शुमार हैं। सर्दियों के मौसम में नवंबर से फरवरी तक झील इन पक्षियों से गुलजार रहती है। गर्मियों की शुरुआत में ही ये मेहमान अपने देश लौटने लगतेे हैं। यहां घूमने आने वाले लोगों को ये परिंदे अपनी तरफ लुभाते हैं।
फोटोग्राफी के शौकीनों के लिए भी ये जगह खास
प्रभागीय वन निदेशक दिवाकर वशिष्ठ के अनुसार सारस, मुरैन पनकौआ, जलकौआ, ब्लैक आइविश, बड़ा बगुला, स्काट बिल, जल मुर्गा, पिनटेल, कॉमन टेल, ब्लैक पिनटेल, डार्टर, ग्रे हीरोन, पेटेंड स्ट्रोक, ग्रेट कोरमोरेंट, पर्पल हीरोन, कॉम्ब डक, व्हाइट आईबिज, ब्लैक हैडेड आईबिज, ओपन बिल स्ट्रोक, स्पॉट बिल्ड डक, ब्लैक नेक्ड स्ट्रोक, व्हाइट ब्रेस्टेड वाटर हेन, कॉमन मूरहेन, लिटिल कोरमोरेंट, व्लाइट आईबिज, सोवलर, ग्रेलेग गूज, गेटबेल, सुर्खाब, सावलर, दूब आदि समेत करीब 186 विदेशी प्रजाति के परिंदे यहां हर साल प्रवास को पहुंचते हैं। सर्दी बढ़ने के साथ परिंदों के आने का सिलसिला शुरू हो जाएगा।
जलकुंभी की सफाई हो रही
प्रभागीय वन निदेशक दिवाकर वशिष्ठ ने बताया कि इस बार सितंबर महीने में अधिक बारिश के चलते झील में काफी मात्रा में जलकुंभी पैदा हो गई है, इसकी सफाई की जा रही है। उन्हें मुफीद माहौल देने के लिए अभी से सफाई की जा रही है। जलकुंभी की सफाई के दौरान पक्षी थोड़ी सी आहट पाते ही उड़ जाते हैं।
हार्न करते हैं दिक्कत
झील के सामने से अलीगढ़-छर्रा रोड पर तेज रफ्तार से प्राइवेट बसें, ट्रक और अन्य वाहन गुजरते हैं। इन वाहनों के तेज आवाज, हॉर्न से परिंदे परेशान होते हैं। वाहनों से धूल उड़ती और धुआं भी होता है। नियमानुसार झील के पास से वाहनों को कम रफ्तार के साथ बिना हॉर्न बजाए गुजरना चाहिए, लेकिन ऐसा नहीं हो रहा है।
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कारण यह है कि पक्षियों के आने के समय झील की सफाई की जा रही है, शर्मीले मेहमान तनिक आहट होते ही उड़ जाते हैं। प्रदेश सरकार इस झील को पर्यटन के मानचित्र पर चमकाना चाहती है, लेकिन वन विभाग इसमें सफल होता नहीं दिख रहा है। हर वर्ष मेहमानों की संख्या लगातार कम हो रही है।
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11 हजार किलोमीटर से आते हैं परिंदे
विदेशी परिंदे करीब 11000 किलोमीटर की दूरी तय कर शेखा झील पहुंचते थे। पर्यावरणविद् सुबोध नंदन शर्मा का कहना है कि यह पक्षी एक बार उड़ान भरते हैं तो फिर सीधे अपने निर्धारित स्थान पर ही पहुंचते हैं। यह इतने समझदार होते हैं कि इन्हें निर्धारित स्थान पर पहुंचने में कहीं कोई दिक्कत नहीं होती है, इनके आने की तारीख भी तय होती है। उनका कहना है कि उड़ान भरते समय यह वातावरण से ही भोजन लेते हैं इसलिए यह रास्ते में कहीं रुकते नहीं हैं।
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186 किस्म के परिंदे आते हैं यहां
जिले मुख्यालय से 20 किलोमीटर दूर अलीगढ़ छर्रा रोड पर शेखा झील करीब 40 हेक्टेयर क्षेत्र में फैली हुई है। जहां करीब 186 अलग-अलग किस्मों के परिंदे आते हैं। इसमें कई प्रजाति के देशी-विदेशी पक्षी शुमार हैं। सर्दियों के मौसम में नवंबर से फरवरी तक झील इन पक्षियों से गुलजार रहती है। गर्मियों की शुरुआत में ही ये मेहमान अपने देश लौटने लगतेे हैं। यहां घूमने आने वाले लोगों को ये परिंदे अपनी तरफ लुभाते हैं।
फोटोग्राफी के शौकीनों के लिए भी ये जगह खास
प्रभागीय वन निदेशक दिवाकर वशिष्ठ के अनुसार सारस, मुरैन पनकौआ, जलकौआ, ब्लैक आइविश, बड़ा बगुला, स्काट बिल, जल मुर्गा, पिनटेल, कॉमन टेल, ब्लैक पिनटेल, डार्टर, ग्रे हीरोन, पेटेंड स्ट्रोक, ग्रेट कोरमोरेंट, पर्पल हीरोन, कॉम्ब डक, व्हाइट आईबिज, ब्लैक हैडेड आईबिज, ओपन बिल स्ट्रोक, स्पॉट बिल्ड डक, ब्लैक नेक्ड स्ट्रोक, व्हाइट ब्रेस्टेड वाटर हेन, कॉमन मूरहेन, लिटिल कोरमोरेंट, व्लाइट आईबिज, सोवलर, ग्रेलेग गूज, गेटबेल, सुर्खाब, सावलर, दूब आदि समेत करीब 186 विदेशी प्रजाति के परिंदे यहां हर साल प्रवास को पहुंचते हैं। सर्दी बढ़ने के साथ परिंदों के आने का सिलसिला शुरू हो जाएगा।
जलकुंभी की सफाई हो रही
प्रभागीय वन निदेशक दिवाकर वशिष्ठ ने बताया कि इस बार सितंबर महीने में अधिक बारिश के चलते झील में काफी मात्रा में जलकुंभी पैदा हो गई है, इसकी सफाई की जा रही है। उन्हें मुफीद माहौल देने के लिए अभी से सफाई की जा रही है। जलकुंभी की सफाई के दौरान पक्षी थोड़ी सी आहट पाते ही उड़ जाते हैं।
हार्न करते हैं दिक्कत
झील के सामने से अलीगढ़-छर्रा रोड पर तेज रफ्तार से प्राइवेट बसें, ट्रक और अन्य वाहन गुजरते हैं। इन वाहनों के तेज आवाज, हॉर्न से परिंदे परेशान होते हैं। वाहनों से धूल उड़ती और धुआं भी होता है। नियमानुसार झील के पास से वाहनों को कम रफ्तार के साथ बिना हॉर्न बजाए गुजरना चाहिए, लेकिन ऐसा नहीं हो रहा है।