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विधानसभा चुनाव 2022 : रोड शो और पदयात्रा पर रोक ने बढ़ाई आईटी विशेषज्ञों की मांग

Fri, 28 Jan 2022 01:21 AM IST
Aligarh Bureau अलीगढ़ ब्यूरो
Updated Fri, 28 Jan 2022 01:21 AM IST
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Ban on roadshow and padyatra increased the demand of IT experts
कोरोना महामारी के साये में हो रहे विधानसभा चुनाव 2022 में फिलहाल, रोड शो, पदयात्रा समेत अन्य परंपरागत प्रचार साधनों पर रोक लगी हुई है। इस रोक से चुनाव प्रचार सोशल मीडिया तक सिमट कर रह गया है। इस स्थिति से आईटी विशेषज्ञों की मांग बढ़ गई है। हर कोई अपने अभियान को परवान चढ़ाने के लिए इन विशेषज्ञों को हाथों हाथ ले रहे हैं। कोई अपनी वेबसाइट बनवा रहा है तो कोई वीडियो या फिर फेसबुक पेज तैयार करा रहा है। ऐसे में आईटी विशेषज्ञ भी मुंह मांगी कीमत मांग रहे हैं।
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चुनाव आयोग ने कोरोना महामारी को देखते हुए विधानसभा चुनाव 2022 में रोड शो, रैली, पदयात्रा आदि पर 31 जनवरी तक रोक लगा दी है। इसका असर अलीगढ़ समेत प्रथम चरण के चुनाव वाले जिलों के प्रत्याशियों पर प्रभाव पड़ा है। अब तक रैली, घर-घर जनसंपर्क, रोड शो, पदयात्रा आदि के जरिए अपने चुनाव अभियान को परवान चढ़ाने वाले प्रत्याशियों को प्रचार की रणनीति बदलने पर मजबूर होना पड़ा है। अब तक गाहे बगाहे सोशल मीडिया का इस्तेमाल करने वाले प्रत्याशी अब सोशल मीडिया के जरिए ही अपने अभियान को अंजाम तक पहुंचाने के लिए व्यग्र हो उठे हैं। फेसबुक पेज, ट्विटर, इंस्टाग्राम, व्हाट्स एप एवं वेबसाइट के जरिए ये लोग अपनी राजनीतिक जमीन तलाशने लगे हैं। प्रत्याशियों के इस रुख के चलते जिले में आईटी विशेषज्ञों की डिमांड अचानक बढ़ गई है। बताते चलें कि जिले में यूूं तो हजारों की संख्या में आईटी विशेषज्ञ हैं। लेकिन व्यावसायिक काम करने वालों को अलग कर लें तो इनकी संख्या चार-पांच दर्जन के करीब है। इनके अलावा जन सुविधा केंद्र चलाने वाले भी चुनावी काम कर रहे हैं।
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मिल रहे हैं मुंह मांगे दाम
अलीगढ़। आईटी विशेषज्ञ दिवाकर सिंह ने बताया कि अधिकांश प्रत्याशी फेसबुक पेज के माध्यम से जनता से जुड़ रहे हैं। बड़े दलों के प्रत्याशियों में अपनी वेबसाइट बनवाने का भी चलन है। इसमें मुख्य रूप से डोमेन व होस्टिंग का खर्चा करीब 20 से 25 हजार रुपया आता है। कई विशेषज्ञ 50 हजार से एक लाख रुपये तक वसूल रहे हैं। जन सुविधा केंद्र चलाने वाले मनोज ने बताया कि प्रत्याशी वीडियो के माध्यम से भी अपने जन संपर्क अभियान का प्रचार प्रसार कर रहे हैं। आईटी विशेषज्ञ अमित ने बताया कि इस समय आईटी प्रोफेशनल्स की डिमांड बढ़ गई है। लोग अपनी पार्टी की अच्छाई के साथ नए-नए नारों के साथ विपक्षी दलों की बुराई भी अपने फेस बुक पेज, ट्विटर, इंस्टाग्राम एवं व्हाट्स एप संदेशों के माध्यम से कराना चाहते हैं।
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वर्ष 2008 में अमेरिका में राष्ट्रपति चुनाव में हुआ था पहली बार इस्तेमाल
अलीगढ़। फेसबुक पेज के जरिए अपनी अच्छाई और विपक्षी की बुराई को आम लोगों के सामने लाने के चलन की शुरुआत वर्ष 2008 में अमेरिका में हुए राष्ट्रपति चुनावों से हुई थी। अमेरिका के पहले अश्वेत राष्ट्रपति बने बराक ओबामा और उनके प्रतिद्वंदियों ने फेसबुक पेज का जमकर इस्तेमाल किया था। अब कोरोना महामारी के चलते प्रचार के तौर तरीकों पर लगे प्रतिबंध ने विधानसभा चुनाव 2022 में इस चलन में आम प्रत्याशियों को भी शामिल कर दिया है।
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