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आग से पहले जाग : इस शहर की सूरत भी सूरत से कम नहीं

Sun, 26 May 2019 01:58 AM IST
राजेश सिंह न्यूूज डेस्क, दीपक शर्मा  अलीगढ़।
न्यूूज डेस्क, दीपक शर्मा  अलीगढ़। Published by: राजेश सिंह Updated Sun, 26 May 2019 01:58 AM IST
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Awake before fire: The city's appearance is not less than the surat city
कोचिंग सेंटर में अग्निशमन सुविधा यंत्रों का जायजा लेते अग्नि शमन अधिकारी - फोटो : Dig Vishal
गुजरात के सूरत में कोचिंग सेंटर में हुए भीषण अग्निकांड से सबक लेते हुए अग्निशमन विभाग ने शहर की अनेक ऊंची इमारतों में अग्नि सुरक्षा मानकों की जांच की। इसमें पाया गया कि यहां भी आग से निपटने के इंतजामों की स्थिति सूरत जैसी ही है। 
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  शहर की इमारतों में चल रहे अनेक कोचिंग सेंटरों, अस्पतालों में इन मानकों की पूरी तरह अनदेखी की जा रही है। कुछ होटलों, व्यावसायिक कांप्लेक्स, हाउसिंग सोसायटियों में भी सुरक्षा मानकों का पालन नहीं हो रहा है। कई जगह सुरक्षा के उपकरण नदारद मिले। 
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कोचिंग सेंटरों का किया फायर आडिट
अग्निशमन विभाग द्वारा शनिवार को कोचिंग सेंटरों का फायर आडिट किया गया। इनमें आर्गेनन इंस्टीट्यूट, आकाश मेडिकल इंस्टीट्यूट, किशनपुर, ब्रिक्स पीएमटी इंस्टीट्यूट अब्दुल्ला रोड, बंसल क्लासेज लक्ष्मीबाई रोड, साकिर सर क्लासेज, नारायण क्लासेस सेंटर प्वाइंट पर फायर आडिट किया। इस अवसर पर अग्निशमन अधिकारी संजय जायसवाल, फायर मैन सतीश कुमार, गौरव सिंह सहित अन्य स्टाफ मौजूद था। यहां पर स्टाफ और अन्य छात्र छात्राओं को आग से  बचाव के उपाय, दुर्घटना के समय सुरक्षित कैसे निकलें आदि बताया गया। साथ ही फायर उपकरण चलाने की माक ड्रिल भी कराई गई। 
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अपनी पार्किंग तक नहीं : शहर में कुछ नर्सिंग होम, हास्पिटल का भवन मानकों के ही अनुरूप नहीं है। अधिकांश नर्सिंग होम के पास पार्किंग नहीं है। सेटबैक, अग्निकांड होने पर सेफ पैसेज, खुला एरिया आदि भी नहीं है। कुछ नर्सिंग होम में मरीजों के कमरों में क्रास वेंटीलेशन तक नहीं है। अंधेरे, सीलन भरे कमरों में मरीजों को धकेल दिया जाता है। 

एक ही निकास द्वार : रामघाट रोड पर कुछ नर्सिंग होम इस तरह हैं कि उनमें प्रवेश और बाहर निकलने का एक ही रास्ता है। अग्निकांड होने की स्थिति में अंदर का व्यक्ति बाहर नहीं आ सकता है और बाहर का व्यक्ति अंदर नहीं जा सकता है। कुछ नर्सिंग होम में अग्निकांड होने पर वहां राहत पहुंचने तक की जगह नहीं है। एक निकास द्वार का होना मानकों के विपरीत है। 

स्वास्थ्य विभाग का बाबू कर देता है सारे मानक पूरे
नर्सिंग होम में अग्निशमन उपायों की जांच परख के क्रम में पता चला है कि स्वास्थ्य विभाग में एक बाबू है जो नर्सिंग होम के लाइसेंसों के नवीनीकरण के समय अग्निशमन उपकरणों का फोटो खींच कर उन्हें संबंधित आवेदन के समय अपलोड कर देता है। यह दर्शा देता है कि यह उपकरण नर्सिंग होम में लगा है। इस  तरह जमीन पर वास्तविक काम हुए बिना ही कागजों पर मानक पूरे कर दिए जाते हैं।  

नर्सिंग होम के लिए कुछ अन्य सुरक्षा मानक
- न्यूनतम डेढ़ डेढ़ मीटर चौड़े दो दरवाजे होने चाहिए
- ऊपरी मंजिल पर ओवर हेड टैंक हो, जिसमें हमेशा पानी भरा रहे
- प्रत्येक मंजिल पर होज रील का इंतजाम हो

- जगह जगह अग्निशमन यंत्र लगे हों। 
- आपातकालीन संकेतक और फायर अलार्म हों
- अग्निशमन, पुलिस और इमरजेंसी नंबरों का डिस्प्ले हो

बेसमेंट में संचालन अवैध
मानकों के अनुरूप किसी भी नर्सिंग होम का संचालन बेसमेंट में नहीं किया जा सकता है। लेकिन शहर में दर्जनों बेसमेंट ऐसे हैं जिनका संचालन बेसमेंट में हो रहा है। कुछ नामी नर्सिंग होम का तो आईसीयू ही बेसमेंट में बना हुआ है। ऐेसे ही एक नर्सिंग होम में पिछले दिनों फायर ब्रिगेड ने माक ड्रिल का आयोजन भी किया। लेकिन तब इस मानक को नजर अंदाज ही कर दिया गया। 


‘फायर आडिट किया है। जहां पर भी कमी पाई है उनको मानक पूरा करने के लिए समय दे दिया गया है। कोई भी भवन हो, नर्सिंग होम हो, कामर्शियल इमारत हो, सभी को अग्नि सुरक्षा के मानक पूरे करने के नोटिस दिए हैं। वह अपने भवनों में अग्नि सुरक्षा इंतजाम कर लें। मानकों के अनुरूप बनाने के लिए जो भी बदलाव जरूरी हों वह भी कर लें। इसके बाद विभाग सख्त रुख अख्तियार करेगा’ - संजय कुमार जायसवाल, अग्निशमन अधिकारी
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