अलीगढ़ः जाकिर हुसैन कॉलेज के प्रोफेसर का आविष्कार, सोलर पैनल की सफाई करेगी स्वचालित प्रणाली
इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग विभाग के शिक्षक डॉ. मोहम्मद तारिक की खोज ‘एन आटोमेटेड क्लीनिंग सिस्टम ऑफ द सोलर पीवी पैनल और सन ट्रैकिंग मेकानिज्म विद एन इंटरनेट ऑफ थिंग्स (आईओटी) आधारित आटोमेटेड मूवेबल प्लेटफॉर्म’ को हाल ही में पेटेंट ऑफिस कामनवेल्थ ऑफ आस्ट्रेलिया द्वारा पेटेंट कराया गया है।
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अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (एएमयू) के जाकिर हुसैन कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी के इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग विभाग के शिक्षक डॉ. मोहम्मद तारिक के नए आविष्कारों के साथ इंटेलीजेंट हरित प्रौद्योगिकी और सतत भविष्य के लिए वैज्ञानिकों की खोज एक निष्कर्षपूर्ण प्रौद्योगिकी के करीब पहुंच रही है।
डॉ. तारिक की खोज ‘एन आटोमेटेड क्लीनिंग सिस्टम ऑफ द सोलर पीवी पैनल और सन ट्रैकिंग मेकानिज्म विद एन इंटरनेट ऑफ थिंग्स (आईओटी) आधारित आटोमेटेड मूवेबल प्लेटफॉर्म’ को हाल ही में पेटेंट ऑफिस कामनवेल्थ ऑफ आस्ट्रेलिया द्वारा पेटेंट कराया गया है और ऊर्जा के भविष्य के स्रोतों पर काम कर रहे शोधकर्ताओं व शिक्षाविदें का इस ओर ध्यान आकर्षित हो रहा है।
धूल, गंदगी और रेत की अधिकता वाले स्थानों के लिए डिजाइन किया पैनल
डॉ. तारिक ने कहा कि सौर पीवी पैनल की स्वचालित सफाई प्रणाली उन स्थानों के लिए डिजाइन की गई है, जहां चारों ओर धुंध, धूल, गंदगी और रेत उड़ती है। यह प्रणाली सिस्टम पैनल पर सभी गंदगी को हटाने में सफल है, जिससे अधिक कुशल और विश्वसनीय आउटपुट प्राप्त होता है। उन्होंने आगे कहा कि आईओटी आधारित आटोमेटेड मूवेबल प्लेटफॉर्म के साथ सन ट्रैकिंग मैकेनिज्म न केवल ऊर्जा कैप्चर की क्षमता को बढ़ाएगा, बल्कि अधिकतम बिजली उत्पादन के लिए आईओटी आधारित स्वचालित मूवेबल प्लेटफॉर्म के साथ समग्र बिजली उत्पादन प्रक्रिया की दक्षता को भी बढ़ावा देगा।
यह अविष्कार अक्षय ऊर्जा स्रोतों को देंगे बढ़ावा
उन्होंने कहा कि इस आविष्कार का उद्देश्य जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता को कम करना और विद्युत शक्ति के उत्पादन के लिए नवीकरणीय ऊर्जा को बढ़ावा देना है। डॉ. तारिक ने बताया कि इस आविष्कार से सौर पैनलों की सफाई के लिए अतिरिक्त जनशक्ति या रोबोट सिस्टम के उपयोग को कम करके सौर पीवी पैनल की स्वचालित सफाई प्रणाली से परिचालन लागत में भी कमी आएगी। उन्होंने जोर देकर कहा कि यह आविष्कार लचीले और कुशल सौर पीवी सिस्टम को सपोर्ट करने में सहायक होंगे और अक्षय ऊर्जा स्रोतों के विकास और उनको अपनाए जाने की संभावना को बढ़ाएंगे।
यह आविष्कार डॉ. तारिक ने अपनी छात्रा अलीना नाज, जो इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में बीई पूरा करने के बाद अपना अंतिम वर्ष का प्रोजेक्ट कर रही हैं व रिसर्च इंटर्न, प्रोग्रामर, मोहम्मद आजम के साथ मिलकर किया है। डॉ. तारिक, न्यू साउथ वेल्स विश्वविद्यालय, कैनबरा के साथ दो अंतर विश्वविद्यालय सहयोगी अनुसंधान परियोजनाओं में प्रमुख अन्वेषक भी हैं, जो यूएनएसडब्ल्यू, आस्ट्रेलिया के एक सहयोगात्मक अनुसंधान अनुदान योजना के तहत वित्त पोषित हैं।