{"_id":"582f5d254f1c1b6136901a6c","slug":"asif-s-afraid-of-life-from-the-captive","type":"story","status":"publish","title_hn":"नोट बंदी से आसिफ की जान के लाले ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
नोट बंदी से आसिफ की जान के लाले
अमर उजाला, अलीगढ़
Updated Sat, 19 Nov 2016 01:35 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
मोदी सरकार की नोटबंदी का आम जन मानस पर क्या असर हो रहा है, यह मोहल्ला पठानन गली बंजारन निवासी 22 वर्षीय आसिफ से समझा जा सकता है। ब्लड प्रेशर के कारण दोनों किडनी खराब होने से जिंदगी और मौत के बीच झूल रहे आसिफ का दिल्ली के नामचीन हॉस्पिटल ने पुरानी करेंसी का हवाला देकर उपचार से इंकार कर दिया है।
यह पैसा उसके हार्डवेयर कारोबारी पिता ने अपनी जमीन गिरवी रखकर जमा किया था। मोहल्ला पठानन गली बंजारन निवासी 22 वर्षीय आसिफ के पिता जाहिद हार्डवेयर सप्लायर हैं। उनके छह बच्चों में आसिफ सबसे छोटा है। पिछले दिनों ब्लड प्रेशर की वजह से उसकी तबीयत खराब हो गई।
उसे दिल्ली के एक हॉस्पिटल में भर्ती कराया था, जहां बताया कि उसकी दोनों किडनी खराब हो चुकी हैं। किडनी की तलाश की गई तो उसकी मां मुशर्रफ जहां की किडनी उससे मैच हो गई। किडनी प्रत्यारोपण के लिए डीएम की अध्यक्षता वाली जिला स्तरीय प्राधिकरण समिति से अनुमति मांगी गई। साथ ही कोल विधायक जमीरउल्लाह के लैटर पैड पर शासन से इलाज के लिए पैसा भी मांगा गया। इसकी फाइल लखनऊ में पेंडिंग है।
विज्ञापन
इधर प्राधिकरण की अनुमति के बाद अभी परिजन किडनी प्रत्यारोपण के लिए तैयारी कर ही रहे थे कि नोटबंदी का निर्णय लागू हो गया। पीड़ित के पिता जाहिद ने बताया कि जब वह अपने बेटे को लेकर हॉस्पिटल पहुंचा, तो वहां के प्रशासन ने पुराने नोट लेने से इंकार कर दिया।
मैने अपना मकान गिरवी रखकर व कारोबार में से कुछ हिस्सा निकालकर किसी तरह तीन लाख रुपये जमा किए थे, ताकि बेटे का इलाज तो शुरू हो जाए, लेकिन नोटबंदी ने उसके इलाज की आस ही तोड़ दी है। नए प्रावधान से मात्र दो हजार रुपये के नोट ही बदले जा सकते हैं। इतने में तो कोई मुझे इलाज तो दूर अस्पताल में घुसने तक नहीं देगा।
विज्ञापन
यह पैसा उसके हार्डवेयर कारोबारी पिता ने अपनी जमीन गिरवी रखकर जमा किया था। मोहल्ला पठानन गली बंजारन निवासी 22 वर्षीय आसिफ के पिता जाहिद हार्डवेयर सप्लायर हैं। उनके छह बच्चों में आसिफ सबसे छोटा है। पिछले दिनों ब्लड प्रेशर की वजह से उसकी तबीयत खराब हो गई।
विज्ञापन
उसे दिल्ली के एक हॉस्पिटल में भर्ती कराया था, जहां बताया कि उसकी दोनों किडनी खराब हो चुकी हैं। किडनी की तलाश की गई तो उसकी मां मुशर्रफ जहां की किडनी उससे मैच हो गई। किडनी प्रत्यारोपण के लिए डीएम की अध्यक्षता वाली जिला स्तरीय प्राधिकरण समिति से अनुमति मांगी गई। साथ ही कोल विधायक जमीरउल्लाह के लैटर पैड पर शासन से इलाज के लिए पैसा भी मांगा गया। इसकी फाइल लखनऊ में पेंडिंग है।
विज्ञापन
इधर प्राधिकरण की अनुमति के बाद अभी परिजन किडनी प्रत्यारोपण के लिए तैयारी कर ही रहे थे कि नोटबंदी का निर्णय लागू हो गया। पीड़ित के पिता जाहिद ने बताया कि जब वह अपने बेटे को लेकर हॉस्पिटल पहुंचा, तो वहां के प्रशासन ने पुराने नोट लेने से इंकार कर दिया।
मैने अपना मकान गिरवी रखकर व कारोबार में से कुछ हिस्सा निकालकर किसी तरह तीन लाख रुपये जमा किए थे, ताकि बेटे का इलाज तो शुरू हो जाए, लेकिन नोटबंदी ने उसके इलाज की आस ही तोड़ दी है। नए प्रावधान से मात्र दो हजार रुपये के नोट ही बदले जा सकते हैं। इतने में तो कोई मुझे इलाज तो दूर अस्पताल में घुसने तक नहीं देगा।