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36 साल में दूसरी बार सपाई बने अश्विनी

Sun, 11 Apr 2021 12:43 AM IST
Aligarh Bureau अलीगढ़ ब्यूरो
Updated Sun, 11 Apr 2021 12:43 AM IST
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ashwini become samajvadi twice between 36 year
कांग्रेस में 33 वर्ष लंबा सफर तय करने वाले वरिष्ठ नेता अश्विनी शर्मा एक बार फिर से सपाई हो गए हैं। शनिवार को लखनऊ में उन्होंने सपा अध्यक्ष एवं पूर्व सीएम अखिलेश यादव के समक्ष पार्टी की सदस्यता ग्रहण की। वह पूर्व में भी तीन वर्ष (1996 से 98) तक सपा के जिलाध्यक्ष रह चुके हैं, इसलिए सपा में उनकी ये दूसरी पारी है। कुल 36 वर्ष के राजनीतिक सफर में 33 वर्ष तक अश्विनी कांग्रेसी रहे हैं।
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अश्विनी शर्मा ने कहा कि कांग्रेस में अब निष्ठावान लोगों की कद्र नहीं हो रही है, इसलिए पुराने लोग पार्टी छोड़ रहे हैं। बीती 28 फरवरी को अश्विनी शर्मा ने कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष अजय कुमार लल्लू पर सीधा आरोप लगाया था कि वह वरिष्ठ कांग्रेसियों पर ध्यान नहीं दे रहे हैं। इसलिए अब वह खुद सोचने पर मजबूर हो गए हैं कि कांग्रेस में रहें या छोड़ दें।
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अमर उजाला ने एक मार्च के अंक में इस खबर को प्रमुखता से प्रकाशित कर उनके सपा में जाने का संकेत दिया था। अश्विनी शर्मा बीती 19 फरवरी को सपा के राष्ट्रीय महासचिव प्रो. रामगोपाल यादव से और 22 फरवरी को प्रयागराज में सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव से मिले थे। उन्होंने सपा के टिकट पर बरौली विधानसभा से चुनाव लड़ने की इच्छा जाहिर की थी, लेकिन इस पर फैसला नहीं हो पाया था। तभी से यह बात तय मानी जा रही थी कि वह कभी भी पूर्ण रूप से सपाई हो जाएंगे।
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अश्विनी शर्मा का राजनीतिक सफर
अश्विनी शर्मा के 36 वर्ष के राजनीतिक सफर पर नजर डालें तो सक्रिय राजनीति में उनका पदार्पण वर्ष 1984-85 में यूथ कांग्रेस से हुआ। इसके बाद वह यूथ कांग्रेस में वर्ष 1986 से 91 तक जिलाध्यक्ष रहे। वर्ष 1991 से 92 तक यूथ कांग्रेस के प्रदेश महामंत्री रहे। वर्ष 1995 से 96 तक कांग्रेस तिवारी के जिलाध्यक्ष रहे। इसके बाद उन्होंने कांग्रेस का हाथ छोड़ा और सपा की साइकिल पर सवार हो गए।
सपा में वर्ष 1996 से 98 तक जिलाध्यक्ष रहे। वर्ष 1998 में वह फिर कांग्रेस में वापस आए और वर्ष 2000 तक कांग्रेस पंचायत राज प्रकोष्ठ के प्रदेश अध्यक्ष रहे। वर्ष 2000 में यूपी कांग्रेस सचिव बने। वर्ष 2004 और 2007 में अतरौली से कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़े, मगर हार गए।

इसके बाद हाथरस और मैनपुरी के पदाधिकारी रहे। वर्ष 2015 में कांग्रेस प्रदेश संगठन महामंत्री बनाए गए। वर्ष 2017 में भिंड-मुरैना और 2018 में चंबल-भोपाल के प्रभारी नियुक्त किए गए। इस बीच वह लगातार कांग्रेस में रहने के दौरान प्रदेश कांग्रेस सदस्य रहे।
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