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बच गई जमीन और जान, शुक्रिया आयुष्मान

Thu, 19 Sep 2019 01:24 AM IST
Aligarh Bureau अलीगढ़ ब्यूरो
Updated Thu, 19 Sep 2019 01:24 AM IST
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Arti said land or life save, thanks Ayushman
आयुष्मान भारत योजना के तहत लाभार्थी आरती देवी के साथ सत्येन्द्र व डा. दीपक वार्ष्णेय। - फोटो : CITY OFFICE
दीपक शर्मा
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नौरंगाबाद की रहने वाली आरती देवी की जिंदगी पिछले तीन वर्ष से दिल की बीमारी के चलते बेहद दुश्वार हो चली थी। इसी तरह उनके भाई सतेंद्र कुमार भी लिवर के संक्रमण के चलते बहुत परेशान थे, लेकिन पांच महीने पहले आयुष्मान योजना के तहत मिले गोल्ड कार्ड से मिले बेहतर उपचार के चलते अब दोनों भाई बहनों की जिंदगी खुशहाल हो चली है। आरती देवी के हार्ट में दो वाल्व डाले गए हैं। जबकि सतेंद्र को भी शहर के ही जीवन ज्योति हास्पिटल में इलाज मिला। दोनों भाई बहन अब सामान्य स्थिति में हैं।
इससे पहले आर्थिक रूप से बेहद कमजोर इन परिवारों के समक्ष यह स्थिति आ गई थी कि इलाज के लिए अपनी छोटी सी जमीन तक बेचने की योजना बन रहे थे। लेकिन आयुष्मान ने जमीन भी बचा ली और जान भी। दोनों भाई बहनों को पिछले दिनों इगलास में आए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गोल्ड कार्ड की बड़ी प्रतिकृति देकर सम्मानित भी किया था। योजना का लाभ उठा चुके सतेंद्र कुमार ने बताया कि उनके जीजा महेश कुमार प्रेमी की एटा चुंगी पर राशन की दुकान है।
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घर में दो बेटी दुर्गेश और राधा सिंह व दो बेटे रोहित राज व गगन राज हैं। सभी बच्चे छोटे हैं। परिवार की आर्थिक स्थिति बेहद कमजोर है। पिछले तीन वर्ष से उन्हें हार्ट की तकलीफ थी। जिंदगी बचाने को डाक्टरों ने दिल में वाल्व डालने की सलाह दी थी, लेकिन परिवार की आर्थिक स्थिति ऐसी नहीं थी कि इतना महंगा इलाज करवा सकें, लेकिन 7 फरवरी 2019 को आयुष्मान योजना के तहत मिले गोल्डन कार्ड ने परिवार में खुशियां ला दीं। अनीता देवी का आगरा के पुष्पांजलि हास्पिटल में आपरेशन हुआ। दो वाल्व डाले गए। इसके बाद अब अनीता देवी पूरी तरह स्वस्थ हैं।
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उनके भाई सतेंद्र को भी इसी वर्ष के शुरू में लीवर इंफेक्शन पाया गया। इनका गोल्डन कार्ड अप्रैल 2019 में बना। सतेंद्र डीएस कालेज से एमकाम कर रहे हैं। वह जीवन ज्योति हास्पिटल में पांच दिन भर्ती रहे। जिससे वह अपनी बीमारी से उबर सके। सतेंद्र कहते हैं कि उनके पिता किसान मजदूर हैं। घर में जमीन के नाम पर एक छोटा सा टुकड़ा है, जिसे इलाज के लिए बेचने की योजना बन रही थी। लेकिन योजना ने उनकी जमीन बचा ली।
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हमें खुशी है कि हम सतेंद्र का सफल इलाज कर सके। योजना के तहत उसका इलाज के बाद हमें भी सरकार की ओर से भुगतान मिला। इस माध्यम से हमें भी जरूरत मंदों के लिए कुछ करने का अवसर मिला।
- डॉ. राजेश्वर चौधरी, जीवन ज्योति हास्पिटल, (सतेंद्र का इलाज करने वाले)
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योजना के तहत लाभार्थियों के गोल्ड कार्ड बनाने के लिए हम 3 सितंबर से 30 सितंबर तक कैंप लगाकर अभियान चला रहे हैं। अब तक 16 कैंप लगाए हैं। इनमें 1500 से ज्यादा गोल्ड कार्ड बने हैं। कोशिश है समाज के अंतिम व्यक्ति तक बेहतर चिकित्सा सुविधा पहुंचे।

- डॉ. खान चंद्र, एसीएमओ, नोडल अधिकारी, आयुष्मान भारत योजना
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गोल्ड कार्ड के लिए रैली निकाली
आयुष्मान भारत योजना के तहत गोल्ड कार्ड बनवाने के लिए बुधवार को अतरौली में गोल्डन कार्ड अभियान रैली भी निकाली गई। जिले में 2.25 लाख से अधिक लाभार्थियों के गोल्ड कार्ड बनाने का लक्ष्य है। जिससे यह लोग सुपर स्पेशियलिटी मेडिकल सुविधा के कवर में आ सकें।

डा. खानचन्द्र।  नोडल अधिकारी आयुष्मान भारत।

डा. खानचन्द्र। नोडल अधिकारी आयुष्मान भारत।- फोटो : CITY OFFICE

डा. राजेश्वर चौधरी।

डा. राजेश्वर चौधरी।- फोटो : CITY OFFICE

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