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हाईकोर्ट से राहत: एएमयू के पूर्व शोध छात्र की गिरफ्तारी को बताया अवैध, तत्काल जेल से रिहा करने के दिया आदेश
Sat, 02 May 2026 11:28 AM IST
Chaman Kumar Sharma
अमर उजाला नेटवर्क, अलीगढ़
अमर उजाला नेटवर्क, अलीगढ़
Published by: Chaman Kumar Sharma
Updated Sat, 02 May 2026 11:28 AM IST
सार
6 मार्च को थाना क्वार्सी क्षेत्र में अनूपशहर रोड पर एफएम टावर के पास एक्वा वाटर पार्क में शादी कार्यक्रम के दौरान फायरिंग की घटना हुई थी। सीसीटीवी फुटेज में एएमयू छात्र शहबाज को फायरिंग करते हुए पहचाना गया था।
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कोर्ट (प्रतीकात्मक फोटो)
- फोटो : एएनआई
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विस्तार
अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के सर जियाउद्दीन (एसजेड) हॉल से 9 मार्च 2026 को नकली नोट, मैगजीन, कारतूस मिलने पर गिरफ्तार किए गए पूर्व शोध छात्र आसिफ इदरीस की गिरफ्तारी हाईकोर्ट ने अवैध करार दी। उन्हें तत्काल जेल से रिहा करने का आदेश दिया। हाईकोर्ट ने कहा कि गिरफ्तारी के कारणों की जानकारी न देना और नियमों का पालन न करना कानून का उल्लंघन है।
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न्यायमूर्ति सिद्धार्थ और न्यायमूर्ति विनय कुमार द्विवेदी की खंडपीठ ने आसिफ इदरीस की बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश दिया। याचिकाकर्ता के वकीलों ने दलील दी कि आसिफ को 9 अप्रैल 2026 को उठाया गया था, जबकि कागजों में गिरफ्तारी 10 अप्रैल दिखाई गई। सबसे महत्वपूर्ण बात यह रही कि गिरफ्तारी के ठोस कारण न तो आरोपी को बताए गए और न ही उसके परिवार को लिखित में दिए गए।
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6 मार्च को थाना क्वार्सी क्षेत्र में अनूपशहर रोड पर एफएम टावर के पास एक्वा वाटर पार्क में शादी कार्यक्रम के दौरान फायरिंग की घटना हुई थी। सीसीटीवी फुटेज में एएमयू छात्र शहबाज को फायरिंग करते हुए पहचाना गया था। पुलिस को संदेह था कि ये लोग आपराधिक गतिविधियों, हथियारों की तस्करी और फर्जी दस्तावेज बनाने में संलिप्त हो सकते हैं। सिविल लाइंस थाने में एफआईआर दर्ज कर कमरा सील कर दिया गया था। इसी के चलते पुलिस ने अपनी ओर से इस मामले में एफआईआर दर्ज कर ली थी।
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सीसीटीवी फुटेज और जांच के बाद पुलिस एएमयू में एमसीए द्वितीय वर्ष के छात्र शहंशाहबाद निवासी शहबाज की तलाश में एसजेड हॉल के जफर अहमद सिद्दकी हॉस्टल के कमरा नंबर जेड - 34 में पहुंची। उसके कमरे की तलाशी में नकली नोट, मैगजीन, कारतूस आदि मिले।एमबीए छात्र बरेली निवासी आकिल और मुरादाबाद निवासी एमसीए छात्र मुदस्सिर का लैपटाव व अन्य दस्तावेज मिले। जांच में यह भी सामने आया कि इन आरोपियों के भागने में मदद एएमयू विदेशी भाषा के पूर्व छात्र आसिफ इदरीश ने की है। इसी के चलते पुलिस ने आसिफ इदरीश को गिरफ्तार किया था, जिसे न्यायालय ने जेल भेजा था।
हाईकोर्ट ने यह भी कहा
- पुलिस की यह कार्यप्रणाली सुप्रीम कोर्ट द्वारा मिहिर राजेश शाह और गौतम नवलखा जैसे मामलों में तय किए गए दिशा-निर्देशों के बिल्कुल विपरीत है। अदालत ने नाराजगी जताते हुए कहा कि केवल गिरफ्तारी मेमो पर हस्ताक्षर करवा लेना काफी नहीं है, बल्कि आरोपी को उसके अधिकारों और गिरफ्तारी के आधारों की लिखित प्रति देना अनिवार्य है।
- रिमांड मजिस्ट्रेट ने बिना यह सुनिश्चित किए कि पुलिस ने सभी कानूनी प्रक्रियाओं का पालन किया है या नहीं, रिमांड मंजूर कर दी। हाईकोर्ट ने संबंधित मजिस्ट्रेट को भविष्य में न्यायिक कार्यों के प्रति अधिक सतर्क रहने की हिदायत दी है।
- 9 और 13 अप्रैल के गिरफ्तारी मेमो तथा 10 अप्रैल के रिमांड आदेश को रद्द करते हुए याचिका स्वीकार कर ली। कोर्ट ने प्रशासन को निर्देश दिया कि आदेश की प्रमाणित प्रति का इंतजार किए बिना बंदी को तत्काल आजाद किया जाए। इस आदेश की प्रति अलीगढ़ के जिला जज और एसएसपी को तीन दिनों के भीतर भेजने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि भविष्य में ऐसी गलतियों की पुनरावृत्ति न हो।