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सेहत से खिलवाड़: सुगंध के नाम पर शुद्धता का सौदा, 40 रुपये के अर्क से बन रहा 15 किलो देसी घी

Mon, 27 Apr 2026 09:07 AM IST
Chaman Kumar Sharma अमर उजाला नेटवर्क, अलीगढ़
अमर उजाला नेटवर्क, अलीगढ़ Published by: Chaman Kumar Sharma Updated Mon, 27 Apr 2026 09:07 AM IST
सार

सूत्रों के अनुसार रिफाइंड, वनस्पति घी, तिल का तेल आदि मिलाकर देसी घी तैयार किया जाता है, जिसमें 4000 रुपये प्रति किलो मिलने वाले घी के अर्क को 10 ग्राम मिलाकर 15 किलो देसी घी तैयार किया जाता है। इसे बाद में अलग-अलग ब्रांडों के नाम से बेचा जाता है।

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aromatic desi ghee
घी - फोटो : istock

विस्तार

अलीगढ़ के बाजार में अगर आप देसी घी खरीदने जा रहे हैं तो उसकी सुगंध पर न जाएं, बाजार में सस्ते में मिलने वाला देसी घी मिलावटी या सिंथेटिक हो सकता है। मात्र 40 रुपये के अर्क (बटर एसेंस) से 15 किलो घी तैयार कर बेचा जा रहा है। ऐसे में पता नहीं चलेगा कि पैकिंग में बिकने वाला कौन सा घी असली है और कौन सा नकली।

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गुणवत्ता के मानकों पर खरा नहीं उतरने पर हाल ही में खाद्य एवं औषधि प्रशासन (एफडीए) विभाग ने छह नामी कंपनियों के देसी घी उत्पाद पर प्रतिबंध लगाया है। देसी घी बिक्री से जुड़े कारोबारियों की मानें तो अलीगढ़ में 20 टन से ज्यादा माल की हर दिन खपत है, जिसमें काफी माल ब्रांडेड कंपनियों का बिकता है और कुछ खुला बिक्री वाला माल भी बिकता है।
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जिले में करीब छह बड़ी नामी कंपनियां देसी घी बना रही हैं, जबकि दस से ज्यादा बाहरी कंपनियों के उत्पाद बाजार में बिक्री के लिए आ रहे हैं। इन सभी के द्वारा नियमित अपने बैच की जांच खुद की स्थापित या निजी प्रयोगशालाओं में कराई जाती है। इसमें जांच मानक (बीआर, आरएम, सेपोनिफिकेशम, आयोडीन, कलर) आदि की रिपोर्ट का उल्लेख बैच पर किया जाता है। इसके बाद एफडीए स्तर से भी समय समय पर नमूने लेकर जांच कराई जाती है।

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बाजार में बिकने वाला देसी घी ब्रांडेंड कंपनियों द्वारा प्रयोगशालाओं में जांच के बाद ही बेचा जाता है। इसके अलावा विभाग भी समय-समय पर नमूने लेकर जांच करता है। हाल ही में छह कंपनियों के ब्रांड प्रतिबंधित किए गए हैं। लोगों से अपील है कि अच्छे ब्रांड पर ही भरोसा कर सकते हैं। जो ब्रांड बाजार में कम दिखते हैं और सस्ते में बेचे जाते हैं, उन पर भरोसा न करें।-डा.दीनानाथ यादव, सहायक आयुक्त एफडीए

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अलीगढ़ में बिक रहा था 300 रुपये किलो देसी घी
 पिछले एक वर्ष में एफडीए ने पांच बड़ी कार्रवाई मिलावटी या सिंथेटिक देसी घी पर की हैं। इनमें पहली कार्रवाई गंगीरी में हुई थी। उस समय खुलासा हुआ था कि ब्रांडेड कंपनियों के नाम से अर्क की मिलावट से घी तैयार कर उसे 300 रुपये प्रतिकिलोग्राम की दर से बेचा जा रहा था। इसके अलावा खैर, गोंडा, हरदुआगंज व हाल में इगलास में भी इसी तरह का भंडाफोड़ किया है। ये सभी दूसरे राज्यों से मिलावटी माल लाकर यहां ब्रांडेड कंपनियों की पैकिंग में बेच रहे थे। महावीरगंज में भी एक मर्तबा तिल के तेल की मिलावट वाला देसी घी पकड़ा गया था, जिसे पूजा के लिए इस्तेमाल होने वाला घी बताकर बेचा जा रहा था।

ऐसे बन रहा सिंथेटिक घी
सूत्रों के अनुसार रिफाइंड, वनस्पति घी, तिल का तेल आदि मिलाकर देसी घी तैयार किया जाता है, जिसमें 4000 रुपये प्रति किलो मिलने वाले घी के अर्क को 10 ग्राम मिलाकर 15 किलो देसी घी तैयार किया जाता है। इसे बाद में अलग-अलग ब्रांडों के नाम से बेचा जाता है। पूर्व में गंगीरी सहित पांच स्थानों पर पकड़े गए घी के नमूनों की जांच में इसका खुलासा हुआ था।

असली घी की लागत का गणित
ब्रांड नाम से पैकिंग में बेचने वाली अधिकतर कंपनियां दूध से क्रीम से घी बनाकर बेचती हैं। इसकी कीमत 800 रुपये से 1000 रुपये किलो तक रही है। खुले में घी बेचने वाले दुकानदार या फड़िहा गंगा सहारे की पट्टी के पशु उत्पादकों से कच्चा घी या परंपरागत नौनी घी खरीदते हैं। उससे देसी घी तैयार किया जाता है। इसकी कीमत 1200 रुपये किलो से 1500 या उच्च गुणवत्ता वाले की 1800 रुपये किलो तक रहती है।

लागत से कम है दाम तो गुणवत्ता पर उठेंगे ही सवाल

  • 15 से 20 लीटर दूध से बनता है करीब एक किलो देसी घी
  • 2 से ढाई किलो क्रीम से एक किलो देसी घी बनाने का औसत
  • 600 से 700 रुपये किलो थोक में एक किलो घी की लागत
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