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आलमपुर चौराहे की बदलेगी सूरत
भूपेंद्र चौधरी
Updated Mon, 04 Jul 2016 01:13 AM IST
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अमर उजाला पढ़ते शिवपाल सिंह यादव।
- फोटो : अलीगढ़/ब्यूरो
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अमर उजाला ने शनिवार 2 जुलाई के अंक में पृष्ठ नंबर 4 पर ‘आलमपुर चौराहा.. नौ बार जीतकर भी हार गया’ शीर्षक के साथ सांकरा-छर्रा रोड और आलमपुर चौराहे का हाल बयां किया था। इसी आलमपुर चौराहे पर सपा प्रमुख मुलायम सिंह यादव ने आठ बार और उनके पुत्र सीएम अखिलेश यादव ने दो बार जनसभा कर अपने उम्मीदवार जीताए।
स्व. बाबू सिंह यादव और उनके पुत्र वीरेश यादव यहां से नौ बार विधायक बने, लेकिन 150 गांवों में यादवों की राजनीति का केंद्र रहे इस चौराहे पर आज तक कोई काम नहीं हुआ। कबीना मंत्री शिवपाल सिंह यादव ने जब रविवार को ये खबर पढ़ी तो उन्हें बेहद अफसोस हुआ।
गंगा पुल का लोकार्पण करते हुए अपने संबोधन में उन्होंने इसका जिक्र किया। बोले.. अगर विधायक वीरेश यादव ने इस बदहाली का जिक्र किया होता तो आज इस सड़क का भी शिलान्यास होने के साथ चौराहे के सौंदर्यीकरण का भी काम शुरू हो जाता। कबीना मंत्री ने मंच से इसकी घोषणा की और अधिकारियों को तत्काल कार्य प्रारंभ करने के निर्देश दिए। जल्द से जल्द सड़क सही करने के निर्देश दिए और अमर उजाला की उस खबर को अपनी फाइल में लगाया, ताकि उन्हें इसकी याद बनी रहे।
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गौर हो कि सांकरा से छर्रा की दूरी 17 किमी है। छर्रा से वाया आलमपुर-सांकरा रोड पांच साल से जर्जर हाल में है। महज 20 मिनट में तय होने वाला सफर दो से ढाई घंटे में तय हो रहा है। 150 गांवों के लोगों के आवागमन के लिए यही रोड है। सबसे ज्यादा परेशानी किसानों को होती है जब वह अनाज बेचने छर्रा मंडी जाते हैं। क्योंकि गहरे गड्ढों में वाहन पलट तक जाते हैं।
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स्व. बाबू सिंह यादव और उनके पुत्र वीरेश यादव यहां से नौ बार विधायक बने, लेकिन 150 गांवों में यादवों की राजनीति का केंद्र रहे इस चौराहे पर आज तक कोई काम नहीं हुआ। कबीना मंत्री शिवपाल सिंह यादव ने जब रविवार को ये खबर पढ़ी तो उन्हें बेहद अफसोस हुआ।
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गंगा पुल का लोकार्पण करते हुए अपने संबोधन में उन्होंने इसका जिक्र किया। बोले.. अगर विधायक वीरेश यादव ने इस बदहाली का जिक्र किया होता तो आज इस सड़क का भी शिलान्यास होने के साथ चौराहे के सौंदर्यीकरण का भी काम शुरू हो जाता। कबीना मंत्री ने मंच से इसकी घोषणा की और अधिकारियों को तत्काल कार्य प्रारंभ करने के निर्देश दिए। जल्द से जल्द सड़क सही करने के निर्देश दिए और अमर उजाला की उस खबर को अपनी फाइल में लगाया, ताकि उन्हें इसकी याद बनी रहे।
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गौर हो कि सांकरा से छर्रा की दूरी 17 किमी है। छर्रा से वाया आलमपुर-सांकरा रोड पांच साल से जर्जर हाल में है। महज 20 मिनट में तय होने वाला सफर दो से ढाई घंटे में तय हो रहा है। 150 गांवों के लोगों के आवागमन के लिए यही रोड है। सबसे ज्यादा परेशानी किसानों को होती है जब वह अनाज बेचने छर्रा मंडी जाते हैं। क्योंकि गहरे गड्ढों में वाहन पलट तक जाते हैं।