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अपराजिता : ‘आज समझ पाती हूं, मां की आंखों से निरंतर झरते जीवन का अर्थ’
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टीकाराम डिग्री कॉलेज में अमर उजाला अपराजिता द्वारा आयोजित कार्यक्रम उपस्थित छात्राएं।
- फोटो : CITY OFFICE
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टीकाराम कन्या महाविद्यालय के हिंदी विभाग में शिक्षिकाओं और छात्राओं ने स्वरचित और देश के उत्कृष्ट कवियों की रचनाएं प्रस्तुत करके खूब प्रशंसा बटोरीं। रचनाओं में जहां नारी के शक्ति का वर्णन किया गया, वहीं, उसकी वेदना को भी उकेरा गया। काव्य पाठ का आयोजन अमर उजाला अपराजिता व टीकाराम कन्या महाविद्यालय के संयुक्त तत्वावधान में किया गया।
हिंदी विभाग की एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. मिश्कात आबिदी ‘प्रेरणा’ ने ‘पुत्र को जन्म दे कर, अजन्मी कन्या, अभिशप्त समाज से, बचा लिए जाने के सुख से, लेती है गहरी लंबी सांस’ सुनाया। शिक्षिका जगपती ने ‘आज समझ पाती हूं, मां की आंखों से निरंतर झरते जीवन का अर्थ, अनमोल भावों की नरमी का महत्व और इसके दरदरे आंचल में सितारों को समेट लेने का हुनर’ सुनाया।
शिक्षिका प्रेरणा ने डॉ. मिश्कात आबिदी की रचना ‘अधिकार भीख में नहीं मिलते छीनकर लेना पड़ता है, अपनी बात को बताने के लिए बोलना पड़ता है’ सुनाई।
छात्रा लवली ने कवि रामधारी सिंह दिनकर की रचना ‘सच है विपत्ति जब आती है, कायर को ही दहलाती है, सूरमा नहीं विचलित होते, क्षण एक नहीं धीरज खोते’ सुनाई। कीर्ति ने डॉ. मिश्कात आबिदी की रचना ‘औरत हूं सदियों से बंदिनी हूं, पाजेब की बेड़ियां, चूड़ियों की हथकड़ियां’सुनाईं। छात्रा रीनू शर्मा ने कवि जयशंकर प्रसाद की कविता ‘इस करुणा कलित हृदय में, अब विकल रागिनी बजती, क्यों हाहाकार स्वरों से, वेदना असीम गरजती’ का पाठ किया। छात्रा मनीषा ने कवि अभिषेक सिंह की कविता ‘हर घर में नारी के सपने खुद का इक आकाश चुनें, बाप का सीना बनें, हिमालय हर बेटी विश्वास बनें’ का पाठ किया।
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छात्रा मोनिका शर्मा ने कवि डॉ. दौलतराम शर्मा की कविता ‘मेरी बिटिया मेरी गुड़िया नित नए रूप सजाती है, खुशबू सी उड़ती रहती है घर सारा महकाती है’ का पाठ किया। छात्रा तनु ने कवि अटल बिहारी वाजपेयी की कविता ‘क्या खोया क्या पाया जग में, मिलते और बिछड़ते मग में, मुझे किसी से नहीं शिकायत, यद्यपि छला गया पग-पग में’ का पाठ किया। छात्रा पूनम ने कवि मैथिलीशरण गुप्त की कविता ‘दीपक के जलने में आती फिर भी है जीवन की लाली, किंतु पतंग-भाग्य लिपि काली किसका वश चलता है’ का पाठ किया। छात्रा शालिनी ने कवि जयशंकर प्रसाद की कविता ‘क्या कहती हो ठहरो नारी, संकल्प अश्रु जल से अपने, तुम दान कर चुकी पहले ही, जीवन के सुंदर से सपने’ का पाठ किया।
छात्रा लोकेश यादव ‘आरुषि’ ने सुनाई ‘ भारत माता के बेटे ने अपना फर्ज निभाया है, आज फिर से एक बेटा तिरंगे में लिपटकर आया है’। छात्रा शिवांगी, हिंदी विभाग की अध्यक्ष कविता रानी शिक्षिका कल्पना कौशिक, सुचेता शर्मा, सोफिया खातून ने रचना प्रस्तुत की।
अमर उजाला की पहल सराहनीय है, जहां नारी का सम्मान होता है, वहां समृद्धि, शांति होती है। नारी शक्ति ने अपनी शक्ति से अलग पहचान बनाई है। - डॉ. शाहनवाज खान, प्रभारी, शारीरिक शिक्षा विभाग, एसवी कॉलेज
अमर उजाला बधाई का पात्र है। काव्य पाठ में शिक्षिकाओं व छात्राओं ने सुंदर प्रस्तुति दी। उनकी कविताओं में नारी की महिमा की झलक दिखी। - डॉ. शर्मिला शर्मा, प्राचार्या, टीकाराम कन्या महाविद्यालय
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हिंदी विभाग की एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. मिश्कात आबिदी ‘प्रेरणा’ ने ‘पुत्र को जन्म दे कर, अजन्मी कन्या, अभिशप्त समाज से, बचा लिए जाने के सुख से, लेती है गहरी लंबी सांस’ सुनाया। शिक्षिका जगपती ने ‘आज समझ पाती हूं, मां की आंखों से निरंतर झरते जीवन का अर्थ, अनमोल भावों की नरमी का महत्व और इसके दरदरे आंचल में सितारों को समेट लेने का हुनर’ सुनाया।
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शिक्षिका प्रेरणा ने डॉ. मिश्कात आबिदी की रचना ‘अधिकार भीख में नहीं मिलते छीनकर लेना पड़ता है, अपनी बात को बताने के लिए बोलना पड़ता है’ सुनाई।
छात्रा लवली ने कवि रामधारी सिंह दिनकर की रचना ‘सच है विपत्ति जब आती है, कायर को ही दहलाती है, सूरमा नहीं विचलित होते, क्षण एक नहीं धीरज खोते’ सुनाई। कीर्ति ने डॉ. मिश्कात आबिदी की रचना ‘औरत हूं सदियों से बंदिनी हूं, पाजेब की बेड़ियां, चूड़ियों की हथकड़ियां’सुनाईं। छात्रा रीनू शर्मा ने कवि जयशंकर प्रसाद की कविता ‘इस करुणा कलित हृदय में, अब विकल रागिनी बजती, क्यों हाहाकार स्वरों से, वेदना असीम गरजती’ का पाठ किया। छात्रा मनीषा ने कवि अभिषेक सिंह की कविता ‘हर घर में नारी के सपने खुद का इक आकाश चुनें, बाप का सीना बनें, हिमालय हर बेटी विश्वास बनें’ का पाठ किया।
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छात्रा मोनिका शर्मा ने कवि डॉ. दौलतराम शर्मा की कविता ‘मेरी बिटिया मेरी गुड़िया नित नए रूप सजाती है, खुशबू सी उड़ती रहती है घर सारा महकाती है’ का पाठ किया। छात्रा तनु ने कवि अटल बिहारी वाजपेयी की कविता ‘क्या खोया क्या पाया जग में, मिलते और बिछड़ते मग में, मुझे किसी से नहीं शिकायत, यद्यपि छला गया पग-पग में’ का पाठ किया। छात्रा पूनम ने कवि मैथिलीशरण गुप्त की कविता ‘दीपक के जलने में आती फिर भी है जीवन की लाली, किंतु पतंग-भाग्य लिपि काली किसका वश चलता है’ का पाठ किया। छात्रा शालिनी ने कवि जयशंकर प्रसाद की कविता ‘क्या कहती हो ठहरो नारी, संकल्प अश्रु जल से अपने, तुम दान कर चुकी पहले ही, जीवन के सुंदर से सपने’ का पाठ किया।
छात्रा लोकेश यादव ‘आरुषि’ ने सुनाई ‘ भारत माता के बेटे ने अपना फर्ज निभाया है, आज फिर से एक बेटा तिरंगे में लिपटकर आया है’। छात्रा शिवांगी, हिंदी विभाग की अध्यक्ष कविता रानी शिक्षिका कल्पना कौशिक, सुचेता शर्मा, सोफिया खातून ने रचना प्रस्तुत की।
अमर उजाला की पहल सराहनीय है, जहां नारी का सम्मान होता है, वहां समृद्धि, शांति होती है। नारी शक्ति ने अपनी शक्ति से अलग पहचान बनाई है। - डॉ. शाहनवाज खान, प्रभारी, शारीरिक शिक्षा विभाग, एसवी कॉलेज
अमर उजाला बधाई का पात्र है। काव्य पाठ में शिक्षिकाओं व छात्राओं ने सुंदर प्रस्तुति दी। उनकी कविताओं में नारी की महिमा की झलक दिखी। - डॉ. शर्मिला शर्मा, प्राचार्या, टीकाराम कन्या महाविद्यालय