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एएमयू प्रोफेसर से साइबर ठगी में एक और गिरफ्तार
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लड़की की फेक फेसबुक आईडी बनाकर साइबर ठगी करने वाले अंतरराज्यीय गिरोह का एक और शातिर सदस्य साइबर थाना पुलिस ने गिरफ्तार किया है। यह जयपुर राजस्थान का रहने वाला है। इसके तीन साथी पूर्व में गिरफ्तार किए जा चुके हैं। इस गिरोह ने अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के एक शिक्षक के साथ भी साइबर ठगी की घटना को अंजाम दिया था।
साइबर थाने के प्रभारी सुरेंद्र सिंह ने बताया कि 19 मई 2021 को अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के एक प्रोफेसर ने सूचना दी थी कि कुछ साइबर ठगी करने वाले फर्जी तरीके से वीडियो कॉल से बनी वीडियो के माध्यम से उन्हें ब्लैकमेल कर रहे हैं। अब तक यह ठगी करने वाले तीन लाख 13 हजार रुपये ठग चुके हैं।
अब और पैसों की मांग कर रहे हैं। इस पर पुलिस ने अज्ञात लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया। विवेचना के दौरान पाया कि यह सब कारनामा झांसी से अंजाम दिया गया है। जून माह में पुलिस तीन आरोपियों तक पहुंच गई। पुलिस ने 15 जून को अशफाक खान, मोहम्मद जावेद खान और मोहम्मद शोएब को झांसी से गिरफ्तार था।
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उस समय उनका एक साथी फरार था। अब आकर उनके गैंग के चौथे साथी जयपुर विवेक विहार कॉलोनी हनुमान मंदिर के पीछे विजयपुरा सुमेल के संजय सिंह को गिरफ्तार किया है। उसके पास से मोबाइल के अलावा कई एटीएम कार्ड, पहचान पत्र आदि बरामद हुए हैं।
इस तरह करते थे ब्लैकमेल
पूछताछ में आरोपी ने पुलिस को बताया कि वह लड़की के नाम से एक फर्जी सोशल मीडिया की आईडी बनाते थे। उस पर एक न्यूड फोटो लगाते थे। उसी सोशल मीडिया की आईडी से वह व्हाट्सएप चैटिंग करते थे और वीडियो कॉल करते थे। वीडियो कॉल के दौरान वह न्यूड वीडियो को प्ले कर दिया करते थे।
दूसरी ओर कॉलर को भी वह न्यूड होने के लिए कह दिया करते थे। इस तरह वह इस पूरे वीडियो को बना लिया करते थे। बाद में स्वयं को सोशल मीडिया का मैनेजर, अधिकारी, भारतीय टेरिटरी का हेड आदि बता कर इस वीडियो के वायरल हो जाने के संबंध में डराते थे। इ
सके एवज में खाते में पैसा डालने के लिए कहते थे। इस तरह घटना को अंजाम देते थे। अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के शिक्षक के साथ भी इन लोगों ने यही किया। इसके अलावा कई प्रांतों में इस तरह की घटनाओं को अंजाम दिया है।
अलवर से करते थे ऑपरेट, प्रोवाइड कराता था एकाउंट
इससे पूछताछ में स्पष्ट हुआ है कि ये लोग पूर्व में पकड़े गए झांसी वाले गैंग को एकाउंट प्रोवाइड कराने का काम करते थे। इनका पूरा गैंग राजस्थान के अलवर से ऑपरेट होता है। यह भी खाते प्रोवाइड कराता था।
फिर उन खातों में मोवीक्यू एकाउंट के जरिये रुपये मंगाए जाते थे। उन रुपयों को एटीएम के जरिये निकालकर आपस में बांटा जाता था। इसे पूछताछ में अलवर के ही दो अन्य लोगों के नाम बताए हैं, जिनकी पुलिस ने तलाश शुरू कर दी है। जिनमें असलम व रऊफ के नाम सामने आए हैं।
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साइबर थाने के प्रभारी सुरेंद्र सिंह ने बताया कि 19 मई 2021 को अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के एक प्रोफेसर ने सूचना दी थी कि कुछ साइबर ठगी करने वाले फर्जी तरीके से वीडियो कॉल से बनी वीडियो के माध्यम से उन्हें ब्लैकमेल कर रहे हैं। अब तक यह ठगी करने वाले तीन लाख 13 हजार रुपये ठग चुके हैं।
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अब और पैसों की मांग कर रहे हैं। इस पर पुलिस ने अज्ञात लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया। विवेचना के दौरान पाया कि यह सब कारनामा झांसी से अंजाम दिया गया है। जून माह में पुलिस तीन आरोपियों तक पहुंच गई। पुलिस ने 15 जून को अशफाक खान, मोहम्मद जावेद खान और मोहम्मद शोएब को झांसी से गिरफ्तार था।
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उस समय उनका एक साथी फरार था। अब आकर उनके गैंग के चौथे साथी जयपुर विवेक विहार कॉलोनी हनुमान मंदिर के पीछे विजयपुरा सुमेल के संजय सिंह को गिरफ्तार किया है। उसके पास से मोबाइल के अलावा कई एटीएम कार्ड, पहचान पत्र आदि बरामद हुए हैं।
इस तरह करते थे ब्लैकमेल
पूछताछ में आरोपी ने पुलिस को बताया कि वह लड़की के नाम से एक फर्जी सोशल मीडिया की आईडी बनाते थे। उस पर एक न्यूड फोटो लगाते थे। उसी सोशल मीडिया की आईडी से वह व्हाट्सएप चैटिंग करते थे और वीडियो कॉल करते थे। वीडियो कॉल के दौरान वह न्यूड वीडियो को प्ले कर दिया करते थे।
दूसरी ओर कॉलर को भी वह न्यूड होने के लिए कह दिया करते थे। इस तरह वह इस पूरे वीडियो को बना लिया करते थे। बाद में स्वयं को सोशल मीडिया का मैनेजर, अधिकारी, भारतीय टेरिटरी का हेड आदि बता कर इस वीडियो के वायरल हो जाने के संबंध में डराते थे। इ
सके एवज में खाते में पैसा डालने के लिए कहते थे। इस तरह घटना को अंजाम देते थे। अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के शिक्षक के साथ भी इन लोगों ने यही किया। इसके अलावा कई प्रांतों में इस तरह की घटनाओं को अंजाम दिया है।
अलवर से करते थे ऑपरेट, प्रोवाइड कराता था एकाउंट
इससे पूछताछ में स्पष्ट हुआ है कि ये लोग पूर्व में पकड़े गए झांसी वाले गैंग को एकाउंट प्रोवाइड कराने का काम करते थे। इनका पूरा गैंग राजस्थान के अलवर से ऑपरेट होता है। यह भी खाते प्रोवाइड कराता था।
फिर उन खातों में मोवीक्यू एकाउंट के जरिये रुपये मंगाए जाते थे। उन रुपयों को एटीएम के जरिये निकालकर आपस में बांटा जाता था। इसे पूछताछ में अलवर के ही दो अन्य लोगों के नाम बताए हैं, जिनकी पुलिस ने तलाश शुरू कर दी है। जिनमें असलम व रऊफ के नाम सामने आए हैं।