फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Aligarh News ›   Annapurna Shobhayatra

अलीगढ़ः अक्षयपात्र और करछुल से देश में सुख-समृद्धि लाएंगी मां अन्नपूर्णा

Fri, 12 Nov 2021 12:10 AM IST
Aligarh Bureau अलीगढ़ ब्यूरो
Updated Fri, 12 Nov 2021 12:10 AM IST
विज्ञापन
Annapurna Shobhayatra
योगी कौशलनाथ महाराज। महंत गिलहराज मंदिर। - फोटो : CITY OFFICE
राजा तिवारी
विज्ञापन

100 साल पहले काशी (वाराणसी) से चोरी हुई मां अन्नपूर्णा की प्रतिमा की शोभायात्रा बृहस्पतिवार शाम अलीगढ़ पहुंची तो धर्माचार्यों ने स्वागत कर पूजा अर्चना की। इस दौरान शहर के संत-महंत, पंडित, ज्योतिषाचार्य और धर्माचार्यों ने कहा कि अब देश से भुखमरी समाप्त होगी। मां अन्नपूर्णा के हाथ में धारण अक्षयपात्र और करछुल (चमचा) इस देश में सुख समृद्धि लेकर आएंगे। मां अन्नपूर्णा की प्रतिमा के काशी में स्थापित होते ही आर्थिक प्रगति तेज होगी। कुछ लोगों ने कहा कि दो साल की कानूनी प्रक्रिया के बाद मोदी सरकार की पहल पर मां अन्नपूर्णा की प्रतिमा आने से पहले कोरोना काल में उन्हीं की कृपा से देश में अनाज की कमी नहीं रही। सरकार ने हर गरीब को मुफ्त में राशन बांटा है। शहर के अचलेश्वर महादेव मंदिर परिसर में अन्नपूर्णा का मंदिर है, जहां करीब 400 साल पुरानी मूर्ति है।
ये है धार्मिक मान्यता
धर्माचार्यों ने बताया कि मां अन्नपूर्णा को मां जगदंबा का स्वरूप माना गया है। अन्नपूर्णा का शाब्दिक अर्थ है, धान्य (अन्न) की अधिष्ठात्री। बाबा विश्वनाथ की नगरी काशी में मां अन्नपूर्णा के आधिपत्य में आने की कथा रोचक है। भगवान शंकर जब माता पार्वती के संग विवाह करने के बाद उनके पिता के क्षेत्र कैलाश पर्वत पर रहने लगे, तब देवी ने अपने मायके में निवास करने के बजाय पति की नगरी काशी में रहने की इच्छा व्यक्त की। महादेव उन्हें साथ लेकर अपने सनातन गृह अविमुक्त-क्षेत्र (काशी) आ गए। काशी उस समय केवल महाश्मशान नगरी थी। माता पार्वती को सामान्य गृहस्थ स्त्री के समान ही अपने घर को मात्र श्मशान होना नहीं भाया। इस पर यह व्यवस्था बनी कि सतयुग, त्रेता व द्वापर में काशी श्मशान रहे और कलियुग में यह अन्नपूर्णा की पुरी होकर बसे। इसी कारण अन्नपूर्णा का मंदिर काशी का प्रधान देवीपीठ हुआ। उनके आगमन से देश में सुख-समृद्धि और प्रगति तेज हो जाएगी। भारत संपन्नता की ओर बढ़ेगा।
विज्ञापन

कोरोना काल में जिस प्रकार सरकार ने सभी गरीबों को मुफ्त में राशन बांटा। यह सब मां अन्नपूर्णा की ही कृपा है। एक ओर आंकड़े जारी हो रहे हैं कि देश में भुखमरी का प्रभाव बढ़ रहा है। जबकि प्रधानमंत्री मुफ्त राशन बांट रहे हैं। मां अन्नपूर्णा की प्रतिमा स्थापित होने से किसान संपन्न होने लगेंगे। - पं. हृदय रंजन शर्मा, अध्यक्ष श्री गुरु ज्योतिष शोध संस्थान।
विज्ञापन
विज्ञापन

मां अन्नपूर्णा के हाथों में खीर का कटोरा (अक्षय पात्र) और धान की बाली होती है। हिंदू मान्यताओं में अन्न को सबसे पवित्र माना गया है। जबकि धान धन धान्य का प्रतीक है। किसान की संपन्नता का प्रतीक है। काशी में मां की प्रतिमा के स्थापित होते ही, देश में ऊर्जा का संचार होगा। भारत का भंडार हमेशा भरा रहेगा। - सुनील कौशल महाराज।

अन्नपूर्णा मां पार्वती का स्वरूप हैं। काशी विश्वनाथ कॉरिडोर बनते ही कानूनी प्रक्रिया खत्म हुई और मां अन्नपूर्णा अपने धाम के लिए यात्रा कर रही हैं। भगवान शिव से मिलकर मां अन्नपूर्णा की कृपा देश पर बरसेगी और भुखमरी जैसे हालात खत्म होंगे। सनातन धर्म में कहा गया है कि शिव शक्ति के बिना अधूरे हैं। - योगी कौशलनाथ महाराज, महंत श्री सिद्धपीठ गिलहराज मंदिर।

पंडित हृदय रंजन शर्मा।

पंडित हृदय रंजन शर्मा।- फोटो : CITY OFFICE

सुनील कौशल महाराज।

सुनील कौशल महाराज।- फोटो : CITY OFFICE

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed