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75 गांवों में पहुंचा लंपी का प्रकोप, बीमार पशुओं की संख्या 2200 के पार, दो की मौत
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पशुओं में फैलने वाली लंपी स्किन डिजीज (एलएसडी) का प्रकोप लगातार बढ़ता ही जा रहा है। बुधवार तक करीब 75 गांवों के बीमारी पशुओं की संख्या 2200 के पार पहुंच गई। खैर क्षेत्र के शिवाला में दो गोवंश की मौत हो गई। जिले में अब तक लंपी से नौ पशुओं की मौत हो चुकी है। पशुपालन विभाग की टीमें भी बीमार पशुओं के इलाज को गांवों में जुटी हैं। पशुपालन विभाग के अफसरों का दावा है कि उपचार के बाद पशुओं की तेजी से रिकवरी हो रही है। लंपी रोग के प्रकोप को देखते हुए बचाव के लिए पशुपालकों को जागरुक किया जा रहा है।
उप निदेशक और सीवीओ ने जाना हाल
उपनिदेशक पशुपालन डॉ. राजेश कुमार, मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. सीबी सिंह के नेतृत्व में कई टीमों ने कस्बा जट्टारी, टप्पल, पिसावा एवं चंडौस क्षेत्र के गांवों में दौरा किया। उन्होंने बीमार पशुओं का उपचार कराया। चिकित्सकों ने ग्रामीणों को बताया कि इस वायरस की वजह से पशुओं को काफी तेज बुखार आता है। उनकी शारीरिक क्षमता प्रभावित होने लगती है। गायों या दूसरे पशुओं में इस तरह के लक्षण नजर आने पर तत्काल पशु पालन विभाग को सूचना दें, ताकि बीमार पशुओं का बेहतर उपचार किया जा सके। उन्होंने कहा कि रोग से पशुओं को बचाने के लिए मच्छर, मक्खी आदि को रोकने के लिए साइपरमेथ्रीन का घोल पशुओं वाले स्थान पर करें। गुगल, कपूर और नीम के सूखे पत्तों का सुबह-शाम गहरा धुआं करें। साफ-सफाई के साथ ही पशुओं को बांधने वाले बाड़े को सूखा रखें। बीमार पशु को अलग रखें, पशुओं को जंगल लेकर न जाएं और पशुओं की खरीद एवं बिक्री से भी बचें।
लंपी बीमारी से सरकारी गोशालाओं में स्थिति पूरी तरह से नियंत्रण में है। बुधवार को करीब 65 पशुओं के खून के नमूने लिए गए हैं, जिन्हें जांच को मथुुरा स्थित प्रयोगशाला भेजा गया है। पशुपालन विभाग की टीमें लगातार गांवों में जाकर बीमार पशुओं का उपचार कर रही हैं। लंपी से अब तक करीब 2200 पशुओं के चपेट में आने की पहचान की गई है। अभी तक लंपी रोग से पीड़ित किसी पशु की मौत नहीं हुई है। पशुओं से रोग से बचाव को वैक्सीन की मांग की गई है, जल्द ही वैक्सीन मिलने पर पशुओं का सघन टीकाकरण किया जाएगा।
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- डॉ. बीपी सिंह, मुख्य पशु चिकित्साधिकारी
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उप निदेशक और सीवीओ ने जाना हाल
उपनिदेशक पशुपालन डॉ. राजेश कुमार, मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. सीबी सिंह के नेतृत्व में कई टीमों ने कस्बा जट्टारी, टप्पल, पिसावा एवं चंडौस क्षेत्र के गांवों में दौरा किया। उन्होंने बीमार पशुओं का उपचार कराया। चिकित्सकों ने ग्रामीणों को बताया कि इस वायरस की वजह से पशुओं को काफी तेज बुखार आता है। उनकी शारीरिक क्षमता प्रभावित होने लगती है। गायों या दूसरे पशुओं में इस तरह के लक्षण नजर आने पर तत्काल पशु पालन विभाग को सूचना दें, ताकि बीमार पशुओं का बेहतर उपचार किया जा सके। उन्होंने कहा कि रोग से पशुओं को बचाने के लिए मच्छर, मक्खी आदि को रोकने के लिए साइपरमेथ्रीन का घोल पशुओं वाले स्थान पर करें। गुगल, कपूर और नीम के सूखे पत्तों का सुबह-शाम गहरा धुआं करें। साफ-सफाई के साथ ही पशुओं को बांधने वाले बाड़े को सूखा रखें। बीमार पशु को अलग रखें, पशुओं को जंगल लेकर न जाएं और पशुओं की खरीद एवं बिक्री से भी बचें।
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लंपी बीमारी से सरकारी गोशालाओं में स्थिति पूरी तरह से नियंत्रण में है। बुधवार को करीब 65 पशुओं के खून के नमूने लिए गए हैं, जिन्हें जांच को मथुुरा स्थित प्रयोगशाला भेजा गया है। पशुपालन विभाग की टीमें लगातार गांवों में जाकर बीमार पशुओं का उपचार कर रही हैं। लंपी से अब तक करीब 2200 पशुओं के चपेट में आने की पहचान की गई है। अभी तक लंपी रोग से पीड़ित किसी पशु की मौत नहीं हुई है। पशुओं से रोग से बचाव को वैक्सीन की मांग की गई है, जल्द ही वैक्सीन मिलने पर पशुओं का सघन टीकाकरण किया जाएगा।
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- डॉ. बीपी सिंह, मुख्य पशु चिकित्साधिकारी